सोशल मीडिया पर एक ट्रैक्टर रैली का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बहुत सारे ट्रक एक कतार में खड़े हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को शेयर करके दावा किया गया कि राजस्थान में किसानों द्वारा अरावली पहाड़ियों की सुरक्षा की मांग को लेकर ट्रैक्टर रैली आयोजित की गई है। इस वीडियो पर लिखा गया है कि राजस्थान वाले 2 हजार से भी अधिर ट्रैक्टर लेकर अरावली के बचाव में रैली करने निकले हैं।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी पड़ताल में सामने आया कि यह ट्रैक्टर रैली अरावली प्रदर्शन से संबंधित नहीं है। यह वीडियो मध्य प्रदेश के उज्जैन का है। यह रैली राजस्थान से संबंधित नहीं है।
आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा के अनुसार, किसी क्षेत्र को अरावली पहाड़ी तभी माना जाएगा जब उसकी ऊंचाई आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर अधिक हो। वहीं, अरावली रेंज की पहचान ऐसी दो या उससे ज्यादा पहाड़ियों के समूह के रूप में की गई है, जो एक-दूसरे से 500 मीटर के दायरे में स्थित हों। इस परिभाषा को लेकर विशेषज्ञों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे अरावली के कई महत्वपूर्ण हिस्से जैसे ढलान, छोटी पहाड़ियां, तलहटी और भूजल रिचार्ज क्षेत्र कानूनी संरक्षण से बाहर हो सकते हैं, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका है।
क्या है दावा
इस वीडियो के शेयर करके दावा किया जा रहा है कि राजस्थान के किसान 2 हजार से भी अधिर ट्रैक्टर के साथ अरावली के लिए रैली करने निकले हैं।
@GoLDeN_CiTy_OF_JaiSalMeR नाम के एक यूट्यूब चैनल ने इस वीडियो को शेयर करके लिखा, “राजस्थान वाले अरावली बचाने के लिए निकले 2500 के साथ एक बड़ी रैली लेकर ! अरावली है तो जीवन हैं” पोस्ट का लिंक आप यहां देख सकते हैं।
इस तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें यह वीडियो rajeshwar_world_01 नाम के एक इंस्टाग्रामक अकाउंट पर देखने को मिला। इस वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा गया था “किसान एकता उज्जैनMP” यहां वीडियो को 17 सितंबर को शेयर किया गया था।
कीवर्ड के माध्यम से सर्च करने पर हमें यह वीडियो पब्लिक फर्स्ट नाम के एक यूट्यूब चैनल पर देखने को मिला। यहां इस मीडिया रिपोर्ट को 16 सितंबर को प्रकाशित किया गया था। इस वीडियो में उज्जैन के भारतीय किसान संघ द्वारा भूमि अधिग्रहण योजना के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन के बारे में बताया गया था।
हमारी पड़ताल में सामने आया कि यह वीडियो सितंबर से इंटरनेट पर मौजूद है। वहीं अरावली का मामला 21 नवंबर के बाद शुरू हुआ है।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वीडियो अरावली बचाने के लिए किए जा रहे प्रदर्शन से संबंधित नहीं है। वीडियो मध्यप्रदेश उज्जैन से संबंधित है।








