सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है। तस्वीर में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर मधुमक्खियां हमला करती नजर आ रही हैं। तस्वीर को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर मधुमक्खियों ने गंभीर रूप से हमला किया है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल तस्वीर एआई से बनी है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर करके दावा किया जा रहा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर मधुमक्खियों ने गंभीर रूप से हमला किया है।
सुनील (@suniljha899) नाम के एक्स यूजर ने लिखा,’रोहिनिया वाराणसी मधुमक्खियों के कोप का भाजन बने शुक्राचार्य अविमुक्तेश्वरानंद यह योगीजी के खिलाफ़ कैंपेन चला रहा है जिसके लिए मधुमक्खियों ने इस ढोंगी को काशी में हमला करके सज़ा दी है। सनातन हिंदू धर्म का दुरूपयोग महंगा पड़ गया सपा एजेंट को।’ पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें यूट्यूब पर न्यूज 18 का एक वीडियो मिला। यह वीडियो 13 मई 2026 को साझा किया गया है। यहांं बताया गया है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर मधुमक्खियों ने हमला किया है। लेकिन यहां हमें वायरल तस्वीर से संबधित कोई क्लिप देखने को नहीं मिली।
आगे की पड़ताल के लिए हमने अमर उजाला के न्यूज डेस्क से संपर्क किया। इस दौरान हमें एक रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 14 मई 2026 को साझा की गई है। यहां बताया गया है कि प्राचीन शिवधाम मंदिर (दरेखू) में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की सभा के दौरान अचानक मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई। इसमें 40 श्रद्धालु जख्मी हो गए। कई बुजुर्ग और महिलाएं गिरकर मामूली रूप से चोटिल भी हुईं। हमले के कारण जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का प्रवचन भी कुछ समय के लिए बाधित हुआ।
यहां से पता चलता है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर मधुमक्खियों ने हमला किया है। लेकिन कहीं भी हमेंं वायरल तस्वीर से संबंधित कुछ नहीं मिला। इसके बाद हमने तस्वीर को ध्यान से देखा। यहां हमें तस्वीर में कई विसंगतियां दिखाई दीं। जैसे तस्वीर की क्वालिटी काफी ज्यादा थी, जो की आमतौर पर देखने को नहीं मिलता। यहां से हमें तस्वीर की एआई से बने होने का संदेह हुआ। इसके बाद हमने तस्वीर की पड़ताल के लिए एआई टूल साइट इंजन का इस्तेमाल किया। इस टूल ने वायरल तस्वीर को 99 फीसदी एआई से बने होने की जानकारी दी।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल तस्वीर को एआई से बना पाया है।








