Hindi News Opinion Navneet Gurjar Column | Memes & Cartoons Impact On Protests & NEET Leak 6 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर सबसे बड़ी दौलत क्या है? शिक्षा। ज्ञान। जीवन की इस सबसे महत्वपूर्ण निधि पर ही डाका पड़ने लगे तो परिणाम क्या होंगे? सही है, शिक्षा और ज्ञान का किसी डिग्री या किसी […]
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रश्मि बंसल का कॉलम: आओ एक नया इंडिया बनाएं, जहां पैसा नहीं, पसीना रंग लाए
मेरे पिताजी एक बहुत ही साधारण परिवार में पैदा हुए। बचपन में पेड़ के नीचे पंड्या जी के पास पढ़ते थे। पांचवीं कक्षा में सरकारी स्कूल में दाखिला हुआ। पढ़ाई में तेज निकले तो फिर गवर्नमेंट कॉलेज, रतलाम से बीएससी पूरी की। एमएससी की पढ़ाई के लिए वे इंदौर गए, एक छोटी-सी स्कॉलरशिप के सहारे। […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अहंकार की विदाई में ही संसार के सारे सुख समाए हैं
जिन विवेकानंद जी और स्वामी रामतीर्थ को सारी दुनिया में प्रशंसा मिली, उनको अपने ही देश में तवज्जो नहीं दी गई थी। और ये दोनों कहा करते थे कि प्रशंसा का प्रमाण-पत्र लेना भी हो तो परमात्मा से लो, दुनिया क्या देगी। लेकिन मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी होती है अहंकार, और प्रशंसा अहंकार का […]
राजदीप सरदेसाई का कॉलम: साजिश के सिद्धांतों को कभी सच्चाई पर हावी ना होने दें
Hindi News Opinion Rajdeep Sardesai Column | Conspiracy Theories Vs Truth In Delhi Politics 6 घंटे पहले कॉपी लिंक राजदीप सरदेसाई वरिष्ठ पत्रकार दिल्ली के सत्ता गलियारों में साजिश के सिद्धांत (कॉन्स्पिरेसी थ्योरीज़) हमेशा फलते-फूलते रहे हैं। लेकिन आज के अत्यधिक ध्रुवीकृत भारत में वे केवल गपशप भर नहीं रह गए हैं। अब वे राजनीतिक […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: माताएं-बहनें जहां काम करती हैं, आंगन-सा माहौल बन जाता है
Hindi News Opinion Pt Vijay Shankar Mehta Column | Women Workforce Participation In India 2 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता भारत में आंगन पारिवारिक सामूहिकता का प्रतीक है। साहित्यकारों ने तो आंगन को नारियों की दुनिया कहा है। तुलसी तो आंगन की महारानी है ही। कुछ ऋषियों ने मन को भी आंगन का […]
एन. रघुरामन का कॉलम: क्यों बच्चे ‘थैंक यू’ और ‘प्लीज’ कहने से इनकार कर रहे हैं?
ज्यादातर पैरेंट्स, चाहे उच्च शिक्षित हों या नहीं, अकसर बच्चों को समझाते हैं कि ‘अच्छे संस्कारों में कुछ खर्च नहीं होता।’ लेकिन हाल ही में जेन-जी ने मुझे सिखाया कि ‘ये विनम्र शब्द इस्तेमाल करने की कीमत शायद धरती को चुकानी पड़ती है।’ सोच रहे हैं इसका क्या मतलब है? तो आगे पढ़िए। यह सबक […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हमारे परिवार सशक्त ही नहीं, एकजुट और संवेदनशील भी हों
Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta Column | Empowering & United Family Values 1 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता भारत की एक ताकत है- परिवार-व्यवस्था। हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारे परिवार केवल सशक्त ही न हों, एकजुट और संवेदनशील भी हों। आजकल माना जाता है कि रोटी, कपड़ा और मकान उच्च […]
पवन के. वर्मा का कॉलम: कला की आजादी जरूरी है पर देश की सम्प्रभुता से बढ़कर नहीं
Hindi News Opinion Pawan K Verma Column | Artistic Freedom Vs National Sovereignty Debate 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पवन के. वर्मा पूर्व राज्यसभा सांसद व राजनयिक आजादी के बाद से भारत के विरुद्ध कोई अलगाववादी आंदोलन सफल नहीं हुआ है। इसका श्रेय लोकतंत्र द्वारा उपलब्ध कराए गए उपकरणों के साथ ही जरूरी परिस्थितियों में […]
