Fact Check: नेपाल की रैली में योगी आदित्यनाथ के पोस्टर वाली छह महीने पुरानी तस्वीर, अभी की बताकर हो रही शेयर
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Fact Check: नेपाल की रैली में योगी आदित्यनाथ के पोस्टर वाली छह महीने पुरानी तस्वीर, अभी की बताकर हो रही शेयर

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नेपाल में जेन-जी प्रदर्शन के बाद से सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं। इसी कड़ी में एक तस्वीर वायरल हो रही है। तस्वीर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नजर आ रहे हैं। तस्वीर को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि नेपाल के युवा नेपाल में भी योगी मॉडल चाहते हैं। 

अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल तस्वीर छह महीने पुरानी हैं, जिसे हालिया घटना से जोड़कर शेयर किया जा रहा है। 

क्या है दावा 

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर कर दावा किया जा रहा है कि नेपाल के युवा नेपाल में योगी  आदित्यनाथ के मॉडल को चाहते हैं। 

टाइगर राजा सटायर (@TigerRajaSinggh) नाम के एक्स यूजर ने लिखा “महाराज जी के पोस्टर नेपाल में अब नेपाल के युवा भी चाहते हे कि अब नेपाल में योगी मॉडल बने। हिंदुओं क्या गोरखपुर का बॉर्डर काठमांडू तक किया जाए? योगी को मानने वाले उपस्थिति दर्ज करे टोपी वाले दूर रहे। योगी आदित्यनाथ जिंदाबाद।“ पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के कई अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।


पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें बीबीसी नेपाल की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 13 मार्च 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है, “पिछले रविवार को पोखरा से काठमांडू लौटते समय पूर्व नरेश का स्वागत हुआ। स्वागत के लिए राजधानी में आयोजित एक रैली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर प्रदर्शित की गई।  इस तस्वीर की नेपाल और भारत में काफी आलोचना हुई थी।”

आगे की पड़ताल में हमें न्यूज 18 की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 11 मार्च 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि नेपाल में एक रैली में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पोस्टर लगने से विवाद खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार, आदित्यनाथ के ये पोस्टर रविवार को काठमांडू में पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र शाह के स्वागत में आयोजित एक राजशाही समर्थक रैली में लगाए गए थे।

पड़ताल का नतीजा

हमने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल तस्वीर छह महीने पुरानी है। इस तस्वीर का हालिया संघर्ष से कोई संबंध नहीं है। 



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