रीटा कोठारी का कॉलम:  हमारी घरेलू बातचीत में किस सीमा तक फलसफे समाए हैं?
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रीटा कोठारी का कॉलम: हमारी घरेलू बातचीत में किस सीमा तक फलसफे समाए हैं?

मेरे मायके की शब्दावली सत्संग से आती है। जब किसी की मृत्यु होती है तो हमारे यहां कहा जाता है- ‘उनका शरीर शांत हो गया है।’ जिस सिंधी कौम ने बंटवारे के दुःख देखे हों, तरह-तरह के व्यापारों में हाथ डालकर कभी कामयाबी तो कभी बेहद नुकसान उठाए हों, वह मृत्यु और बीमारियों से जल्दी […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है

मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: आत्मा तक जाने का जो गलियारा है, वो मानवता है

मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य क्या है? ये सवाल मुझसे बहुत पूछा जाता है। इसका सीधा उत्तर है, अगर आप इंसान बनाए गए हैं तो अपने इंसान होने का वो लक्षण जीवन में पकड़ा जाए, जो आपको पशु से अलग करता है। वो है आत्मा का बोध। पशु आत्मा को स्पष्ट नहीं कर सकते। […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  लोभ का एक ही इलाज है, संतोष की वृत्ति को बढ़ाएं
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: लोभ का एक ही इलाज है, संतोष की वृत्ति को बढ़ाएं

मनुष्य के छह शत्रुओं में एक लोभ भी है। इसका अर्थ है अतिरिक्त लालसा, अनुचित की मांग। यह धन, पद, वस्तु, शरीर- इन पर काम करता है। मोटे तौर पर लोभ और लालच एक ही हैं। छोटा-सा फर्क ये है कि लोभ, यानी जो आपके पास है, उसको और बढ़ाएं। और लालच, यानी जो दूसरों […]

सी.पी. राधाकृष्णन का कॉलम:  जहां आध्यात्मिकता का परम्परा से मिलन होता है
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सी.पी. राधाकृष्णन का कॉलम: जहां आध्यात्मिकता का परम्परा से मिलन होता है

तमिलनाडु लंबे समय से आध्यात्मिक भूमि रहा है। प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, गहरी समावेशी भावना और अद्वितीय बुद्धिमत्ता से संपन्न हमारे तमिल प्रदेश ने पूरे देश के धर्मों को खुलेपन के साथ अपनाया और उन्हें पोषित किया। यही कारण है कि तमिलनाडु के लोगों ने जैन धर्म को सहज भाव से अपनाया, जिसका जन्म वर्तमान बिहार […]

रसरंग में चिंतन:  स्वतंत्रता के साथ लिए गए निर्णय भी हमारे होते हैं?
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रसरंग में चिंतन: स्वतंत्रता के साथ लिए गए निर्णय भी हमारे होते हैं?

अस्तित्ववादी दार्शनिक ज्यां पॉल सार्त्र हमेशा चयन यानी चॉइस पर जोर देते थे। उनका सवाल था कि जीवन में असली महत्व किसका है – चयन का या चयनहीनता का? हालात के दलदल में फंसे मनुष्य के पास आखिर कौन सी वास्तविक पसंद बचती है? अक्सर मनुष्य परिस्थितियों के षड्यंत्र की कठपुतली बन जाता है। वह […]

लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स:  जो जानने योग्य है, उसे सिखाया नहीं जा सकता – ऑस्कर वाइल्ड
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लेसन्स फ्रॉम ग्रेट थिंकर्स: जो जानने योग्य है, उसे सिखाया नहीं जा सकता – ऑस्कर वाइल्ड

5 घंटे पहले कॉपी लिंक ऑस्कर वाइल्ड आयरिश लेखक, कवि और नाटककार थे। लंदन के लोकप्रिय और प्रभावशाली नाटककारों में से एक माने गए थे। 1. जीना दुनिया की सबसे दुर्लभ चीज है। अधिकांश लोग तो बस अस्तित्व में रहते हैं। 2. अपने दुश्मनों को हमेशा माफ करें; इससे उन्हें सबसे ज्यादा झुंझलाहट होती है। […]

रसरंग में चिंतन:  मनुष्य के लिए मुश्किल है ऋतुओं से दूर रहना
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रसरंग में चिंतन: मनुष्य के लिए मुश्किल है ऋतुओं से दूर रहना

इन दिनों मैं वसंत ऋतु में ही डूबा हुआ हूं। इसके वैभव को अनुभव कर रहा हूं। हम सबने अनुभव किया होगा कि इन दिनों प्रकृति के कण-कण से सुगंध फैल रही है। पूरे वातावरण में महक व्याप्त हो गई है। ऐसे में वसंत का एक अनोखा रूप हमारे सामने होता है, जो मन को […]

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  धर्म को योग से जुड़ना पड़ेगा, इस युग में ये बहुत जरूरी है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: धर्म को योग से जुड़ना पड़ेगा, इस युग में ये बहुत जरूरी है

Hindi News Opinion Pandit Vijay Shankar Mehta: Religion Needs Yoga | Modern Era Essential 3 घंटे पहले कॉपी लिंक पं. विजयशंकर मेहता एक बहुत गहरी बात है कि पागलपन पूजा बन जाए तो ठीक है। लेकिन पूजा पागलपन नहीं बननी चाहिए। इस दर्शन को हमारे संतों ने अच्छे-से समझा था। भक्तिकाल के जितने महात्मा हुए, […]