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एन. रघुरामन का कॉलम: क्या आपने अपने बच्चों को जिंदगी का सबसे अहम सबक सिखाया है?

Hindi News Opinion N Raghuraman Column | Teaching Children Important Life Lessons In Mumbai 12 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु क्या आपने कभी अपने बच्चों से कहा है कि वे ट्रैफिक सिग्नल पर गुलाब, फ्लॉवर बुके या छोटी-मोटी चीजें बेचने वाले बच्चों को गौर से देखें? अगली बार जब आप डिनर के […]

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एन. रघुरामन का कॉलम: अगर आपके ‘थर्ड स्पेस’ में अकेलापन है तो यह खतरनाक है

7 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु दुनियाभर में स्क्रीन-फोकस्ड आबादी को यह एहसास हो गया है कि आधुनिक समाज में सबसे मुश्किल से मिलने वाली चीज ‘दोस्त’ हैं। चूंकि अकेलापन अब कई लोगों के लिए शर्म से भरा एक सीक्रेट बन गया है, इसलिए अब वे हजारों अनजान लोगों के सामने अपना […]

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रीटा कोठारी का कॉलम: हमारे यहां ‘याद’ पर कितने गीत और कितने स्मारक हैं

सुबह से मन में हलचल हो रही है। उठते ही जब बालकनी का दरवाजा खोला, ताकि पौधों के सान्निध्य में अखबार पढ़ा जाए तो एक फड़फड़ाते कबूतर को देखकर तुरंत दरवाजा बंद कर दिया। मेरी बालकनी में जाली लगी हुई है, ताकि कबूतर न आएं, पर एक कोने से जाली फट गयी थी। बहरहाल, मैं […]

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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: जीवन में हर कर्म को योग और यज्ञ की तरह लेना आवश्यक

आजकल प्रबंधन की भाषा में कहा जाता है कि जो भी काम करो, उसमें युद्ध की तरह कूद जाओ। जीतना ही है, ऐसा माद्दा रखो। महाभारत में भीष्म ने दुर्योधन से कहा था कि तुम रोज इसलिए हार जाते हो क्योंकि तुम युद्ध कर रहे हो और पांडव यज्ञ कर रहे हैं। अगर हम ऋषि-मुनियों […]

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प्रो. मनोज कुमार झा का कॉलम: भारत के विचार को हमारे राष्ट्र-नायकों ने मिलजुलकर गढ़ा था

तीन दशक से भी अधिक समय से मैं कभी-कभी एक अजीब प्रश्न की ओर लौटता रहा हूं। अगर मेरा जन्म 1920 के दशक के भारत में हुआ होता, तो क्या होता? अगर मेरी किशोरावस्था स्वतंत्रता संघर्ष के अंतिम, उथल-पुथल भरे दशकों के बीच बीती होती, तो मैंने क्या देखा होता, क्या सुना होता और क्या […]

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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: निंदा को सही रूप में लेकर स्वयं में जरूरी सुधार कर लें

Hindi News Opinion Column By Pt. Vijayashankar Mehta – Take Criticism In The Right Spirit And Make Necessary Improvements In Yourself. 10 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता आजकल बुद्धिमानी का एक मापदंड यह भी है कि कब, किससे, कितना फायदा उठा लिया जाए। बाजार की ऊंच-नीच का फायदा उठाया जाता है। कुछ समझदार […]

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एन. रघुरामन का कॉलम: त्योहारों के दौरान स्कूल और पैरेंट्स बच्चों का रीजनल नॉलेज बढ़ा सकते हैं

Hindi News Opinion N. Raghuraman Column: Schools & Parents Boost Kids Regional Knowledge 8 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु मुझे आज भी वह दृश्य अच्छे-से याद है। वह आंटी प्रार्थना कर रही थीं और जोर से बोलीं, ‘मां दुर्गा, कृपया मेरे परिवार की रक्षा करना।’ मैंने तुरंत उनका पल्लू खींचा और कहा […]

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एन. रघुरामन का कॉलम: विदेशों में आजकल फुटपाथ की भी ‘आंखें’ होती हैं

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – Abroad, Even Sidewalks Now Have ‘eyes’ 1 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु शिकागो के एक छोटे-से बोडेगा (किराना दुकान) की हरी रोशनी गीले डामर पर फैल रही थी। मार्कस (काल्पनिक नाम) ने अपनी घड़ी देखी। वह पूरे चालीस मिनट से उस सड़क पर बेचैनी के […]

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श्रीप्रकाश श्रीधरन का कॉलम: अनुशासन ‘नाजुक’ होता है, उसका ख्याल रखना जरूरी

