CBSE 10वीं बोर्ड में 500/500 लाकर परफेक्ट स्कोर किया:  पिता ने कहा था- 33% में भी दिक्कत नहीं; आयुष्मान ने बताए तैयारी के सीक्रेट्स
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CBSE 10वीं बोर्ड में 500/500 लाकर परफेक्ट स्कोर किया: पिता ने कहा था- 33% में भी दिक्कत नहीं; आयुष्मान ने बताए तैयारी के सीक्रेट्स

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29 मिनट पहले

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CBSE 10वीं की बोर्ड परीक्षा में ओडिशा के आयुष्मान मोहपात्र ने 500/500 नंबर स्कोर किए हैं। उन्होंने टॉप 5 सब्जेक्ट में परफेक्ट 100 स्कोर किया है। CBSE ने 15 अप्रैल को दसवीं बोर्ड का रिजल्ट जारी किया था।

आयुष्मान अभी 15 साल के हैं और आदित्य बिड़ला पब्लिक स्कूल से 10वीं बोर्ड किया है। उनका परिवार ओडिशा के पुरी में हरिराजपुर गांव रहता है।

दैनिक भास्कर से खास बातचीत में आयुष्मान बता रहे हैं अपनी तैयारी के बारे में…

आयुष्मान रिजल्ट को लेकर अपने पहले रिएक्शन के बारे में बताते कहते हैं, ‘स्कूल बस में था जब रिजल्ट अनाउंस हुए। स्कूल से घर लौट रहा था। दोस्तों ने रोल नंबर पूछा और रिजल्ट देखकर बताया। मुझे यकीन नहीं हुआ। लगा कि दोस्त प्रैंक कर रहे हैं। फिर घर आकर खुद रिजल्ट चेक किया। CBSE तीन पोर्टल्स पर रिजल्ट अपलोड करती है, मैंने तीनों जाकर अपना रिजल्ट चेक किया… मुझे तब जाकर यकीन हुआ…

कभी सोचा नहीं था कि मेरा 100% रिजल्ट आएगा। इंग्लिश, साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तो उम्मीद थी अच्छे नंबर आएंगे, लेकिन मैथमैटिक्स, सोशल साइंस और ओड़िया में भी परफेक्ट 100 आएंगे, ये नहीं सोचा था।

बचपन में मां पढ़ाती थी

बचपन से कभी ट्यूशन नहीं लिया। बचपन में मां ही पढ़ाती थी। अब भी जब तक पढ़ाई खत्म न कर लूं, मां पास ही बैठती है। मां ने बचपन से मेरी पढ़ाई पर काफी ध्यान दिया। अभी छोटी बहन को भी वो ही पढ़ाती हैं।

रोट लर्निंग की बजाय बेसिक कॉन्सेप्ट क्लियर रखे

स्कूल में टीचर्स ने मदद की और घर पर सेल्फ स्टडी से ये हो पाया है। रोट लर्निंग या ज्यादा टाइम पढ़ने की बजाय बेसिक कॉन्सेप्ट क्लियर किया। इसके लिए NCERT बुक्स के अलावा R.D. शर्मा की बुक से प्रैक्टिस किया। साथ ही फिजिक्सवाला का ऑनलाइन कोर्स जॉइन किया था, उनकी रेफरेंस बुक्स भी पढ़ी।

एक किताब पर निर्भर होने की बजाय सिलेबस फॉलो किया

सबसे पहले NCERT का सिलेबस देखें। सिलेबस देखकर घबराएं नहीं। NCERT किताबों का लेटेस्ट एडिशन ही खरीदें। सिर्फ किताबें खत्म करने की बजाय, NCERT के सिलेबस में से कॉन्सेप्ट्स पढ़ें। अगर मैं सिर्फ एक किताब पर निर्भर होता तो कभी 100 नहीं ला पाता। मैथ्स का पेपर हार्ड था, चूंकि मैंने R.D. शर्मा से भी प्रैक्टिस किया था तो मुझे कम समस्या हुई।

पढ़ाई की टाइमिंग को लेकर कंसिस्टेंट रहा

9वीं क्लास से ही फिजिक्सवाला का उड़ान NEET बैच का ऑनलाइन कोर्स लेकर पढ़ रहा था। इसमें भी सारे कॉन्सेप्ट क्लियर करने पर ज्यादा फोकस था। पढ़ाई की टाइमिंग को लेकर कंसिस्टेंट रहा। कभी 8 तो कभी 1 घंटे पढ़ने की बजाय रोजाना 2 से ढाई घंटे पढ़ता था। उसमें भी फाउंडेशनल नॉलेज को स्ट्रॉन्ग करने पर फोकस रहा, न कि एग्जाम क्लियर करने के लिए।

साइंस में इंट्रेस्ट है, खासकर बायोलॉजी। डॉक्टर बनना चाहता हूं। 8वीं क्लास से ही मैंने NEET एग्जाम के बारे में थोड़ा-थोड़ा जानना शुरू कर दिया था, जैसे कि एग्जाम कैसे होता है, इसके बाद करियर ऑप्शंस क्या है। हालांकि, काफी पहले से तय कर लिया था कि डॉक्टर बनना है। इसलिए मैंने अभी साइंस स्ट्रीम में PCB (फिजिक्स, कैमिस्ट्ररी और बायोलॉजी) लिया है। आगे NEET क्रैक करना है।

खुद को सिर्फ पढ़ाई तक लिमिट नहीं किया

बचपन से आर्ट सीख रहा हूं, की-बोर्ड म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट बजाना पसंद है। स्कूल के स्पोर्ट्स एक्टिविटीज में भी बेस्ट देता हूं। कोडिंग सीखा है। जो करता हूं उसमें अपना बेस्ट देने की कोशिश करता हूं। खुद को कभी भी सिर्फ पढ़ाई तक लिमिट नहीं किया।

परिवार ने एग्जाम से पहले आश्वासन दिया था। पापा ने कहा था, ‘33% भी लाए तो भी दिक्कत नहीं’। मैंने एग्जाम हॉल में खुद को शांत रखा। एग्जाम से पहले अगर कभी स्ट्रेस होता था, तो मम्मी या दादा से बात लेता था।

वीक सब्जेक्ट्स पर फोकस किया

सोशल साइंस मेरी वीक सब्जेक्ट था, 9वीं में भी इसमें बाकी सब्जेक्ट के मुकाबले कम नंबर आए थे। 9वीं में करीब 96% आए थे। फिजिक्स में भी मेहनत करनी पड़ी थी, क्योंकि कुछ कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं थे। एक्सट्रा स्टडी मटेरियल्स के क्वेश्चन पेपर्स सॉल्व किए। पर इसके साथ बाकी सब्जेक्ट्स जो मेरी स्ट्रेंथ थे, उनको छोड़ा नहीं।

ऐसा होता है मेरा स्कूल वाला एक आम दिन

सुबह 6:40 तक स्कूल के लिए तैयार हो जाता था। स्कूल ले जाने के लिए बस आती थी। दोपहर 2 बजे तक स्कूल चलता था। 2:40 तक घर पहुंचता था। खाना खाने के बाद शाम 5 बजे तक थोड़ा फ्री टाइम एन्जॉय करता, आमतौर पर फोन में FIFA या क्विज गेम्स खेलकर।

इसके बाद रात लगभग 8 बजे तक ऑनलाइन कोर्स की क्लासेज होती थी। उसके बाद डिनर और फिर 2 से ढाई घंटे सेल्फ स्टडी का टाइम रहता था। मैक्सिमम 11:30 तक सो जाता था। अब भी यही है।

स्टोरी – सोनाली राय

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