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- N. Raghuraman’s Column – Lord Ganesha Is A Universal And Lifelong Teacher.
8 घंटे पहले
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एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु
क्या आप जानते हैं कि भगवान विष्णु की तरह भगवान गणेश के भी कई अवतार हैं? ‘मुद्गल’ पुराण में उनके ऐसे कई भव्य अवतारों का वर्णन है। इनमें से हर अवतार हमें किसी खास इंसानी बुराई- बंधनकारी अहंकार से लेकर इंसान को जकड़ लेने वाले लालच तक- से मुक्त करता है। मुझे आध्यात्मिकता से जुड़ा एक पोर्टल ‘इंडियात्रा’ चलाने वाले अपने दोस्त से एक क्विज मिला। इसमें मुझे भगवान गणेश की बुद्धिमता से जुड़ी ऐसी अनसुनी दिलचस्प कहानियां मिलीं, जो आज भी प्रासंगिक हैं। कुछ अवतारों की कहानियां यहां पेश हैं।
वक्रतुंड : हम सभी ‘वक्रतुंड महाकाय’ गाते हैं। यह अवतार अपनी मुड़ी हुई सूंड के लिए प्रख्यात है। इनका वाहन सिंह है। वक्रतुंड की सूंड बुद्धिमत्ता, फ्लेक्सिबिटी और ताकत का प्रतीक है। इसके आकार में आदिकालीन ध्वनि ‘ओम’ का प्रतिबिम्ब दिखता है, जिसे उपनिषद् सर्वोच्च आध्यात्मिक ज्ञान बताते हैं। जब मत्सरासुर को रोकना असंभव हो गया, तब दत्तात्रेय ने ‘ओम’ की शक्ति को बताया और देवताओं को वक्रतुंड की मदद लेने के लिए कहा। इस अवतार में गणेशजी ने मत्सरासुर को हराया, जो ईर्ष्या, जलन और स्वार्थ का प्रतीक है।
एकदंत : दर्शन सिखाने के लिए पुराण कहानियों का इस्तेमाल करते हैं। एकदंत में ‘एक’ माया (इल्यूजन) का प्रतिनिधित्व करता है और ‘दंत’ का अर्थ है सत्य, जो अहंकार पर सत्य की जीत का प्रतीक है। जब राक्षस मदासुर अजेय हो गया, तब ऋषि सनत्कुमार ने देवताओं को एकदंत के आह्वान की सलाह दी। गणेशजी को देखते ही मदासुर ने तुरंत आत्मसमर्पण कर दिया।
महोदर : यानी, बड़े उदर वाले गणेशजी। जब विकारों के राजा मोहासुर ने तबाही मचाई तो सूर्यदेव ने देवताओं को गणेशजी के आह्वान की सलाह दी। महोदर रूप में प्रकट हुए गणेशजी बस उस राक्षस के पास गए और उसने तुरंत आत्मसमर्पण कर दिया। याद कीजिए, जब आप किसी को कोई सीक्रेट बताते हैं तो लोग कहते हैं कि उसका पेट बड़ा है। दरअसल, यह वाक्य गणेशजी के बड़े पेट से निकला है, जो अच्छे-बुरे अनुभवों को समानता के साथ पचाने की क्षमता का प्रतीक है। गणेशजी की पूजा के जरिए हम इसी आंतरिक संतुलन को पाने की कोशिश करते हैं।
गजानन : यह कहानी ‘लोभासुर’ की है, जिसने तीनों लोकों पर कब्जा कर लिया था। ऋषि रैभ्य की सलाह पर देवताओं ने गजानन का आह्वान किया, जिनकी उपस्थिति मात्र से राक्षस के अंदर अपराधबोध पैदा हुआ और उसने तुरंत समर्पण कर दिया। यह कहानी बताती है कि आत्मबोध कैसे वासना पर विजय हासिल करता है। गजानन का हाथी जैसा सिर धैर्य, सतर्कता और शक्ति का प्रतीक है, जो इस यात्रा के लिए जरूरी होते हैं।
लंबोदर : माना जाता है कि इस अवतार में भगवान गणेश ने क्रोधासुर का वध किया था। अमृत के लिए समुद्र मंथन के बाद क्रोधासुर का जन्म हुआ, जिसने ब्रह्मांड की शांति भंग कर दी थी। गणेशजी के लंबोदर अवतार ने यह शांति फिर बहाल की।
विकट : एक कहानी राक्षस कामासुर की है, जिसने पूरे ब्रह्मांड में तबाही मचा दी थी। गणेशजी ने विकट रूप में अवतार लिया और मोर पर सवार होकर राक्षस को काबू किया। मोर को इतराना पसंद है और वह घमंड का पर्याय है। इस कहानी की सीख है कि घमंड पर काबू पाकर कोई व्यक्ति इच्छाओं पर नियंत्रण कर सकता है।
विघ्नराज : यह कहानी ममासुर की है, जो तब तक धार्मिक व्यक्ति था, जब तक शम्बरासुर ने उसे बुराइयों और अति की दुनिया में न खींच लिया। देवता उससे भयभीत हुए और विघ्नराज ने ममासुर को काबू में किया। यहां एक गहरा सबक है कि हम विकृत आकर्षण के जाल में आसानी से फंस सकते हैं और यह हमारे जीवन की बड़ी बाधा बन सकता है। विघ्नराज की पूजा उस बाधा को हटाने में मदद करती है।
धूम्रवर्ण : अभिमानासुर या अहंकारासुर को गणेशजी ने धूम्रवर्ण अवतार में पराजित किया। अहंकारासुर के जन्म की एक लंबी कहानी है। माना जाता है कि एक वक्त भगवान सूर्य को अत्यधिक घमंड हुआ तो उनकी छींक से अहंकारासुर का जन्म हुआ। इस असुर ने खूब तबाही मचाई और फिर धूम्रवर्ण ने उसे पराजित किया। धूम्रवर्ण का अर्थ है धुएं जैसा रंग। यह अवतार सिखाता है कि घमंड अकसर स्पष्ट दृष्टि को धुंधला कर देता है, इसलिए इसे साफ करना जरूरी है।
फंडा यह है कि गणेशजी के इन अवतारों की खूबसूरती यह है कि उनमें से प्रत्येक हमें अपने भीतर की किसी कमजोरी पर जीत हासिल करना सिखाता है। अहंकार, लालच, क्रोध, ईर्ष्या, कामना और लगाव अलग-अलग बुराई हो सकती हैं, लेकिन सेल्फ-अवेयरनेस, संतुलन और बुद्धिमता हमें इन पर काबू पाने में मदद करते हैं।