हाल ही में बद्रीनाथ की यात्रा के दौरान मैंने एक ऐसी घटना देखी, जिसका मुझ पर गहरा प्रभाव पड़ा। ज्योतिर्मठ के पास सड़क का एक संकरा हिस्सा है, जहां पहाड़ी इलाके में जाम से बचने के लिए वाहनों की आवाजाही को सावधानीपूर्वक नियंत्रित किया जाता है। यातायात को व्यवस्थित ढंग से चलने दिया जाता है […]

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एन. रघुरामन का कॉलम: शांतिपूर्ण ट्रेन यात्रा हमारा सामूहिक अधिकार है

Hindi News Opinion N Raghuraman Column | Peaceful Train Journey Is Our Collective Right 7 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु दशकों तक ट्रेन का सफर यादों में ले जाने वाली एक धीमी और जादुई यात्रा हुआ करता था। हममें से ज्यादातर लोगों के मन में इसकी एक अनमोल तस्वीर बसी हुई है- […]

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एन. रघुरामन का कॉलम: स्टोरीटेलिंग में टेक्नीक नहीं, इंसानी जुड़ाव ज्यादा मायने रखता है

Hindi News Opinion N. Raghuraman Column | Storytelling & Human Connection Over Technique 10 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु नेटफ्लिक्स ने जब से स्टोरीटेलिंग को कई एपिसोड और सीजन में बांटना शुरू किया, उससे कई वर्षों पहले मेरे नानाजी एक स्टोरीटेलर थे। हर रात वे हमें एक कहानी सुनाते थे और रामायण […]

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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: निश्चित आयु में विवाह और निश्चित अवधि में संतान हों

Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column | Marriage Age & Child Birth Advice 2 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता आबादी को लेकर इस समय हमारे देश में कुछ समाज चिंतित हैं तो कुछ अलग ढंग से प्रयासरत हैं। माहेश्वरी समाज के कुछ जिम्मेदार लोगों ने पिछले दिनों मेरे सामने यह चिंता व्यक्त […]

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रीटा कोठारी का कॉलम: प्रेम और सुलह के बाद की कथाओं में हमारा सच छिपा है

Hindi News Opinion Rita Kothari Column | Love, Reconciliation & Hidden Truths In Stories 3 घंटे पहले कॉपी लिंक रीटा कोठारी अशोका यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी की प्रोफेसर और भाषाविद् मेरी मातृभाषा सिंधी में एक मुहावरा है- ‘भूंड जी खबर भाये खे, भाये जी खबर भूंड खे।’ इसका मतलब है- चूल्हा जाने आग को और आग […]

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रश्मि बंसल का कॉलम: है कुछ ऊर्जा, है कुछ बात… नमस्ते इंडिया, सुप्रभात!

7 घंटे पहले कॉपी लिंक रश्मि बंसल, लेखिका और स्पीकर पश्चिम बंगाल का जयगांव देश का एक आम शहर है। बाजार में लाउडस्पीकर बज रहा है, पंडाल सज रहे हैं। लोग बातें कर रहे हैं, रेहड़ी पर खा रहे हैं। और इस हुड़दंग के बीच एक छोटा-सा द्वार है। पासपोर्ट पेश कीजिए और खुल जा […]

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रीटा कोठारी का कॉलम: प्रेम और सुलह के बाद की कथाओं में हमारा सच छिपा है

Hindi News Opinion Rita Kothari Column | Love, Reconciliation & Hidden Truths In Stories 1 घंटे पहले कॉपी लिंक रीटा कोठारी अशोका यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी की प्रोफेसर और भाषाविद् मेरी मातृभाषा सिंधी में एक मुहावरा है- ‘भूंड जी खबर भाये खे, भाये जी खबर भूंड खे।’ इसका मतलब है- चूल्हा जाने आग को और आग […]

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पवन के. वर्मा का कॉलम: अपने किए की जिम्मेदारी स्वीकारना भी धर्म का रूप है

Hindi News Opinion Pawan K Verma Column | Understanding Dharma, Ethics & Moral Responsibility 5 घंटे पहले कॉपी लिंक पवन के. वर्मा पूर्व राज्यसभा सांसद व राजनयिक धर्म क्या है? ‘धर्म’ शब्द की व्युत्पत्ति ‘धृ’ धातु से हुई है, जिसका अर्थ है- धारण करना और संभालकर रखना। आम तौर पर धर्म का अनुवाद कर्तव्य, सदाचार, […]

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एन. रघुरामन का कॉलम: व्यवहार में बदलाव लाने के लिए हमें लोगों को डराना चाहिए या पुरस्कृत करना चाहिए?

