जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा के बाद से सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हो रहे हैं। इसी बीच, एक पोस्ट शेयर कर दावा किया जा रहा है कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को अपना आधिकारिक आवास खाली करने के लिए कहा गया है। इसके साथ ही उपराष्ट्रपति कार्यालय को सील कर दिया गया है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि उपराष्ट्रपति कार्यालय को सील नहीं किया गया है। इसके साथ ही धनखड़ को आधिकारिक आवास खाली करने के लिए भी नहीं कहा गया है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर कर दावा किया जा रहा है कि जगदीप धनखड़ को आधिकारिक आवास खाली करने के लिए कहा गया है। साथ ही उपराष्ट्रपति कार्यालय को सील कर दिया गया है।
इंडिया डिफेंस डेली (@IndiaDefDaily) नाम के एक्स यूजर ने लिखा, “बड़ी खबर: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को कथित तौर पर अपना आधिकारिक आवास खाली करने के लिए कहा गया है। उनका कार्यालय सील कर दिया गया है और सोशल मीडिया टीम को हटा दिया गया है। घटनाक्रम सामने आ रहा है।” पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के कई अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
दावे की पड़ताल करने के लिए हमने पोस्ट के कीवर्ड से सर्च किया। इस दौरान हमें वायरल दावे से संबंधित कोई विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिली।
इसके बाद हमें प्रेस सूचना ब्यूरो फैक्ट चेक की एक पोस्ट मिली। यह पोस्ट 23 जुलाई 2025 को साझा की गई है। पोस्ट में वायरल दावे को फर्जी बताया गया है। प्रेस सूचना ब्यूरो ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, “सोशल मीडिया पर इस तरह के कई दावे किए जा रहे हैं कि उप राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास को सील कर दिया गया है और पूर्व उपराष्ट्रपति को अपना आवास तत्काल खाली करने को कहा गया है। इस तरह के सभी दावे फर्जी हैं।”
आगे की पड़ताल के लिए हमने अमर उजाला के न्यूज डेस्क से संपर्क किया। इस दौरान हमें एक रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 24 जुलाई 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में वायरल दावे का खंडन किया गया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि उपराष्ट्रपति के आधिकारिक दफ्तर को सील कर दिया गया है और पूर्व उपराष्ट्रपति को तुरंत अपना आवास खाली करने के लिए कहा गया है।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को फर्जी पाया है। वायरल दावे को शेयर कर लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है।








