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Fact Check: झूठा है भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं का अधिकारी को पिटने का दावा, पढ़ें पड़ताल

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग एक व्यक्ति को मारते नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने अधिकारी को ही पीट दिया क्योंकि अधिकारी सवर्ण समाज से था। 

अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो दो महीना पुराना कर्नाटक का है। दरअसल, ये घटना एक किसान ने वर्षों से मुआवजा न मिलने के कारण एक सरकारी अधिकारी को चप्पल से मारने की थी। 

क्या है दावा 

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने अधिकारी को ही पीट दिया क्योंकि अधिकारी सवर्ण समाज से था। 

नेहरा जी (@nehraji778)नाम के एक्स यूजर ने लिखा, ‘चंद्रशेखर रावण के कार्यक्रम की अनुमति लेने गये  भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने अधिकारी को ही पीट दिया क्योंकि अधिकारी सवर्ण समाज से था।अगर अधिकारी बचाव कर लेता या कुछ बोल देता तो SC -ST एक्ट लग जाता , तो बस पीटते रहो यही सही है?’ पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य पोस्ट के लिंक आप यहां और  यहां देख सकते हैं। वहीं, आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें न्यूज 18 के यूट्यूब चैनल पर वायरल वीडियो देखने को मिला। यह वीडियो 13 जून 2026 को साझा किया गया है। इसके साथ ही यहां बताया गया है कि मुआवजे के लिए लगभग 20 साल तक इंतजार करने के बाद एक किसान का गुस्सा फूट पड़ा। यह घटना BTDA ऑफिस में हुई, जहां तीखी बहस के दौरान एक अधिकारी के साथ कथित तौर पर चप्पल से मारपीट की गई।

आगे की पड़ताल में हमें टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 14 जून 2026 को प्रकाशित की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि  शनिवार को बागलकोट के नवनगर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, एक किसान ने बागलकोट टाउन डेवलपमेंट अथॉरिटी (BTDA) के फर्स्ट डिवीजन क्लर्क (FDC) को कथित तौर पर चप्पल मारी। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। यह घटना तब हुई जब दलित संघर्ष समिति (DSS) के कार्यकर्ता BTDA ऑफिस के बाहर धरना दे रहे थे और सफाई कर्मचारियों के लिए जमीन मंजूर करने की मांग कर रहे थे, जो एक साल से लंबित थी।




पड़ताल का नतीजा 

हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को मुआवजा  ना मिलने पर मारपीट का पाया है। इस वीडियो को शेयर कर लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।



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