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – Should We Scare People Or Reward Them To Bring About A Change In Behavior? 50 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु इस हफ्ते की शुरुआत में पोस्ट किया गया साढ़े दस मिनट का वह वीडियो मेरे लिए बहुत असामान्य था। वजह थी कि इसे पोस्ट करने […]

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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: धर्म-अध्यात्म भी बचा रहे और तकनीक का उपयोग भी करें

Hindi News Opinion Column By Pt. Vijay Shankar Mehta – Preserve Spirituality While Embracing Technology 7 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता मेरी विदेश यात्राओं के दौरान मुझसे सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न यह रहा कि एआई को आप आध्यात्मिक दृष्टि से कैसे देखते हैं? एआई के उपयोग में हमें विवेक का प्रयोग […]

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एन. रघुरामन का कॉलम: बच्चों को देखने से पहले पढ़ना क्यों सिखाएं?

Hindi News Opinion N. Raghuraman’s Column – Why Teach Children To Read Before Showing Them Things? 11 मिनट पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन मैनेजमेंट गुरु आमतौर पर जब परिवार की युवा पीढ़ी के लोग ओटीटी चैनलों की किसी फिल्म के बारे में मेरी राय पूछते हैं तो मैं उन्हें सलाह देता हूं कि पहले किताब […]

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एन. रघुरामन का कॉलम: कभी पिता जो काम सहज रूप से करते थे, स्कूल आज साइंटिफिकली कर रहे हैं

बचपन में आपकी जिंदगी का पहला सबसे बेहतरीन माइलस्टोन क्या था? हममें से ज्यादातर लोगों के लिए यह ट्राई-साइकिल चलाना और पैरेंट्स से ‘वेरी गुड’ सुनना रहा होगा। लेकिन जीवन के या किसी प्रोजेक्ट के अहम टर्निंग पॉइंट, अचीवमेंट या पड़ाव की सबसे अच्छी, क्लासिक और निर्णायक मिसाल वह होती थी, जब आप साइकिल चला […]

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एन. रघुरामन का कॉलम: जब हम किसी और की जिंदगी बेहतर बनाते हैं तो हमारा दिल ‘सुपर हैप्पी’ हो जाता है

Hindi News Opinion N Raghuraman Column: Saving Baby Elephant In Teesta River | Inspiring Story 12 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु जरा सोचिए, अगर कोई हाथी अपनी सूंड से आपकी गर्दन को कसकर लपेट ले तो आपके चेहरे के हावभाव कैसे होंगे? भले ही हाथी कितना भी छोटा क्यों न हो। जब […]

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रीटा कोठारी का कॉलम: दु:ख को लेकर हमारी समझ भी समय के साथ बदलती गई है

कभी-कभी कोई फिल्म, फिल्म न रहकर एक देश बन जाती है, जहां हम चले जाते हैं अनजाने में, सुनते हुए, गुनगुनाते हुए। एक ऐसी ही यात्रा हो गई, जब यह गाना जेहन में बस सा गया- ‘न मिलता गम तो बर्बादी के अफसाने कहां जाते, अगर दुनिया चमन होती तो वीराने कहां जाते।’ अगर दु:ख […]

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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हमारे युवा अंगद व अभिमन्यु की तरह निर्भय हों और संस्कारी रहें

अनादिकाल से संसार युवाओं में भविष्य देखता रहा है। संसारभर के युवा एक जैसे ही हैं। लेकिन भारत की युवा-अवस्था कुछ विशेष हो जाती है। क्योंकि, यहां संस्कार की सम्भावना अभी बनी हुई है। शिक्षा तो सारे संसार में पसर रही है। लेकिन शिक्षा के साथ संस्कार का आग्रह भारत के रज-रज और कण-कण में […]

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नवनीत गुर्जर का कॉलम: देश की राजनीति में इन दिनों एक तरह की नई इबारत लिखी जा रही है…

Hindi News Opinion Navneet Gurjar Column | Changing Political Landscape & Climate Crisis 8 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर मौसम, गीत और लोकगीत अब लगभग एक जैसे हो चले हैं। मौसम जाने किस प्रदेश के, किस शहर की, किस गली में सूखा रहेगा, और किस गली को भिगोएगा, पता ही नहीं चलता। जिन प्रदेशों […]

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एन. रघुरामन का कॉलम: क्या हमारी यात्राएं अकेलेपन से जूझ रही हैं

याद हैं वो दिन, जब पूरा परिवार साथ में यात्राएं करता था? तब यात्राएं कभी भी सिर्फ किसी मंजिल तक पहुंचने का नाम नहीं हुआ करती थीं। वे अपने आप में एक इवेंट थीं, उनमें एक रोमांच था और अकसर चलती-फिरती पिकनिक भी। बचपन में हम ट्रेन की खिड़की से चिपके रहते थे और अगले […]