टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: मन को खाली किया जाए तभी तो आत्मा उसमें रह पाएगी

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यह बात तो अब सभी लोग मान रहे हैं कि डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग से चिड़चिड़ापन, चक्कर आना, सिरदर्द, मितली- यह सब होता है और मनुष्य का मन इनको बढ़ाता है। मन को समझने-समझाने के लिए अनेक प्रयोग किए जाते हैं। अगर हमें समझ ना आया कि मन क्या है तो शायद हम कभी शांत हो भी नहीं पाएंगे। मन के लिए अनेक महात्माओं ने कई रूपक दिए हैं। किसी ने इसको दर्पण कहा, किसी ने आकाश कहा। एक और रूपक मन को समझाने के लिए बड़ा उपयोगी है। हमारा शरीर दीवार है और दीवार के भीतर होता है घर, और फिर उसके भीतर कोई रहने वाला होता है। अगर शरीर दीवार है तो जो घर है, वह मन है। यदि घर खाली ना हो तो रहने वाला कहां रहेगा? मन अनेक बातों से भरा हुआ है। मन को खाली किया जाए तभी तो रहने वाला, यानी आत्मा उसमें रह पाएगी। और इस मन को खाली करने के लिए प्रतिदिन कम से कम दो बार ध्यान अवश्य करिए। मेडिटेशन मन को खाली करने की प्रक्रिया है।



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