13 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक किताब- डोपामाइन डिटॉक्स (बेस्टसेलिंग बुक ‘डोपामाइन डिटॉक्स’ का हिंदी अनुवाद) लेखक- निक ट्रेंटन अनुवाद- अम्बुज कुमार खरे प्रकाशक- मंजुल मूल्य- 299 रुपए कुछ आदतें ऐसी होती हैं, जो धीरे-धीरे हमारी जिंदगी का हिस्सा बन जाती हैं, जैसे- बार-बार फोन चेक करना। सोशल मीडिया स्क्रॉल करना। हर नोटिफिकेशन पर […]
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सेल्फ हेल्प किताबों से: अपना काम पूरे मन से करें तो खुश रहेंगे
किताबों से जानिए, जीवन ज्यादा अर्थपूर्ण कब लगने लगता है? खुद को साबित करना छोड़ें, आज पर ध्यान दें हम सोचते हैं कि खुश रहने के लिए हमें और तेज दौड़ना है, बेहतर बनना है और दूसरों से आगे निकलना है। इस भागदौड़ में मन कभी शांत नहीं होता। जब हम खुद को साबित करने […]
गौतम बुद्ध की सीख: जब कोई समस्या आती है, तुरंत प्रतिक्रिया न दें; पहले रुकें, सोचें और फिर निर्णय लें
Hindi News Jeevan mantra Dharm Gautam Buddha Teachings Pause Think Decide Wisdom, Lesson Of Gautam Buddha In Hindi, Inspirational Story In Hindi 5 दिन पहले कॉपी लिंक कभी-कभी जीवन में ऐसे मोड़ आते हैं, जहां रास्ता साफ दिखाई देना बंद हो जाता है। जिस काम को हम पहले बहुत आसान समझते थे, वही अचानक उलझा […]
सेल्फ हेल्प किताबों से: अपने मन का काम करना जरूरी है
किताबों से जानिए, कैसे छोटे व जागरूक क्षण धीरे-धीरे हमारे सोचने और जीने के तरीके को बदल देते हैं? जब काम में मन लगता है तो थकान नहीं होती जब मन किसी एक काम में डूब जाता है, तो समय का एहसास गायब हो जाता है। घड़ियां चलती रहती हैं, लेकिन हमें महसूस नहीं होता। […]
एन. रघुरामन का कॉलम: प्रकृति से जुड़ने पर हमारा खुद से संबंध बेहतर होता है
“यह मेरा बेटा है, और मैं इसे आपकी देखरेख में छोड़ रही हूं, इसका ख्याल रखिएगा।’ मेरी मां इसी तरह से मेरा, हमारे बचपन के घर के बाहर खड़े उस बड़े-से गूलर के पेड़ से परिचय कराती थीं। वे मुझे उसकी दो मजबूत शाखाओं से बंधे साड़ी के एक झूले में लिटाया करती थीं। पेड़ […]
लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिकर्स: भविष्य की योजना न बनाएं, वर्तमान में जीएं
प्रसिद्ध दार्शनिक, लेखक और वक्ता थे।उन्होंने पश्चिमी दुनिया को पूर्वी दर्शन (जेन, ताओवाद) से परिचित कराया। प्रसिद्ध दार्शनिक, लेखक और वक्ता थे।उन्होंने पश्चिमी दुनिया को पूर्वी दर्शन (जेन, ताओवाद) से परिचित कराया। Source link
रश्मि बंसल का कॉलम: थोड़ी-बहुत फिक्र भली, पर ज्यादा चिंता किस काम की?
Hindi News Opinion Rashmi Bansal’s Column A Little Worry Is Good, But What Is The Use Of Worrying Too Much? 4 घंटे पहले कॉपी लिंक रश्मि बंसल, लेखिका और स्पीकर रोज ऑफिस से निकलने के पहले आप मम्मी को मैसेज करती हो- निकल गई। एक दिन रिक्शे में बैठने के बाद पता चलता है कि […]
रसरंग में चिंतन: क्या आपने कभी किसी पेड़ को दुलारा है?
आज की सुबह मस्ती का नशा बिखेरती चली गई। खालीपन का एक लक्षण जानने योग्य है। जब उसे अच्छे विचारों की धूप और सुगंध मिलती है, तब वह सार्थक हो उठता है। यही वह क्षण है, जब हम पेड़ों को सुन सकते हैं। जो व्यक्ति यह कहता है कि पेड़ कुछ नहीं बोलते, तो उस […]
टिप्स: मेडिटेशन से नेतृत्व को बेहतर बनाने के तरीके
कई लीडर्स की सफलता और इस कारण उनकी कंपनियों की सफलता के रास्ते में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक उनका अहंकार (इगो) होता है। अच्छी बात यह है कि माइंडफुलनेस (ध्यान) इसमें बहुत हद तक मदद कर सकती है। माइंडफुल मेडिटेशन अहंकार का प्रतिकार है। यह वह अनुभव पैदा करता है जिसे हार्वर्ड के […]
टिप्स: मेडिटेशन से नेतृत्व को बेहतर बनाने के तरीके
कई लीडर्स की सफलता और इस कारण उनकी कंपनियों की सफलता के रास्ते में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक उनका अहंकार (इगो) होता है। अच्छी बात यह है कि माइंडफुलनेस (ध्यान) इसमें बहुत हद तक मदद कर सकती है। माइंडफुल मेडिटेशन अहंकार का प्रतिकार है। यह वह अनुभव पैदा करता है जिसे हार्वर्ड के […]
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: सामूहिक ध्यान बच्चों की याददाश्त बढ़ा सकता है
Hindi News Opinion Pandit Vijayshankar Mehta Column: Collective Meditation Boosts Child Memory 4 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता मौन और ध्यान को अब घरेलू क्रिया बनाना चाहिए। कुछ काम हमारे घरेलू जीवन में नियमित होते हैं- झाडू-पोंछा, रसोई घर की व्यवस्था, बड़े-बूढ़ों और बच्चों की देखभाल। ऐसे ही मौन और ध्यान को अब […]
याददाश्त को दुरुस्त करना चाहते है तो ब्रेन की यह तीन एक्सरसाइज कीजिए, एकाग्रता बढ़ेगी, सब कुछ रहेगा याद
याददाश्त को दुरुस्त करना चाहते है तो ब्रेन की यह तीन एक्सरसाइज कीजिए, एकाग्रता बढ़ेगी, सब कुछ रहेगा याद | Jansatta Source link
Dunia Mere Aage: Are you also lost somewhere? Think less, live more, a simple formula to connect with the present
हम कितनी बार किसी जगह पर होते हुए भी वहां मौजूद नहीं होते हैं? कई बार हम दफ्तर से घर तो आ जाते हैं, लेकिन मानसिक रूप से अनुपस्थित रहते हैं। परिवार में होते हुए भी उनके साथ नहीं होते हैं। ऐसा भी होता कि कोई किताब पढ़ते हैं, शब्द आंखों के सामने से गुजरते […]
















