अलीगढ़ जिले में रसोई गैस की कालाबाजारी का खेल प्रशासन के दावों को खुली चुनौती दे रहा है। एक तरफ जिलाधिकारी संजीव रंजन के निर्देशन में पूर्ति विभाग निरंतर सक्रियता और जीरो टॉलरेंस का दम भर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर की गलियों में घरेलू सिलिंडर 1500 से 2000 रुपये की मनमानी कीमतों पर बिक रहे हैं।
सवाल यह है कि जब व्यावसायिक सिलिंडरों की किल्लत है, तो हर छोटी-बड़ी दुकान पर ये नीले और लाल सिलिंडर पहुंच कैसे रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब तक गैस एजेंसियों के स्टॉक और वितरण प्रणाली का गहनता से ऑडिट नहीं होगा, तब तक यह कालाबाजारी नहीं रुकेगी।
दूसरी ओर, जिला पूर्ति अधिकारी सत्यवीर सिंह का कहना है कि विभाग पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि होटल, रेस्टोरेंट और मैरिज होम की सघन मॉनिटरिंग की जा रही है। घरेलू सिलिंडर का व्यावसायिक उपयोग करने वालों पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई होगी। गैस एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि रिफिल बुकिंग के बाद केवल अधिकृत हॉकरों के माध्यम से ही होम डिलीवरी सुनिश्चित की जाए।