एन. रघुरामन का कॉलम: इंजरी-फ्री लाइफ, ‘गो-गो’ नहीं ‘स्लो-गो’ या ‘नो-गो’ तरीके से आती है
इस सोमवार को सुबह 7:30 बजे मेरे एक स्कूलमेट का फोन आया। चूंकि मैं अपना कॉलम लिखने में व्यस्त था तो मैंने फोन स्पीकर पर रखकर कहा, ‘बोल।’ तभी घबराई हुई महिला की आवाज सुनकर मैंने फोन कान से लगा लिया। उनकी पत्नी बोलीं, ‘भाई साहब, क्या आप जल्दी से घर आ सकते हैं? इन्हें […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: ईर्ष्या और तुलना भी हमारे लिए लाभकारी हो सकती हैं
Hindi News Opinion Pt. Vijay Shankar Mehta Column | How Jealousy And Comparison Affect Life 17 मिनट पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता हर मनुष्य भीतर से कहीं ना कहीं ईर्ष्यालु होता है। ईर्ष्या की शुरुआत होती है तुलना से। तुलना शब्द तौल से बना है। जब हम तराजू के एक पलड़े में खुद को […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: ईर्ष्या और तुलना भी हमारे लिए लाभकारी हो सकती हैं
Hindi News Opinion Pt. Vijay Shankar Mehta Column | How Jealousy And Comparison Affect Life 2 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता हर मनुष्य भीतर से कहीं ना कहीं ईर्ष्यालु होता है। ईर्ष्या की शुरुआत होती है तुलना से। तुलना शब्द तौल से बना है। जब हम तराजू के एक पलड़े में खुद को […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: नई पीढ़ी को लेकर माफ करने की आदत बनाइए
Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Cultivate Forgiveness For New Generation 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता कारोबार की दुनिया में जो थोड़े अनुभवी हैं, उम्रदराज हैं, वो शिकायत करते हैं कि नई पीढ़ी के काम करने का ढंग परेशान कर रहा है। नौकरियां तो लोग ऐसे बदलते हैं, जैसे मूंगफली […]
सैयद अता हसनैन का कॉलम: युद्ध में जमीनों पर कब्जे का अब पहले जैसा महत्व नहीं रहा है
Hindi News Opinion Syed Ata Hasnain Column: War Strategy Changes | Land Occupation Less Important 10 घंटे पहले कॉपी लिंक सैयद अता हसनैन बिहार के राज्यपाल और कश्मीर कोर के पूर्व कमांडर युद्धों की प्रकृति बदल रही है। भू-भाग पर नियंत्रण आज भी अहम है, लेकिन देश अब लंबे समय तक किसी क्षेत्र पर कब्जा […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम- अशांति मिटाने के लिए एकाग्रता भी एक टूल है
Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta: Focus Is A Tool To Remove Anxiety | Column 2 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता प्रबंधन की दुनिया में इस पर काफी बहस होती है कि फोकस्ड रहना ठीक है या मल्टीटास्किंग बेहतर है। इसे धार्मिक दृष्टि से देखें तो राम बहुत फोकस्ड थे और कृष्ण […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: बुद्धि का सदुपयोग बुद्धिमान होने के लिए महत्वपूर्ण है
केवल बुद्धि से काम नहीं चलता। बुद्धि का सदुपयोग और दुरुपयोग महत्वपूर्ण हो जाता है। बुद्धि के दुरुपयोग का सबसे बड़ा उदाहरण रावण है और बुद्धि के सदुपयोग का उदाहरण काकभुशुंडि हैं। रावण ब्राह्मण था, विश्व विजेता था, राक्षसों का राजा था। लेकिन बुद्धि के मामले में गड़बड़ा गया। काकभुशुंडि पक्षी, और उसमें भी निकृष्ट […]
ज्यां द्रेज का कॉलम: जीने के हमारे पुराने तरीके कहीं गुम होते जा रहे हैं…
