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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: भौतिक सफलता में अध्यात्म का भी संतुलन बनाना सीखें

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2 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

अब मंदिरों में भी अत्यधिक प्रबंधन की आवश्यकता होगी। राम मंदिर, अयोध्या में सीईओ का चयन किया गया। शास्त्रों में व्यक्त है कि जब भी पूजा करें, किसी मंदिर में जाएं, तो जैसे हो वैसे हो जाओ। अपने स्वभाव से हटकर देव-दर्शन किए, पूजा की तो आप केवल कर्मकांड कर रहे होंगे। अब सवाल उठता है कि स्वभाव में कैसे उतरें? दुनिया के पहले सीईओ थे अग्रवाल समाज के पितृपुरुष महाराजा अग्रसेन। उन्होंने हर काम को कैम्पेन मोड में किया। उन्होंने यह बताया था कि प्रजा है तो राजा है, राजा से प्रजा नहीं है।

आज जो यह प्रबंधन के बड़े-बड़े पद पर लोग बैठे हैं, उन्हें शोहरत मिली, दौलत मिली पर जीवन चला गया। वो यह जान ही नहीं पाए कि उनका मूल स्वभाव क्या था। दक्ष लोग भी दूसरों के हाथ का रिमोट कंट्रोल हो गए। हमारे देश की कुल आबादी के 8.5% लोग 60-प्लस हो गए हैं और वो अभी तक नहीं जान पाए कि अब उन्हें कौन-सा जीवन जीना है। एक सीईओ इस बात का संतुलन बनाता है कि भौतिक सफलता में आध्यात्मिक छींटा कैसे दिया जाए। संभवतः राम मंदिर की व्यवस्था अब इस बात का आदर्श उदाहरण बनेगी।

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