रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से:  रवि दीवान: फिल्मी पर्दे का अनदेखा हीरो!
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रसरंग में मेरे हिस्से के किस्से: रवि दीवान: फिल्मी पर्दे का अनदेखा हीरो!

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रूमी जाफरी5 घंटे पहले

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बड़े दिनों बाद मेरी अपने पुराने दोस्त और मशहूर एक्शन डायरेक्टर रवि दीवान से बात हो रही थी। फोन रखकर मैं सोचने लगा कि मैं इतने दिनों से कॉलम लिख रहा हूं, लेकिन मैंने एक भी कॉलम एक्शन डायरेक्टर पर नहीं लिखा, जो किसी भी फिल्म में सबसे अहम टेक्नीशियन में से एक होता है। तो इसीलिए मैंने सोचा कि अपनी गलती को सुधारूं और इसकी शुरुआत अपने दोस्त तथा इंडस्ट्री के मशहूर एक्शन डायरेक्टर रवि दीवान के कॉलम से करूं। तो मेरे हिस्से के किस्से में आज बात रवि दीवान की। रवि दीवान बोलते ही उनके कुछ आइकॉनिक एक्शन सीक्वेंस याद आते हैं। वो चाहे ‘राम लखन’ की कीचड़ फाइट हो या ‘जलवा’ का एक्शन हो या ‘परिंदा’ में नाना पाटेकर को जिंदा जलाने का दृश्य हो या सनी देओल का ‘गदर’ में हैंडपंप उखाड़ना अथवा ऋतिक रोशन का ‘जोधा अकबर’ में हाथी से फाइट, ये सब रवि दीवान का किया हुआ है। रवि ने अपना कॅरियर बतौर फाइटर शुरू किया था। चूंकि उनकी हाइट और पर्सनैलिटी भी अच्छी थी। तो कुछ एक्टर्स के वो डबल भी अच्छे से कर पाते थे। ‘मशाल’ फिल्म में उन्होंने अनिल कपूर, दिलीप कुमार सबका डुप्लीकेट किया। ‘दुनिया’ फिल्म में वो दिलीप कुमार का डबल कर रहे थे और उसमें दिलीप कुमार को सिर्फ एक्शन ही नहीं करना था, इधर-उधर मुड़ना भी था। दिलीप कुमार ने कहा कि ये शॉट मैं दूंगा तो डायरेक्टर ने कहा कि ये बहुत ही लॉन्ग शॉट है। आपका फेस दिखेगा नहीं तो ये रवि को देने दो। इस पर दिलीप कुमार ने कहा कि एक्टर की बॉडी लैंग्वेज और डुप्लीकेट की बॉडी लैंग्वेज में फर्क होता है। तो डायरेक्टर ने कहा कि एक बार रवि को करने तो दो। अच्छा नहीं लगेगा तो आप दुबारा कर लेना। रवि ने दिलीप साहब की बॉडी लैंग्वेज को बखूबी आब्जर्व कर लिया। दिलीप कुमार ने जब रशेज देखे तो बोले कि लग ही नहीं रहा कि ये मैं नहीं हूं और उसके बाद से दिलीप साहब अपना डुप्लीकेट सिर्फ रवि दीवान से ही करवाते थे। फिल्म कोई भी हो, फाइट मास्टर कोई भी हो लेकिन रवि दीवान ही दिलीप साहब के डुप्लीकेट होते।

यह भी सच है कि इंडस्ट्री में रवि जैसे दोस्त बहुत कम हैं, जो काम में तो अच्छे हैं ही, मगर इंसान और भी अच्छे हैं। रवि का लोखंडवाला में टेरेस के साथ एक बहुत अच्छा पेंटहाउस है और फिल्म इंडस्ट्री का शायद ही कोई ऐसा स्टार होगा, जो उस टेरेस पर न बैठा हो। रवि और उनकी पत्नी माया बहुत ही अच्छे मेजबान हैं। 20-25 साल पहले तक बंबई में होटलों के ऑप्शन बहुत कम थे। बहुत रात होने पर कहीं पर खाना नहीं मिलता था। मिलता था तो गलियों में पाव भाजी, कीमा पाव या फिर फाइव स्टार होटलों के कॉफी शॉप में मिल पाता था, अन्यथा सब बंद हो जाता था। मगर एक और जगह थी, जिसके दरवाजे दोस्तों के लिए चौबीसों घंटे खुले रहते थे। वो था रवि का घर। आप आधी रात को रवि के घर चले जाओ तो माया आपको ताजा और गरम खाना बनाकर खिलातीं। रवि खुद तो वेजिटेरियन हैं, मगर दोस्तों के लिए वो हर चीज फ्रिज में रखते हैं। सी-फूड लाने के लिए वो कोलाबा जाते थे, जहां मछुआरे मछली पकड़कर लाते हैं। रवि अपने दोस्तों के लिए वहीं से बड़े साइज के झींगे, लॉबस्टर, क्रैब्स, मछली खरीदकर लाते और अपने फ्रिज में रखते। मैंने अपनी जिंदगी में सलीम साहब, सलमान खान और बोनी कपूर साहब के अलावा कोई अच्छा होस्ट और दोस्त देखा है तो वो हैं रवि दीवान। और खाना तो छोड़ो, रवि ने कभी भी प्रोड्यूसर को पैसे के लिए परेशान नहीं किया। इतना ही नहीं, कई बार रवि ने पैसे न होने पर प्रोड्यूसर को शूटिंग का पेमेंट करने के लिए भी अपने पास से पैसे दिए हैं। तो रवि दीवान के बड़े दिल और उसकी दोस्ती पर अफसर जमशेद का एक शेर मुझे याद आ रहा है: इल्म के तराजू में दोस्ती का एक लम्हा मैंने तौलकर देखा, उम्र भर के लम्हों से दोस्ती का वो लम्हा बेहिसाब भारी था। जिंदगी में अच्छे दोस्त और अच्छा इंसान होना कितना काम आता है, इसकी मिसाल भी रवि ने ही दी है। जब रवि दीवान फाइट मास्टर नहीं बने थे, तब किसी और फिल्म में वो एक फाइट मास्टर के लिए काम कर रहे थे। उस फिल्म का नाम था ‘किसान’। बहुत छोटे बजट की छोटी फिल्म थी, मगर मजहर खान उस फिल्म में रवि के दोस्त बन गए थे और उनके काम से बहुत प्रभावित हो गए थे। मजहर खान के दोस्त थे पंकज पराशर। तो मजहर खान की रिक्वेस्ट पर गुल आनंद और पंकज पराशर ने ‘जलवा’ में रवि दीवान को लिया। इसी फिल्म से रवि पूरी फिल्म इंडस्ट्री में स्टार बन गए।

वो घर ढूंढ रहे थे, लेकिन उनका बजट कम था। उस वक्त पत्थर के फूल बन रही थी। उसके प्रोड्यूसर विवेक वासवानी थे। विवेक ने कहा कि लोखंडवाला में मेरा एक पेंटहाउस है, जाकर देख लो। मुझे थोड़े पैसे अभी दे दो, बाकी बाद में देते रहना। विवेक ने पेमेंट फैसिलिटी दे दी। वो भी इतना अच्छा दोस्त था और पेंटहाउस रवि दीवान का हो गया। इसीलिए लोग कहते हैं कि जिंदगी में अच्छे दोस्त होना बहुत जरूरी है। आज रवि को याद करते हुए उनकी फिल्म ‘राम लखन’ का ये गाना सुनिए, अपना खयाल रखिए, खुश रहिए: माय नेम इज लखन…



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