पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है

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मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। उनका जीवन देह से आरम्भ होता है, देह पर समाप्त हो जाता है। लेकिन मनुष्य जो है, आत्मा को छू सकता है और आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है। मानवता का सीधा अर्थ है- अन्य मनुष्यों की पीड़ा को समझें, उनके जीवन में जो श्रेष्ठ दिया जा सकता है, उसका साधन बनें। पिछले दिनों देश में जो चुनाव हुए, उसमें हर राजनेता ये दावा करता रहा कि हम मानवता के लिए सेवा कर रहे हैं, राजनीति का उद्देश्य ये है, सत्ता में जाने का कारण वो है, लेकिन कुछ राजनेता इस बात को अच्छे-से समझ पाए। सामान्यजन से जुड़ने के लिए श्रीराम ने भी शबरी के बेर का प्रयोग किया था। क्योंकि इसके भीतर एक संदेश था- जन, मन और गण के भीतर जो मानवता बसती है, उसका सम्मान किया जाए।



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