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लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स: विचार ही नहीं, अनुभव भी जरूरी है – इमैनुएल कांट

6 घंटे पहले कॉपी लिंक इमैनुएल कांट जर्मन दार्शनिक थे। प्रशिया साम्राज्य के कोनिग्सबर्ग में जन्मे। उन्हें प्रबोधन काल के प्रमुख विचारकों में से एक माना जाता है। 1. अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करने का साहस रखें। यही जागरूक होने की पहली सीढ़ी है। 2. समझदार बनने का मतलब है अपनी गलतियों और सीमाओं से […]

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एन. रघुरामन का कॉलम: एआई जॉब्स में बढ़त चाहिए तो एंथ्रोपोलॉजी और फिलॉसफी पढ़ें

Hindi News Opinion AI Jobs Career Tips | Read Anthropology & Philosophy | N Raghuraman Column 2 घंटे पहले कॉपी लिंक एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु हममें से कितने लोग जानते हैं कि अकेली कंप्यूटर साइंस की डिग्री अब जॉब मार्केट का ‘गोल्डन टिकट’ नहीं रही। दुनियाभर के कॉलेजों ने बीते दो दशकों में कंपनियों की […]

चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस की सीख:  सबसे बड़ी उपलब्धि केवल धन, पद या प्रसिद्धि में नहीं है, सच्ची सफलता दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने से मिलती है
जीवन शैली/फैशन लाइफस्टाइल

चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस की सीख: सबसे बड़ी उपलब्धि केवल धन, पद या प्रसिद्धि में नहीं है, सच्ची सफलता दूसरों के जीवन को बेहतर बनाने से मिलती है

चीन के महान दार्शनिक कन्फ्यूशियस अपनी गहरी सोच और सरल जीवन दर्शन की वजह से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध थे। वे कठिन से कठिन बात को भी इतने सहज तरीके से समझाते थे कि सामने वाला तुरंत उसका अर्थ समझ जाता था। उनके ज्ञान और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर एक बार चीन के राजा ने […]

एन. रघुरामन का कॉलम:  ताल पढ़ाई है तो नदी डिग्री, लेकिन ज्ञान तो सागर में ही है
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एन. रघुरामन का कॉलम: ताल पढ़ाई है तो नदी डिग्री, लेकिन ज्ञान तो सागर में ही है

पिछले हफ्ते मेरे एक दोस्त ने वीडियो कॉल किया तो लग रहा था जैसे वह हरी-भरी पहाड़ियों वाली किसी घाटी में खड़ा हो। लेकिन वह एक माेनेस्ट्री की कक्षा में था। छात्र आंखें मूंदे फर्श पर पालथी मारकर बैठे थे। दूर कहीं घंटियां बज रही थीं, कमरे में सन्नाटा था और एक बौद्ध भिक्षु मेडिटेशन […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  यदि हम अहंकारी हैं तो अपना ही नुकसान कर रहे होते हैं
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: यदि हम अहंकारी हैं तो अपना ही नुकसान कर रहे होते हैं

अहंकार को लेकर हमारे शास्त्रों में अलग-अलग ढंग से कई बातें बोली गई हैं। अभिमान भक्ति के मार्ग में बहुत बड़ी बाधा है और संसार में भी घमंड आखिर में तकलीफ ही देता है। अब इस बात को एक नए ढंग से तुलसीदास जी प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने अभिमान को क्लेश और शोक से जोड़ […]

लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स:  हम स्वतंत्र रूप से सोचना शुरू करें – जॉर्ज बर्कली
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लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स: हम स्वतंत्र रूप से सोचना शुरू करें – जॉर्ज बर्कली

11 मिनट पहले कॉपी लिंक जॉर्ज बर्कली एंग्लो-आयरिश दार्शनिक, लेखक और पादरी थे, जिन्हें आदर्शवाद (आइडियलिज्म) का संस्थापक माना जाता है। उन्हें बिशप बर्कली भी कहा जाता है। 1. सत्य की बात तो सभी करते हैं, लेकिन वास्तव में उसे अपनाने वाले बहुत कम होते हैं। 2. बहुत कम लोग स्वयं सोचते हैं, फिर भी […]

लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स:  हम स्वतंत्र रूप से सोचना शुरू करें – जॉर्ज बर्कली
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लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स: हम स्वतंत्र रूप से सोचना शुरू करें – जॉर्ज बर्कली

2 घंटे पहले कॉपी लिंक जॉर्ज बर्कली एंग्लो-आयरिश दार्शनिक, लेखक और पादरी थे, जिन्हें आदर्शवाद (आइडियलिज्म) का संस्थापक माना जाता है। उन्हें बिशप बर्कली भी कहा जाता है। 1. सत्य की बात तो सभी करते हैं, लेकिन वास्तव में उसे अपनाने वाले बहुत कम होते हैं। 2. बहुत कम लोग स्वयं सोचते हैं, फिर भी […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अनुभव शरीर से जुड़ा है तो अनुभूति हृदय और आत्मा से
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अनुभव शरीर से जुड़ा है तो अनुभूति हृदय और आत्मा से

शंकराचार्य जी ने दो बातें हमारे बड़े काम की बोली हैं। पहली बात वे कहते हैं मंदिर वही पहुंचता है, जो धन्यवाद देने जाता है, मांगने नहीं। और दूसरी बात, वास्तविक आनंद उन्हीं को मिलता है, जो आनंद की तलाश नहीं करते। तो पहली बात को यूं समझें कि जब भी हम लोग मंदिर जाएं, […]

रीटा कोठारी का कॉलम:  हमारी घरेलू बातचीत में किस सीमा तक फलसफे समाए हैं?
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रीटा कोठारी का कॉलम: हमारी घरेलू बातचीत में किस सीमा तक फलसफे समाए हैं?

