हमारे देश की समस्याओं की सूची में आबादी एक बहुत बड़ा मसला है। जनसंख्या के मामले में हम दुनिया में नंबर एक हो गए। इस समस्या को लेकर जानकार लोगों के मत अलग-अलग हैं। एक वर्ग का मानना है, धर्म की दृष्टि से जनसंख्या वृद्धि को देखें तो असंतुलन है, आगे खतरा बढ़ सकता है। […]
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एन. रघुरामन का कॉलम: कमाई के आधुनिक तरीके पुराने और छोटे कारोबार में जान नहीं फूंक सकते
हाल ही पुणे यात्रा के दौरान मैंने खुद को ऐसे शहर में पाया, जिसकी शहरी संरचना बिल्कुल बदल चुकी थी। मैं कई किलोमीटर फैल चुके विशाल मेट्रो पिलर्स के नीचे से गुजरा तो उनकी परछाइयां नीचे रेंग रही कारों पर पड़ रही थीं। दमघोंटू ट्रैफिक के बीच मैंने अपने दोस्त से पूछा, ‘यहां पहले जो […]
ज्यां द्रेज का कॉलम: लोगों का जीवन सुधारने के लिए अमीर बनने का इंतजार जरूरी नहीं
Hindi News Opinion Jean Dreze Column: Rich Wait Not Needed For Poor Countries To Improve Lives 13 घंटे पहले कॉपी लिंक ज्यां द्रेज प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री व समाजशास्त्री कई वर्षों बाद पिछले महीने केरल जाना मेरे लिए सुखद अनुभव रहा। 1980 के दशक में जब मैं पीएचडी कर रहा था तो केरल अपने बेहतरीन सामाजिक संकेतकों […]
मुकेश माथुर का कॉलम: विकसित भारत के केंद्र में इकोनॉमी तो है, पर इंसान?
शून्य से शिखर तक पहुंचने वाला एक व्यक्ति अपना ‘विकास’ किसे मानेगा? पैसे, पद, प्रतिष्ठा को या अच्छी गुणवत्ता वाले जीवन-स्तर, बौद्धिक विकास, मन की शांति और खुशी को? इससे भी आगे, अपने दायरे में आने वाले लोगों की जिंदगियां बेहतर करने को? शायद इस सभी को, लेकिन सिर्फ बड़ा बंगला, बड़ी गाड़ी विकास नहीं […]
मोहम्मद जमशेद का कॉलम: विकास पटरी पर रहे, इसका दारोमदार रेल के पहियों पर
रेल बजट को केंद्रीय बजट के साथ मिलाकर पेश करने का यह दसवां वर्ष होगा। इस कालखंड में देश में हुए विकास ने न सिर्फ जीडीपी में बढ़ोतरी की, बल्कि तमाम आर्थिक गतिविधियों में इसका असर दिखा। उद्योग, व्यापार और कृषि की जरूरतों को पूरी करने के लिए रेलवे को भी तेज गति से बढ़ना […]









