टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: एआई के युग में हर कृत्य मानव-मूल्यों से जुड़ा हो

समाजसेवा की दुनिया में एक शब्द चलता है- जन-जागरण। यह काम सबसे पहले श्रीराम ने किया। उनका उद्देश्य केवल रावण को समाप्त करना नहीं था, वे लोगों को जगाना चाहते थे। और लोगों को जगाने का अर्थ है कि आप जान जाएं जो भी काम आप कर रहे हैं, वह सही है या गलत। निर्भय-निष्काम […]

टिपण्णी

प्रो. मनोज कुमार झा का कॉलम: एल्गोरिदम ही सूझबूझ की जगह ले बैठें तो मनुष्य पीछे छूट जाएगा

Hindi News Opinion Manoj Kumar Jha Column | Democracy Ethics AI Machines Human Values India 2 घंटे पहले कॉपी लिंक प्रो. मनोज कुमार झा राजद से राज्यसभा सांसद कुछ व्यक्तित्व इतिहास के किसी एक अध्याय के पात्र नहीं रहते, बल्कि प्रत्येक पीढ़ी के सामने एक नैतिक प्रश्न बनकर उपस्थित होते हैं। महात्मा गांधी और चंद्रशेखर […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है

मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
टिपण्णी

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है

मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]

Dunia mere aage: Big distances arise from small things, emotions remain stifled inside the mind; why are we unable to take initiative – दुनिया मेरे आगे: छोटी बातों से उपजे बड़े फासले, मन के भीतर घुटती रह जाती हैं भावनाएं; हम क्यों नहीं कर पाते पहल
मनोरंजन

Dunia mere aage: Big distances arise from small things, emotions remain stifled inside the mind; why are we unable to take initiative – दुनिया मेरे आगे: छोटी बातों से उपजे बड़े फासले, मन के भीतर घुटती रह जाती हैं भावनाएं; हम क्यों नहीं कर पाते पहल

Dunia mere aage: Big distances arise from small things, emotions remain stifled inside the mind; why are we unable to take initiative – दुनिया मेरे आगे: छोटी बातों से उपजे बड़े फासले, मन के भीतर घुटती रह जाती हैं भावनाएं; हम क्यों नहीं कर पाते पहल | Jansatta Source link