पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  जो भी काम करें, गंभीरता, लगन व ईमानदारी से करें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: जो भी काम करें, गंभीरता, लगन व ईमानदारी से करें

बहानों को आगे-पीछे झूठ में बदलना ही पड़ता है, इसलिए बहाने बनाने की आदत छोड़ें। जो भी काम करें, गंभीरता, लगन और ईमानदारी से करें। बहाना एक तरह की बेईमानी है और यदि आदत में आ गया तो बहाना अपराध बन जाएगा। अगर आप बहुत काम नहीं करते हैं तो इसका मतलब आपको बहाने बनाने […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  साधु यदि धन से जुड़ा हो तो बहुत सजगता रखनी पड़ेगी
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: साधु यदि धन से जुड़ा हो तो बहुत सजगता रखनी पड़ेगी

भक्ति के लिए जिन गतिविधियों की आवश्यकता बताई गई, उनमें शामिल हैं नियमित रहना, निरंतरता होना, सचेत होना, एकाग्रता बनाए रखना। तुलसीदास जी ने तो हनुमान चालीसा में लिखा है- नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा। अगर आप भक्ति कर रहे हैं तो निरंतरता बनाए रखिए। और जब ये बातें भक्ति से […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अकेलेपन को एकांत में बदल देने में सक्षम है योग
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अकेलेपन को एकांत में बदल देने में सक्षम है योग

अकेलापन और भविष्य का भय युवाओं को कॉर्पोरेट जगत में और बड़े-बूढ़ों को परिवार में सता रहा है। जिन्होंने नौकरी, कारोबार की दुनिया में खूब सुख और धन अर्जित किया, उनके चेहरे पर भी इसकी झलक मिलती है। और परिवार में बड़े-बूढ़ों के जीवन में अकेलापन ऐसा उतरा कि वृद्धावस्था घोर पीड़ा लगने लगी। दुनियादारी […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अवसरों को खोजने से ज्यादा उन्हें पहचानना आवश्यक है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अवसरों को खोजने से ज्यादा उन्हें पहचानना आवश्यक है

Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: Recognize Opportunities, Dont Just Find Them 2 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता सभी लोग, जिनकी स्मृतियां थोड़ी ताजी हैं, जब स्कूल में पढ़ते थे तो उन्हें याद होगा कि वो किस श्रेणी में थे। तो जो लोग उस समय बहुत तेज दिमाग थे, फ्रंट लाइन पर […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  देश की ह्यूमन कैपिटल का सदुपयोग करना चाहिए
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: देश की ह्यूमन कैपिटल का सदुपयोग करना चाहिए

हमारे देश की समस्याओं की सूची में आबादी एक बहुत बड़ा मसला है। जनसंख्या के मामले में हम दुनिया में नंबर एक हो गए। इस समस्या को लेकर जानकार लोगों के मत अलग-अलग हैं। एक वर्ग का मानना है, धर्म की दृष्टि से जनसंख्या वृद्धि को देखें तो असंतुलन है, आगे खतरा बढ़ सकता है। […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  योग लोकप्रिय तो हो गया है पर इसे आवश्यक बनाना होगा
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: योग लोकप्रिय तो हो गया है पर इसे आवश्यक बनाना होगा

Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta Column: Yoga Popular But Needs To Be Essential 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता कल सारी दुनिया योग की तैयारी कर रही होगी। शिव और पार्वती जी ने एकांत में चर्चा की। उस चर्चा का संपादन पतंजलि ऋषि ने किया, वही योग है। योग अत्यधिक लोकप्रिय होता […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  यदि हम अहंकारी हैं तो अपना ही नुकसान कर रहे होते हैं
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: यदि हम अहंकारी हैं तो अपना ही नुकसान कर रहे होते हैं

अहंकार को लेकर हमारे शास्त्रों में अलग-अलग ढंग से कई बातें बोली गई हैं। अभिमान भक्ति के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा है और संसार में भी घमंड आखिर में तकलीफ ही देता है। अब इस बात को एक नए ढंग से तुलसीदास जी प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अभिमान को क्लेश और शोक से जोड़ […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अपने आप को सात्विक रूप से सक्रिय रखना आवश्यक
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपने आप को सात्विक रूप से सक्रिय रखना आवश्यक

