अरावली पर्वत शृंखला को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसका विरोध हो रहा है। विशेषज्ञ दावा कर रहे हैं कि इस फैसले से अरावली का 91.3 फीसदी हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र कानूनी सुरक्षा के दायरे से बाहर हो सकता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल भौगोलिक सीमा का बदलाव नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण, जल संकट की ओर धकेलने वाला कदम साबित हो सकता है। ऐसे में कई जगह अरावली बचाओ के लिए प्रदर्शन चल रहा है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दो गुट के बीच झड़प होती नजर आ रही है। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि अरावली पर्वत के लिए उत्तराखंड के आदिवासी समाज के लोग लड़ रहे हैं।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो उत्तराखंड का नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ का है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि उत्तराखंड के आदिवासी समाज के लोग अरावली पहाड़ के लिए लड़ रहे हैं।
राजकुमार भैया नाम के फेसबुक यूजर ने लिखा, “अरावली पर्वतमाला माला के लिए लड़ते हुवे हमारे उत्तराखंड राज्य के आदिवासी वीर” पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें न्यूज 18 की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 3 दिसंबर 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में हमें वायरल वीडियो के कुछ क्लिप देखने को मिले। इसके साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ में सरगुजा जिले के अंबिकापुर से 15 किलोमीटर दूर स्थित साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की अमेरा कोयला खदान में आज सुबह ग्रामीणों का उग्र विरोध प्रदर्शन हिंसक झड़प में बदल गया। 300 से अधिक ग्रामीण, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं, ने ओपन कास्ट माइनिंग के दौरान चल रही खुदाई को रोकने के लिए खदान में घुसपैठ की। लाठियों, डंडों, गुलेल और आसपास पड़े कोयले के पत्थरों से लैस ग्रामीणों ने पुलिस बल पर हमला बोल दिया, जिसमें 40 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए।
यहां से पता चलता है कि वायरल वीडियो अरावली बचाओ प्रदर्शन से जुड़ा नहीं है।
आगे की पड़ताल के लिए हमने अमर उजाला न्यूज डेस्क से संपर्क किया। इस दौरान हमें एक रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 3 दिसंबर 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में हमें वायरल वीडियो के कुछ क्लिप देखने को मिले। इसके साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि सरगुजा जिला के अमेरा कोल खदान के विस्तार को लेकर ग्रामीण उग्र हो गए हैं, सैकड़ों ग्रामीणों ने लाठी डंडे गुलेल और कुल्हाड़ी से लैस होकर पुलिस बल पर हमला कर दिया। ग्रामीणों ने पथराव भी किया जिसमें 40 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। जवाबी कार्रवाई में आंदोलनरत लगभग एक दर्जन ग्रामीण घायल हुए हैं। मौके पर भारी विरोध और तनाव के बीच अंबिकापुर से अतिरिक्त पुलिस बल को रवाना किया गया है। हालात देखते हुए पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले भी ग्रामीणों पर छोड़े गए हैं, और हल्के बल का प्रयोग भी किया गया है। जिसके कारण तनाव और बढ़ गया।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को छत्तीसगढ़ का पाया है। इस वीडियो को अरावली से जुड़े विरोध प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है।








