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हमारे देश की समस्याओं की सूची में आबादी एक बहुत बड़ा मसला है। जनसंख्या के मामले में हम दुनिया में नंबर एक हो गए। इस समस्या को लेकर जानकार लोगों के मत अलग-अलग हैं। एक वर्ग का मानना है, धर्म की दृष्टि से जनसंख्या वृद्धि को देखें तो असंतुलन है, आगे खतरा बढ़ सकता है। आर्थिक विकास की दृष्टि से देखें तो कुछ लोगों का मानना है, खतरे की कोई बात नहीं है। लेकिन सामान्य आबादी क्या चाहती है? अब इसका भी अध्ययन होना चाहिए। हमारे देश की ह्यूमन कैपिटल का सदुपयोग किया जाए। पहली बात, भोजन सबको मिले और दूसरी बात, योग्यता का पर्याप्त उपयोग हो। अपनी आबादी के लिए रक्षा और विकास का अद्भुत प्रयोग श्रीकृष्ण ने किया था। उन्होंने द्वारिका बसाई। द्वारिका की व्यवस्था उन्होंने ऐसी की थी कि सब सुरक्षित रहें और सबका विकास हो। क्योंकि कृष्ण का मानना था यदि मैं आगे बढ़ूं तो मेरे साथ जो लोग हैं, वे भी आगे बढ़ें। केवल राजा की ख्याति न बढ़े, प्रजा की भी जय-जयकार हो। तो समय आ गया है कि हमारे देश की आबादी के साथ द्वारिका जैसे प्रयोग किए जाने चाहिए।
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