सभी कहते हैं धैर्य रखो, लेकिन जब अवसर आता है तो धैर्य छूट जाता है। तब कुछ क्रियाएं है, जो अगर आप नियमित करें तो अपने-आप धैर्य का जन्म हो जाएगा। उनमें से एक है- कर्मकांड। पिछले दिनों मैं कोलकाता में कथा कर रहा था तो वहां मैंने अच्छे पढ़े-लिखे हाइटेक लोगों को कर्मकांड करते […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  मितव्ययी धन का मूल्य देखता है तो कंजूस कीमत देखता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: मितव्ययी धन का मूल्य देखता है तो कंजूस कीमत देखता है

Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta’s Column: The Frugal Person Sees The Value Of Money, While The Miser Sees The Price. 4 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता मितव्ययी और कंजूस होने में फर्क है। यह वही अंतर है, जो एक समझदार और एक कृपण में होता है। मितव्ययी धन के पीछे के मूल्य […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  कोई दुर्भाग्य इतना बड़ा नहीं होता कि सौभाग्य को पी जाए
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: कोई दुर्भाग्य इतना बड़ा नहीं होता कि सौभाग्य को पी जाए

Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: No Misfortune Overwhelms Good Fortune 2 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता कुछ लोगों ने गलत काम किया और एक बड़ी परीक्षा रद्द हो गई। अब बच्चे गलत कदम ना उठा लें। विद्रोह, घुटन, निराशा स्वाभाविक है। परीक्षा की साख तो दांव पर लग ही गई, अब […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे

बहुत से लोग हैं, जिन्हें बाहर की दुनिया में दूसरे लोगों द्वारा खूब मान दिया जाता है। और ऐसे प्रभावशाली लोग जब घर आते हैं, तो कभी-कभी घर में उन्हें बहुत अपमान मिलता है। ऐसा क्यों हो जाता है? दरअसल परमात्मा चाहता है कि बाहर मिला हुआ मान अभिमान में न बदल जाए, इसलिए घर-परिवार […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: परिवार बचें और मांओं- बहनों की प्रसन्नता भी बनी रहे

बहुत से लोग हैं, जिन्हें बाहर की दुनिया में दूसरे लोगों द्वारा खूब मान दिया जाता है। और ऐसे प्रभावशाली लोग जब घर आते हैं, तो कभी-कभी घर में उन्हें बहुत अपमान मिलता है। ऐसा क्यों हो जाता है? दरअसल परमात्मा चाहता है कि बाहर मिला हुआ मान अभिमान में न बदल जाए, इसलिए घर-परिवार […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है

मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है

मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  थोड़ी-सी समझ भी अगर दिखाएं तो रिश्ता बच जाता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: थोड़ी-सी समझ भी अगर दिखाएं तो रिश्ता बच जाता है

Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta’s Column: A Relationship Can Be Saved If You Show Even A Little Understanding 5 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता वैसे तो पूरी दुनिया में हम तलाक के मामले में सबसे पीछे हैं, लेकिन पिछले 5-7 साल में वृद्धि हुई है। लोग तनावपूर्ण दाम्पत्य जीवन से शांतिपूर्ण अलगाव […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अवकाश अवश्य मनाएं पर इन चार बातों का ध्यान रखें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अवकाश अवश्य मनाएं पर इन चार बातों का ध्यान रखें

बच्चों की स्कूलों की छुट्टियां लग चुकी हैं या लग रही हैं। अधिकांश पैरेंट्स बच्चों को लेकर यात्रा पर निकलने की तैयारी में हैं। ऋषि-मुनि भी अवकाश अर्जित करते थे। छुट्टियां मनाने का उनका अपना ढंग था, क्योंकि गुरुकुल व्यवस्था थी। जब आप अवकाश का मन बनाएं तो सबसे पहले समय-सीमा तय करें। सहयोगी कौन […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अब हमारे परिवारों में रिवर्स मेंटरिंग का समय आ गया है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अब हमारे परिवारों में रिवर्स मेंटरिंग का समय आ गया है

हमारे परिवारों में देखते ही देखते हम लोगों ने विभेद खड़े कर दिए। परिवार में सब समान होते हैं, ये विचार ही नई सोच की आंधी में उड़ गया। निज-हित की अति ने परिवार में कलह, विघटन को आमंत्रण दे दिया। बड़े-छोटे का झंझट अहंकार को पोषित कर रहा है और अहंकार परिवारों का सबसे […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  युद्ध अगर हो तो केवल धर्म की रक्षा के लिए होना चाहिए
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: युद्ध अगर हो तो केवल धर्म की रक्षा के लिए होना चाहिए