पुराने दिनों में रांची एक सुंदर शहर हुआ करता था। तब यह आज के जैसा बड़ा शहर नहीं, बल्कि एक छोटा-सा कस्बा था, जिसके चारों ओर कई आदिवासी बस्तियां थीं। बीच में बहुत सारे तालाब, नदियां और बगीचे थे। फिर धीरे-धीरे इन बस्तियों की जगह बड़े मकान, मॉल और फ्लाईओवर बन गए। अब सिर्फ उनके […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]
सैयद अता हसनैन का कॉलम: प्रहार करने की क्षमता और फिर रुक जाने का विवेक भी
Hindi News Opinion Syed Ata Hasnain’s Column: The Capability To Strike—and The Prudence To Halt 6 घंटे पहले कॉपी लिंक सैयद अता हसनैन, बिहार के राज्यपाल और कश्मीर कोर के पूर्व कमांडर ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष बाद अगर हम उससे मिलने वाली सबसे बड़ी सीख के बारे में सोचें, तो न तो वह हमले […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: दिनभर में कुछ शब्द ऐसे बोलें, जो अत्यंत मोहक हों
Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta’s Column: Speak A Few Words Throughout The Day That Are Truly Enchanting. 8 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता इन दिनों अधूरे, अमर्यादित वाक्यांशों को हथियार बनाकर ऑनलाइन लड़ाइयां लड़ी जा रही हैं। कुछ लोग तो डिजिटल मीडिया पर शब्दों को फांसी के फंदे पर चढ़ाने का ही […]
एन. रघुरामन का कॉलम: ‘कोविड-दयालुता’ की भावना को फिर से जगाने की जरूरत है
1960 के दशक के उत्तरार्ध में एक दिन मैंने नागपुर के सीताबर्डी की मुख्य सड़क पर स्थित ‘विश्रांति गृह’ नामक रेस्तरां के बाहर अपनी साइकिल खड़ी की, ताकि वहां बैठी दंतविहीन वृद्धा से कुछ गजरे खरीद सकूं। जैसे ही वे उन्हें पैक करने लगीं, रेस्तरां के भीतर से एक वेटर बाहर आया और उन्हें पत्ते […]
रश्मि बंसल का कॉलम: फोन हमारा साथी और सहारा है, पर इंसान से नहीं प्यारा है
कुछ दिन पहले एक हादसा हो गया! मेरा सहारा, मेरी आंखों का तारा, मेरा फोन स्वर्ग सिधार गया! कई दिनों से मिन्नत कर रहा था, कि बस करो। इतनी फोटो, इतने ऐप मेरा नन्हा-सा शरीर सह नहीं पा रहा। लोड थोड़ा कम कीजिए। खैर, उस दिन थोड़ा-सा पानी ढुल गया और फोन महाशय उसी चुल्लू […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपनी खूबियों को दूसरों की सेवा में लगाएं लेकिन समय से
Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta Column: Use Skills In Service, But On Time 1 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता अपना बेस्ट भी समय पर डिलीवर करिए, ये प्रबंधन की दुनिया की एक समझाइश है। इसमें दो बातें हैं- बेस्ट और समय। हमारी जो खूबियां हैं, उनको जरूर दूसरों की सेवा में […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: युद्ध अगर हो तो केवल धर्म की रक्षा के लिए होना चाहिए
इस समय युद्ध के जो दृश्य चल रहे हैं, उसे देख कबीर की एक पंक्ति याद आती है- चींटी चावल ले चली बीच में मिल गई दाल, कहत कबीर दो न मिले एक ले दूजी डाल। एक चींटी चावल का दाना लेकर जा रही थी। रास्ते में दाल मिल गई तो सोचा दाल भी ले […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: लोग बदलते नहीं, बस छिपा हुआ स्वभाव प्रकट हो जाता है
Hindi News Opinion Pt. Vijayshankar Mehta Column: People Dont Change, Just Reveal Hidden Nature 28 मिनट पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता प्रेम, पैसा और पद धीरे-धीरे जीवन में आएं तब तो बहुत अधिक तकलीफ नहीं होगी, लेकिन जब ये अचानक आते हैं तब उपद्रव हो जाता है। कहते हैं ये तीनों जीवन में आएं […]



























