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- Pt. Vijayshankar Mehta Column: Yoga Popular But Needs To Be Essential
3 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
कल सारी दुनिया योग की तैयारी कर रही होगी। शिव और पार्वती जी ने एकांत में चर्चा की। उस चर्चा का संपादन पतंजलि ऋषि ने किया, वही योग है। योग अत्यधिक लोकप्रिय होता जा रहा है। इसके क्या परिणाम मिलेंगे, इस पर अलग-अलग दृष्टि से विद्वान बोल रहे हैं। निजी अनुभव से मैं यह कहता हूं कि योग करने से हमारे व्यक्तित्व की दो कमजोरियां खूबी में बदलती हैं।
एक है शर्मीला होना, दूसरा होता है संकोची रहना। अब आज की दुनिया में अगर आप शर्मीले हैं तो नुकसान उठाएंगे, संकोची हैं तो लाभ नहीं ले पाएंगे। शर्मीला होना एक भावनात्मक प्रतिक्रिया है और संकोची होना एक व्यावहारिक झिझक है। यदि आप शर्मीले हैं, संकोची हैं तो समझ लीजिए आप अपना नुकसान कर रहे हैं।
लेकिन यदि आप नियमित योग करें तो शर्मीलापन एक अनुशासन में बदलेगा और आपका संकोची होना आपको मर्यादित बनाएगा। और ये दोनों खूबियां बड़ी आसानी से योग से प्राप्त हो जाएंगी। योग लोकप्रिय तो हो गया है पर इसे आवश्यक बनाना बाकी है।









