CJI बोले-हम नहीं चाहते AI न्यायिक प्रक्रिया पर हावी हो:  ज्यूडीशियरी में AI का इस्तेमाल रोकने की याचिका खारिज; बेंच ने कहा- हम सावधान हैं
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CJI बोले-हम नहीं चाहते AI न्यायिक प्रक्रिया पर हावी हो: ज्यूडीशियरी में AI का इस्तेमाल रोकने की याचिका खारिज; बेंच ने कहा- हम सावधान हैं

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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ज्यूडिशियल सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग के बिना रेगुलेशन वाले इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग वाली PIL पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि उसे ज्यूडिशियरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) टूल्स के बुरे असर के बारे में पता है, लेकिन इन मुद्दों को ज्यूडिशियल निर्देशों के बजाय एडमिनिस्ट्रेटिव साइड से ठीक से सुलझाया जा सकता है।

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने एडवोकेट अनुपम लाल दास की दलीलें सुनीं। जिन्होंने AI से बने कंटेंट और ज्यूडिशियल प्रोसेस में इसके गलत इस्तेमाल से होने वाले खतरों के खिलाफ सुरक्षा की मांग की थी।

याचिका में किए गए दावे

  • AI टूल्स ऐसे ज्यूडिशियल उदाहरण और फैसले बनाते हैं जो मौजूद नहीं हैं। वे आखिरकार ज्यूडिशियल फैसलों का हिस्सा बन जाते हैं।
  • निचली अदालतों ने सुप्रीम कोर्ट के ऐसे उदाहरणों का हवाला देना शुरू कर दिया है जो मौजूद ही नहीं हैं।
  • केरल हाईकोर्ट में एक स्ट्रक्चर्ड मैकेनिज्म और AI पर सुप्रीम कोर्ट के अपने व्हाइट पेपर के बारे में बताया था।

CJI बोले- जजों को क्रॉस-चेक करना चाहिए

सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि यह बार और जजों दोनों के लिए एक सबक है। चीफ जस्टिस ने जवाब दिया कि AI उपकरणों ने जरूर झूठे उदाहरण गढ़े होंगे क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि वकीलों ने कहीं न कहीं ऐसे मनगढ़ंत मामलों का हवाला दिया है।

CJI ने कहा कि ज्यूडिशियरी ऐसे जोखिमों के बारे में जानती है और उन्हें ज्यूडिशियल ट्रेनिंग के जरिए सुलझाया जा रहा है। जजों को क्रॉस-चेक करना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय के साथ, बार भी सीखेगा और हम भी सीखेंगे।

उन्होंने आगाह किया कि वकीलों को भी AI के दुरुपयोग को लेकर सतर्क रहना चाहिए। मनगढ़ंत बातों और सबूतों पर भरोसा करना उनकी पेशेवर जिम्मेदारी के खिलाफ है।

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