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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपने व्यक्तित्व को निखारने की कला का नाम ही विवेक है

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  • Column By Pt. Vijay Shankar Mehta – Wisdom Is The Art Of Refining One’s Personality.

6 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

अगर विवेक जाग जाए तो किसी की भी वाणी सुखदायक, गंभीर और कोमल वचन वाली हो जाएगी। काकभुशुंडि जी ने राम जी की वाणी के लिए कहा था- सुनि सप्रेम मम बानी देखि दीन निज दास, बचन सुखद गंभीर मृदु बोले रमानिवास। मेरी प्रेमयुक्त वाणी सुनकर और अपने दास को दीन देखकर रमानिवास राम सुखदायक, गंभीर और कोमल वचन बोले।

राम कम बोलते थे, लेकिन जब भी बोलते, बहुत अर्थपूर्ण बोलते थे। उनकी वाणी की यह तीन विशेषताएं थीं, क्योंकि उनका विवेक जागा हुआ था। संयोग से गणेशोत्सव आरम्भ हो चुके हैं। सरस्वती बुद्धि की देवी हैं और गणेश जी विवेक के देवता हैं। हम अपने भीतर विवेक जगाने के लिए कुछ सरल प्रयास कर सकते हैं।

जैसे अपनी कमजोरियों को दूसरों को बताने में पूरी ईमानदारी बरतें और अपनी कमजोरियों को संवारने में, ठीक करने में खूब परिश्रम करें। जितना लोगों से ओपन फीडबैक हम अपने लिए लेते रहेंगे, अपने व्यक्तित्व को निखारने में उतनी सुविधा ही होगी और इसी को विवेक कहते हैं।

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