अपनी प्रशंसा पर भी टोल टैक्स लगाइए। क्योंकि जब हमारी प्रशंसा होती है और हमने प्रशंसा को ऐसे ही आने दिया, तो वह अहंकार लेकर आएगी। यहीं से प्रशंसा महंगी पड़ जाती है। प्रशंसा दुर्गुण बन जाती है। जब हमारी लोकप्रियता बढ़ती है, लोग हमारी तारीफ करते हैं तो शब्द और संबोधन उससे भी बड़े […]
Tag: pandit vijayshankar mehta
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपने व्यक्तित्व को निखारने की कला का नाम ही विवेक है
Hindi News Opinion Column By Pt. Vijay Shankar Mehta – Wisdom Is The Art Of Refining One’s Personality. 6 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता अगर विवेक जाग जाए तो किसी की भी वाणी सुखदायक, गंभीर और कोमल वचन वाली हो जाएगी। काकभुशुंडि जी ने राम जी की वाणी के लिए कहा था- सुनि […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: जीवन देह नहीं आत्मा पर टिका है, रक्षाबंधन की यही सीख
गहराई से भीतर देखें तो हमें अपने भीतर कोई न कोई जानवर सक्रिय होता दिख जाएगा। जिसका जानवर जाग जाए और बाहर की गतिविधि पर अपना प्रभाव रख दे तो फिर हम पशु जैसे हो जाते हैं। भारतीय परंपरा ने इसी जानवर को बांधने के लिए रक्षाबंधन का त्योहार बनाया। यह एक धागा हमें नैतिक […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: साधु को धन का प्रयोग करते समय सावधान रहना होगा
Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column | Sadhus Must Be Cautious With Money 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता चुनावों का धन तो बेहिसाब होता ही है, लेकिन जब मंदिरों का धन भी बिना हिसाब के हो जाए तो चिंता होना स्वाभाविक है। इस दौर में तो धर्म भी धन के बिना […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परिवार के प्रति अपनापन फूल की गंध जैसा होता है
Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column | Family Values & Relationship Tips 52 मिनट पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता हर नाव में छेद होता ही है। कोई छेद काम दिखा जाता है तो नाव को नुकसान हो जाता है। और कोई छेद सिर्फ छेद रह जाता है, पूरी जिंदगी नाव सकुशल चलती रहती […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: सावन को चाहे जैसे मनाएं, पर एक तप से भी गुजरें
Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta Column | Sawan Shiva Worship & Meditation Tips 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता हम सब सावन के महीने से गुजर रहे हैं। यह शिव-उपासना का बहुत ही पवित्र कालखंड है। शिव जी को जगतगुरु माना गया है। गुरु परमात्मा की वाणी को शब्द देता है। ईश्वर […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: जो भी काम करें, गंभीरता, लगन व ईमानदारी से करें
बहानों को आगे-पीछे झूठ में बदलना ही पड़ता है, इसलिए बहाने बनाने की आदत छोड़ें। जो भी काम करें, गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। बहाना एक तरह की बेईमानी है और यदि आदत में आ गया तो बहाना अपराध बन जाएगा। अगर आप बहुत काम नहीं करते हैं तो इसका मतलब आपको बहाने बनाने […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: साधु यदि धन से जुड़ा हो तो बहुत सजगता रखनी पड़ेगी
भक्ति के लिए जिन गतिविधियों की आवश्यकता बताई गई, उनमें शामिल हैं नियमित रहना, निरंतरता होना, सचेत होना, एकाग्रता बनाए रखना। तुलसीदास जी ने तो हनुमान चालीसा में लिखा है- नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा। अगर आप भक्ति कर रहे हैं तो निरंतरता बनाए रखिए। और जब ये बातें भक्ति से […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अकेलेपन को एकांत में बदल देने में सक्षम है योग
अकेलापन और भविष्य का भय युवाओं को कॉर्पोरेट जगत में और बड़े-बूढ़ों को परिवार में सता रहा है। जिन्होंने नौकरी, कारोबार की दुनिया में खूब सुख और धन अर्जित किया, उनके चेहरे पर भी इसकी झलक मिलती है। और परिवार में बड़े-बूढ़ों के जीवन में अकेलापन ऐसा उतरा कि वृद्धावस्था घोर पीड़ा लगने लगी। दुनियादारी […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अवसरों को खोजने से ज्यादा उन्हें पहचानना आवश्यक है
Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: Recognize Opportunities, Dont Just Find Them 2 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता सभी लोग, जिनकी स्मृतियां थोड़ी ताजी हैं, जब स्कूल में पढ़ते थे तो उन्हें याद होगा कि वो किस श्रेणी में थे। तो जो लोग उस समय बहुत तेज दिमाग थे, फ्रंट लाइन पर […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: देश की ह्यूमन कैपिटल का सदुपयोग करना चाहिए
हमारे देश की समस्याओं की सूची में आबादी एक बहुत बड़ा मसला है। जनसंख्या के मामले में हम दुनिया में नंबर एक हो गए। इस समस्या को लेकर जानकार लोगों के मत अलग-अलग हैं। एक वर्ग का मानना है, धर्म की दृष्टि से जनसंख्या वृद्धि को देखें तो असंतुलन है, आगे खतरा बढ़ सकता है। […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: योग लोकप्रिय तो हो गया है पर इसे आवश्यक बनाना होगा
Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta Column: Yoga Popular But Needs To Be Essential 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता कल सारी दुनिया योग की तैयारी कर रही होगी। शिव और पार्वती जी ने एकांत में चर्चा की। उस चर्चा का संपादन पतंजलि ऋषि ने किया, वही योग है। योग अत्यधिक लोकप्रिय होता […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: यदि हम अहंकारी हैं तो अपना ही नुकसान कर रहे होते हैं
अहंकार को लेकर हमारे शास्त्रों में अलग-अलग ढंग से कई बातें बोली गई हैं। अभिमान भक्ति के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा है और संसार में भी घमंड आखिर में तकलीफ ही देता है। अब इस बात को एक नए ढंग से तुलसीदास जी प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अभिमान को क्लेश और शोक से जोड़ […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपने आप को सात्विक रूप से सक्रिय रखना आवश्यक
सभी कहते हैं धैर्य रखो, लेकिन जब अवसर आता है तो धैर्य छूट जाता है। तब कुछ क्रियाएं है, जो अगर आप नियमित करें तो अपने-आप धैर्य का जन्म हो जाएगा। उनमें से एक है- कर्मकांड। पिछले दिनों मैं कोलकाता में कथा कर रहा था तो वहां मैंने अच्छे पढ़े-लिखे हाइटेक लोगों को कर्मकांड करते […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: मितव्ययी धन का मूल्य देखता है तो कंजूस कीमत देखता है
Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta’s Column: The Frugal Person Sees The Value Of Money, While The Miser Sees The Price. 4 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता मितव्ययी और कंजूस होने में फर्क है। यह वही अंतर है, जो एक समझदार और एक कृपण में होता है। मितव्ययी धन के पीछे के मूल्य […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: कोई दुर्भाग्य इतना बड़ा नहीं होता कि सौभाग्य को पी जाए
Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: No Misfortune Overwhelms Good Fortune 2 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता कुछ लोगों ने गलत काम किया और एक बड़ी परीक्षा रद्द हो गई। अब बच्चे गलत कदम ना उठा लें। विद्रोह, घुटन, निराशा स्वाभाविक है। परीक्षा की साख तो दांव पर लग ही गई, अब […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे
बहुत से लोग हैं, जिन्हें बाहर की दुनिया में दूसरे लोगों द्वारा खूब मान दिया जाता है। और ऐसे प्रभावशाली लोग जब घर आते हैं, तो कभी-कभी घर में उन्हें बहुत अपमान मिलता है। ऐसा क्यों हो जाता है? दरअसल परमात्मा चाहता है कि बाहर मिला हुआ मान अभिमान में न बदल जाए, इसलिए घर-परिवार […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे
बहुत से लोग हैं, जिन्हें बाहर की दुनिया में दूसरे लोगों द्वारा खूब मान दिया जाता है। और ऐसे प्रभावशाली लोग जब घर आते हैं, तो कभी-कभी घर में उन्हें बहुत अपमान मिलता है। ऐसा क्यों हो जाता है? दरअसल परमात्मा चाहता है कि बाहर मिला हुआ मान अभिमान में न बदल जाए, इसलिए घर-परिवार […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: थोड़ी-सी समझ भी अगर दिखाएं तो रिश्ता बच जाता है
Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta’s Column: A Relationship Can Be Saved If You Show Even A Little Understanding 5 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता वैसे तो पूरी दुनिया में हम तलाक के मामले में सबसे पीछे हैं, लेकिन पिछले 5-7 साल में वृद्धि हुई है। लोग तनावपूर्ण दाम्पत्य जीवन से शांतिपूर्ण अलगाव […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अवकाश अवश्य मनाएं पर इन चार बातों का ध्यान रखें
बच्चों की स्कूलों की छुट्टियां लग चुकी हैं या लग रही हैं। अधिकांश पैरेंट्स बच्चों को लेकर यात्रा पर निकलने की तैयारी में हैं। ऋषि-मुनि भी अवकाश अर्जित करते थे। छुट्टियां मनाने का उनका अपना ढंग था, क्योंकि गुरुकुल व्यवस्था थी। जब आप अवकाश का मन बनाएं तो सबसे पहले समय-सीमा तय करें। सहयोगी कौन […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अब हमारे परिवारों में रिवर्स मेंटरिंग का समय आ गया है
हमारे परिवारों में देखते ही देखते हम लोगों ने विभेद खड़े कर दिए। परिवार में सब समान होते हैं, ये विचार ही नई सोच की आंधी में उड़ गया। निज-हित की अति ने परिवार में कलह, विघटन को आमंत्रण दे दिया। बड़े-छोटे का झंझट अहंकार को पोषित कर रहा है और अहंकार परिवारों का सबसे […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: युद्ध अगर हो तो केवल धर्म की रक्षा के लिए होना चाहिए
इस समय युद्ध के जो दृश्य चल रहे हैं, उसे देख कबीर की एक पंक्ति याद आती है- चींटी चावल ले चली बीच में मिल गई दाल, कहत कबीर दो न मिले एक ले दूजी डाल। एक चींटी चावल का दाना लेकर जा रही थी। रास्ते में दाल मिल गई तो सोचा दाल भी ले […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: गाय हमारे ग्रामीण और शहरी जीवन की सशक्त कड़ी है
Hindi News Opinion Pandit VijayShankar Mehta Column | Cow: Strong Link Rural & Urban Life 5 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता भरोसे की चिट्ठी और सच्चाई की पावती हो, पुराने लोग ऐसा कहा करते थे। इसका मतलब होता है जो काम करो, सच्चाई के साथ करो। 27 अप्रैल को गो-सम्मान दिवस मनाया जाएगा। […]





