इस समय युद्ध के जो दृश्य चल रहे हैं, उसे देख कबीर की एक पंक्ति याद आती है- चींटी चावल ले चली बीच में मिल गई दाल, कहत कबीर दो न मिले एक ले दूजी डाल। एक चींटी चावल का दाना लेकर जा रही थी। रास्ते में दाल मिल गई तो सोचा दाल भी ले […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  गाय हमारे ग्रामीण और शहरी जीवन की सशक्त कड़ी है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: गाय हमारे ग्रामीण और शहरी जीवन की सशक्त कड़ी है

Hindi News Opinion Pandit VijayShankar Mehta Column | Cow: Strong Link Rural & Urban Life 5 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता भरोसे की चिट्ठी और सच्चाई की पावती हो, पुराने लोग ऐसा कहा करते थे। इसका मतलब होता है जो काम करो, सच्चाई के साथ करो। 27 अप्रैल को गो-सम्मान दिवस मनाया जाएगा। […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  जब भी विपत्ति आए, उसका अच्छे-से सामना करिएगा
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: जब भी विपत्ति आए, उसका अच्छे-से सामना करिएगा

मनुष्य के जीवन में अचानक जब कुछ होता है, तब उसकी परीक्षा होती है कि वो कितना समझदार है। कैसे उसका सामना करता है। आप कितने ही समर्थ व्यक्ति हों, लेकिन विपरीत परिस्थिति आपके हाथ में नहीं है। हां, उसको संभालना आपके हाथ में है। विपत्ति में कुछ लोग निखर कर कुंदन बन जाते हैं […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  विवाह में देह से आगे बढ़कर आत्मा तक की यात्रा करें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: विवाह में देह से आगे बढ़कर आत्मा तक की यात्रा करें

विवाह इसीलिए रचाया जाता है कि जीवन में एक अभाव की पूर्ति हो जाए। विवाह पूर्व जिस सुख की तलाश में मनुष्य रहता है, वो प्राप्त हो जाए। दु:ख की कल्पना कोई नहीं करता। लेकिन इन दिनों विवाह के मतलब बदलते जा रहे हैं। एक पीढ़ी तो भूल ही जाएगी कि विवाह संस्कार है। और […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  उत्साह को उदासी में बदलने वाले मन पर काम करते रहें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: उत्साह को उदासी में बदलने वाले मन पर काम करते रहें

Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: Work On Mind Turning Sadness To Enthusiasm 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता कहा तो जाता है कि हर काम उत्साह से किया जाए। और यह भी सत्य है कि बिना दबाव के इन दिनों कोई काम हो ही नहीं सकता। तो उत्साह को समझा जाए। […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  दु:ख की समझ का नाम ही दु:ख का मिटना है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: दु:ख की समझ का नाम ही दु:ख का मिटना है

Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: Understanding Sorrow Is Ending Sorrow 4 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता दुनिया में हमारा इरादा कई चीजें कमाने का होता है। धन, पद, प्रतिष्ठा, सुख, परिवार- ये सब कमाई के हिस्से हैं। लेकिन दो और चीजें भी हमारी कमाई बन जाती हैं- सुख और दु:ख। सुख […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अपने काम से प्रेम करिए तो कर्म बोझ नहीं लगेगा
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपने काम से प्रेम करिए तो कर्म बोझ नहीं लगेगा

Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta: Love Your Work, Karma Wont Feel Like A Burden 4 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता आजकल ट्रांसफरेबल स्किल्स का जमाना है। इसे सीधी भाषा में कहें तो किसी एक काम में दूसरे काम के कौशल को उतारना। जैसे इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन, समय प्रबंधन, डेटा विश्लेषण। एक ही काम […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  हम अपने बच्चों को तभी बचा पाएंगे जब खुद सावधान होंगे
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हम अपने बच्चों को तभी बचा पाएंगे जब खुद सावधान होंगे

Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: AIs Impact On Children & Family Safety 51 मिनट पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता दुनियाभर के बाजार आज एआई में जमकर निवेश कर रहे हैं। दीवानों ने दर्द को ही दवा बना लिया है। हर बात का निदान एआई में ढूंढा जा रहा है। हमारे यहां दो […]