Fact Check: फ्रांस के वीडियो को ईरान का बताकर किया जा रहा शेयर, पढ़ें पड़ताल
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Fact Check: फ्रांस के वीडियो को ईरान का बताकर किया जा रहा शेयर, पढ़ें पड़ताल

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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक महिला अपना हिजाब उतराती नजर आ रही है। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो ईरान का है, जहां महिला इस्लामिक सत्ता के खिलाफ हिजाब उतारकर प्रदर्शन कर रही है। 

अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो में नजर आ रही महिला फ्रांस की है। इसके साथ ही यह वीडियो भी फ्रांस का है।

क्या है दावा

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है एक महिला ने ईरान में अपना हिजाब उतरकर प्रदर्शन किया। 

अभय प्रताप सिंह (@IAbhay_Pratap) नाम के एक्स यूजर ने लिखा, ”ईरान की इस बहादुर लड़की को देखिए खामनेई की इस्लामिक सत्ता के खिलाफ बुर्का उतारकर खुला मोर्चा खोल दिया है बुर्का उतार फेंका और टॉप पर लिखा है F**k Khamenei Iran से इस्लामिक सत्ता के खिलाफ लड़कियां सबसे आगे हैं। वहीं, भारत की फेमिनिस्ट मादाएं हिजाब के समर्थन में लुंगी डांस करती हैं।” पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें headlinerecorder नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर वायरल वीडियो देखने को मिला। यह वीडियो 11 जनवरी 2026 को साझा किया गया है। इसके साथ ही यहां लिखा है पेरिस, 11 जनवरी, 2026- ईरान में चल रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के समर्थन में आयोजित एक रैली में, फ्रांसीसी कार्यकर्ता कैमिला एरोस, जो कलेक्टिफ एरोस की प्रवक्ता हैं, ने प्लेस डू ट्रोकाडेरो में नाटकीय ढंग से अपना हिजाब और कोट उतार दिया, जिससे एक टी-शर्ट दिखाई दी जिस पर ईरान के सर्वोच्च नेता को संबोधित करते हुए “खामेनेई को गाली दो” लिखा था। इस साहसिक कदम पर ईरान, फ्रांस और इस्राइल के झंडों के बीच लोगों ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाईं। 

 

इसके बाद हमें iamtasyak नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर वायरल वीडियो देखने को मिला। यह वीडियो 11 जनवरी को साझा किया गया है। इसके साथ ही लिखा है कि कैमिल एरोस, फ्रांसीसी कार्यकर्ता समूह कलेक्टिफ एरोस की प्रवक्ता हैं, जो सार्वजनिक अभियानों और मीडिया में टकराव के माध्यम से इस्लामी विस्तार और प्रगतिशील सांस्कृतिक रुझानों का मुकाबला करता है। उनकी रचनाएं चरमपंथियों के साथ गठबंधन करने वाले वामपंथियों के पाखंड की तीखी आलोचना करती हैं। साथ ही विदेशी प्रभावों के विरुद्ध फ्रांसीसी कैथोलिक विरासत और राष्ट्रीय संप्रभुता का समर्थन करती हैं।

 

आगे की पड़ताल में हमें कैमिल एरोस का एक एक्स पोस्ट मिला। यहां उन्होंने वायरल वीडियो के नीचे लिखा है कि आपके शब्दों के लिए धन्यवाद। मैं बस यह सुनिश्चित करना चाहती हूं कि आपको पता हो कि यह घटना पेरिस, फ्रांस में घटी है। ईरान के लोगों को जितनी बहादुरी दिखानी पड़ी, उतनी बहादुरी मुझे नहीं दिखानी पड़ी। फ्रांस और यूरोपीय संघ में इस्लामी खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन हमारे नायक ईरानी हैं।

 

इसके बाद हमने कैमिल एरोस की प्रोफाइल चेक की। यहां उन्होंने खुद को @collectiferos की प्रवक्ता बताया है। 

 

इसके बाद हमने @collectiferos की वेबसाइट को सर्च किया। इस वेबसाइट के मुताबिक  कैमिल एरोस ने खुद को एक पूर्व वामपंथी बताया है। इसके साथ ही उन्होंने सामाजिक सेवाओं में काम किया है। इसमें आगे बताया गया है कि जमीनी स्तर पर उनके अनुभव और वामपंथियों के पाखंड के प्रति उनकी बढ़ती जागरूकता ने उनकी आंखें खोल दीं। 



पड़ताल का नतीजा 

हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो में नजर आ रही महिला को फ्रांस का पाया है। इसके साथ ही यह वीडियो भी फ्रांस का है। 





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