CJI पर जूता फेंकने वाले वकील पर अवमानना का केस:  अटॉर्नी जनरल की मंजूरी मिली; कोर्ट बोला- जब जरूरी मामले पेंडिंग तो समय बर्बाद क्यों करें
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CJI पर जूता फेंकने वाले वकील पर अवमानना का केस: अटॉर्नी जनरल की मंजूरी मिली; कोर्ट बोला- जब जरूरी मामले पेंडिंग तो समय बर्बाद क्यों करें

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नई दिल्ली6 घंटे पहले

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CJI बीआर गवई पर जूता फेंकने की घटना 6 अक्टूबर को हुई थी। - Dainik Bhaskar

CJI बीआर गवई पर जूता फेंकने की घटना 6 अक्टूबर को हुई थी।

अटॉर्नी जनरल ने भारत के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई पर जूता फेंकने वाले एक वकील के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू करने की परमिशन दे दी है। यह जानकारी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को दी गई।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन प्रमुख विकास सिंह ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाल्या बागची की बेंच से सुनवाई की अपील की है।

सिंह ने कहा कि 6 अक्टूबर को हुई इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर उन्माद फैल गया है। यह सुप्रीम कोर्ट की अखंडता और गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। आरोपी को भी पछतावा नहीं है।

हालांकि बेंच ने कहा कि जब अदालत में पहले से ही कई केस पेंडिंग हैं, इस केस पर 5 मिनट खर्च करना कितना सही होगा।

सोशल मीडिया पर अपमान करने वाली टिप्पणियां रोकने के आदेश की मांग

कोर्ट में विकास सिंह ने सुझाव दिया कि सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ एक व्यापक आदेश पारित किया जा सकता है। उन्होंने जॉन डो आदेश की मांग रखी। हालांकि, जस्टिस बागची ने कहा कि इस तरह के एकमुश्त आदेश से और बहस छिड़ जाएगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि जज ऐसे हमलों से संयमित तरीके से निपटें।

जस्टिस बागची बोले- हमारा व्यवहार और हम खुद को कैसे संभालते हैं, उससे हमें सम्मान मिलता है। CJI ने इसे एक गैर-जिम्मेदार नागरिक का कृत्य बताकर दरकिनार कर दिया है। आपको इस बात पर विचार करना होगा कि क्या उस घटना को उठाना जरूरी है जिसका हमने निपटारा कर दिया है।

इस पर सिंह ने कह कि जूता फेंकने की घटना का महिमा मंडन बंद होना चाहिए। जस्टिस कांत ने कहा कि एक बार जब हम इस मुद्दे को उठाएंगे, तो इस पर कई सप्ताह तक चर्चा होगी। वहीं, जस्टिस बागची ने कहा कि हम पैसा कमाने वाले उद्यम बन गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में 6 अक्टूबर को क्या हुआ था

यह घटना 6 अक्टूबर को हुई, जब राकेश किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में उस मंच की ओर जूता फेंका, जहां सीजेआई गवई, जस्टिस विनोद चंद्रन के साथ बैठे थे। यह हमला खजुराहो में भगवान विष्णु की 7 फुट ऊंची सिर कटी मूर्ति की पुनर्स्थापना से जुड़े एक पिछले मामले में CJI की टिप्पणियों से जुड़ा था। उस मामले को खारिज करते हुए, उन्होंने सुझाव दिया था कि वादी जाकर भगवान से समाधान पूछें।

राकेश ने कहा था- सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान

6 अक्टूबर को जूता फेंकने पर पकड़े जाने के बाद वकील राकेश किशोर ने नारा लगाते हुए कहा था- सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।’ वहीं घटना के बाद CJI ने अदालत में मौजूद वकीलों से अपनी दलीलें जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इस सबसे परेशान न हों। मैं भी परेशान नहीं हूं, इन चीजों से मुझे फर्क नहीं पड़ता।

वकील राकेश किशोर का बयान….

बात ये है कि मैं बहुत ज्यादा आहत हुआ, 16 सितंबर को चीफ जस्टिस के कोर्ट में किसी व्यक्ति ने PIL दाखिल की, तो गवई साहब ने पूरी तरह से उसका मजाक उड़ाया, कहा कि आप मूर्ति से प्रार्थना करो, मूर्ति से कहो कि अपना सिर रिस्टोर कर ले। जब हमारे सनातन धर्म से जुड़ा कोई मामला जैसे- जल्लीकट्टू हो, दही हांडी की ऊंचाई… तो ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट ऐसे ऑर्डर पास करती है, जिनसे मुझे बहुत दुख होता है। इन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। ठीक है उस आदमी (याचिकाकर्ता) को रिलीफ नहीं देनी है, नहीं दीजिए… लेकिन उसका मजाक नहीं उड़ाएं, उसकी याचिका भी खारिज कर दी।

3 घंटे पूछताछ हुई थी, बार ने निलंबित किया

जूता फेंकने वाले वकील को पुलिस घटना के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया था। सुप्रीम कोर्ट कैंपस में ही 3 घंटे पूछताछ की थी। पुलिस ने कहा कि SC अधिकारियों ने मामले में कोई शिकायत नहीं की। उनसे बातचीत के बाद वकील को छोड़ा गया था।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने आरोपी वकील राकेश किशोर कुमार का लाइसेंस रद्द कर दिया। उसका रजिस्ट्रेशन 2011 का है। इसके साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी आरोपी को तुरंत निलंबित कर दिया।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने ये आदेश जारी किया था। उन्होंने कहा था कि यह वकीलों के आचरण, नियमों का उल्लंघन है। निलंबन के दौरान किशोर कहीं भी प्रैक्टिस नहीं कर सकते।

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