Budget 2026: उम्मीद है इस बार वित्तमंत्री आर्थिक विकास को गति देने वाले बजट पेश करेंगी, जिसमें विनिर्माण और आवास क्षेत्र को लेकर बड़े ऐलान किए जा सकते हैं। खासकर सरकार किफायती मकान एवं फ्लैट की कीमतों संबंधी बदलाव को लेकर ऐलान कर सकती है। लंबे समय से मांग की जा रही है कि सरकार किफायती आवास से संबंधी मूल्य सीमा को बढ़ाए। उधर, आयकर के तहत कर छूट सीमा में भी बदलाव किया जा सकता है।
वर्तमान मूल्य सीमा काफी कम
मौजूदा समय में देश में 45 लाख रुपये तक की कीमत के फ्लैट एवं आवास किफायती मकानों की श्रेणी में आते हैं। नियमों के तहत मेट्रो शहरों (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहर) में 60 वर्ग मीटर (करीब 645 वर्ग फुट) और गैर-मेट्रो शहरों में 90 वर्ग मीटर (करीब 968 वर्ग फुट) तक के घरों को किफायती आवास की श्रेणी में रखा गया है,लेकिन बढ़ती लागत के कारण निर्माता और खरीदार किफायती आवास की सीमा को बढ़ाकर 70-90 लाख तक करने की मांग कर रहे हैं, जिससे किफायती आवास खरीदने पर कर छूट संबंधी लाभ दिया जा सके।
लागत बढ़ने से सीमा बढ़ाना जरूरी
रियल एस्टेट क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भी सरकार के सामने यह मुद्दा उठाया था। उनका कहना था कि सरकार ने वर्ष 2017 में किफायती आवास की अधिकतम 45 लाख की कीमत तय की थी। अब रियल एस्टेट क्षेत्र का कहना है कि देश भर में निर्माण लागत बढ़ रही है इसलिए सीमा को बढ़ाना जरूरी है।
बड़े शहरों में फ्लैट की कीमत आसमान पर
मेट्रो शहरों में अधिकांश मकान-फ्लैट की कीमत 70 लाख के पास चली गई है। दो कमरों का फ्लैट भी अब 70 लाख से कम पर उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में पहली बार घर खरीद रहे खरीदार किफायती मकान खरीदने के दायरे बाहर हो जाते हैं। ऐसे में खरीदारों को सब्सिडी योजना का लाभ नहीं मिलता है। बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार को किफायती आवास की कीमत सीमा को बढ़ाकर 70-90 लाख कर देती है तो इससे पहली बार घर खरीद रहे काफी लोगों को सब्सिडी योजना का लाभ मिल सकेगा।
मौजूदा प्रावधान
प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के तहत 45 लाख तक के आवास पर सीधे सब्सिडी नहीं, बल्कि होम लोन पर ब्याज सब्सिडी (क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना) मिलती है, जिसमें एमआईजी के लिए 2.67 लाख तक की सब्सिडी 25 लाख के लोन पर 120 वर्ग मीटर कारपेट एरिया तक घर खरीदने के लिए मिलती है। यह सब्सिडी 1.8 लाख तक की ब्याज बचत के बराबर है। इसमें परिवार की वार्षिक आय 9 लाख तक होनी चाहिए और कोई पक्का घर नहीं होना चाहिए।
अन्य अहम मांगे
-सेक्शन 80 को फिर से लागू करना, जिससे निर्माता को 100 फीसदी कर छूट मिले।
-होम लोन के ब्याज पर 2 लाख की वर्तमान कटौती पुरानी आयकर व्यवस्था के तहत (धारा 24(b) को बढ़ाकर 4-5 लाख किया जाए।
-प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी स्कीम को मजबूत किया जाए।