मेरे मायके की शब्दावली सत्संग से आती है। जब किसी की मृत्यु होती है तो हमारे यहां कहा जाता है- ‘उनका शरीर शांत हो गया है।’ जिस सिंधी कौम ने बंटवारे के दुःख देखे हों, तरह-तरह के व्यापारों में हाथ डालकर कभी कामयाबी तो कभी बेहद नुकसान उठाए हों, वह मृत्यु और बीमारियों से जल्दी […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है

मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है

मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  लोभ का एक ही इलाज है, संतोष की वृत्ति को बढ़ाएं
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: लोभ का एक ही इलाज है, संतोष की वृत्ति को बढ़ाएं

मनुष्य के छह शत्रुओं में एक लोभ भी है। इसका अर्थ है अतिरिक्त लालसा, अनुचित की मांग। यह धन, पद, वस्तु, शरीर- इन पर काम करता है। मोटे तौर पर लोभ और लालच एक ही हैं। छोटा-सा फर्क ये है कि लोभ, यानी जो आपके पास है, उसको और बढ़ाएं। और लालच, यानी जो दूसरों […]

सी.पी. राधाकृष्णन का कॉलम:  जहां आध्यात्मिकता का परम्परा से मिलन होता है
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सी.पी. राधाकृष्णन का कॉलम: जहां आध्यात्मिकता का परम्परा से मिलन होता है

तमिलनाडु लंबे समय से आध्यात्मिक भूमि रहा है। प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, गहरी समावेशी भावना और अद्वितीय बुद्धिमत्ता से संपन्न हमारे तमिल प्रदेश ने पूरे देश के धर्मों को खुलेपन के साथ अपनाया और उन्हें पोषित किया। यही कारण है कि तमिलनाडु के लोगों ने जैन धर्म को सहज भाव से अपनाया, जिसका जन्म वर्तमान बिहार […]

रसरंग में चिंतन:  स्वतंत्रता के साथ लिए गए निर्णय भी हमारे होते हैं?
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रसरंग में चिंतन: स्वतंत्रता के साथ लिए गए निर्णय भी हमारे होते हैं?

अस्तित्ववादी दार्शनिक ज्यां पॉल सार्त्र हमेशा चयन यानी चॉइस पर जोर देते थे। उनका सवाल था कि जीवन में असली महत्व किसका है – चयन का या चयनहीनता का? हालात के दलदल में फंसे मनुष्य के पास आखिर कौन सी वास्तविक पसंद बचती है? अक्सर मनुष्य परिस्थितियों के षड्यंत्र की कठपुतली बन जाता है। वह […]

लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स:  जो जानने योग्य है, उसे सिखाया नहीं जा सकता – ऑस्कर वाइल्ड
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लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स: जो जानने योग्य है, उसे सिखाया नहीं जा सकता – ऑस्कर वाइल्ड

5 घंटे पहले कॉपी लिंक ऑस्कर वाइल्ड आयरिश लेखक, कवि और नाटककार थे। लंदन के लोकप्रिय और प्रभावशाली नाटककारों में से एक माने गए थे। 1. जीना दुनिया की सबसे दुर्लभ चीज है। अधिकांश लोग तो बस अस्तित्व में रहते हैं। 2. अपने दुश्मनों को हमेशा माफ करें; इससे उन्हें सबसे ज्यादा झुंझलाहट होती है। […]

रसरंग में चिंतन:  मनुष्य के लिए मुश्किल है ऋतुओं से दूर रहना
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रसरंग में चिंतन: मनुष्य के लिए मुश्किल है ऋतुओं से दूर रहना

इन दिनों मैं वसंत ऋतु में ही डूबा हुआ हूं। इसके वैभव को अनुभव कर रहा हूं। हम सबने अनुभव किया होगा कि इन दिनों प्रकृति के कण-कण से सुगंध फैल रही है। पूरे वातावरण में महक व्याप्त हो गई है। ऐसे में वसंत का एक अनोखा रूप हमारे सामने होता है, जो मन को […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  धर्म को योग से जुड़ना पड़ेगा, इस युग में ये बहुत जरूरी है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: धर्म को योग से जुड़ना पड़ेगा, इस युग में ये बहुत जरूरी है

Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta: Religion Needs Yoga | Modern Era Essential 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता एक बहुत गहरी बात है कि पागलपन पूजा बन जाए तो ठीक है। लेकिन पूजा पागलपन नहीं बननी चाहिए। इस दर्शन को हमारे संतों ने अच्छे-से समझा था। भक्तिकाल के जितने महात्मा हुए, […]