सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी बोलते नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि उन्होंने भारत और तालिबान के संबंधों पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा केंद्र सरकार की नाकाम नीतियों के चलते भारत तालिबान सरकार को पैसा भेज रहा है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो को एडिट कर शेयर किया जा रहा है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारत और तालिबान के संबंधों पर बयान दिया है।
XaQil (@in9Zero) नाम के एक्स यूजर ने लिखा,’ केंद्र सरकार की नाकाम नीतियों के चलते भारत तालिबान सरकार को पैसा भेजने के अलावा कुछ नहीं कर रहा है। क्या सिर्फ पैसा ही सब कुछ कर सकता है?- सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी’ पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें एएनआई के एक्स हैंडल पर मूल वीडियो देखने को मिला। यह वीडियो 30 मई 2026 को साझा किया गया है। यहां हमें वायरल वीडियो से संबंधित कई भी क्लिप देखने को नहीं मिली। यहां पर भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी बोलते नजर आ रहे हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। फिलहाल शत्रुता का अस्थायी विराम है। भारतीय सेना और तीनों सेनाएं ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए पूरी तैयारी कर रही हैं, अगर ऐसा होता है। वर्तमान में, हम तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और अगले युद्ध के लिए खुद को तैयार करने पर ध्यान दे रहे हैं। चौबीसों घंटे युद्धक्षेत्र इतना पारदर्शी है कि हर गतिविधि दूसरे पक्ष को पता होती है, इसलिए हमें अपनी तैनाती, उपयोग और सीमावर्ती क्षेत्रों में अपने सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षा के मामले में बहुत सतर्क रहना होगा। ’
आगे की पड़ताल में हमें पीआईबी फैक्ट चैक के हैंडल पर एक पोस्ट मिली। यह पोस्ट 1 जून 2026 को साझा की गई है। पोस्ट में वायरल वीडियो को फर्जी बताया गया है। पोस्ट में लिखा है कि भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। वायरल वीडियो को डिजिटल रूप से हेरफेर करके सेना प्रमुख के नाम से गलत बयान देने का प्रयास किया गया है।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को फर्जी पाया है।








