Fact Check: बांग्लादेश में रिक्शा वालों के रिक्शे तोड़ने के वीडियो को भारत का बताकर किया जा रहा शेयर
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Fact Check: बांग्लादेश में रिक्शा वालों के रिक्शे तोड़ने के वीडियो को भारत का बताकर किया जा रहा शेयर

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि एक व्यक्ति के ई रिक्शा को कुछ लोग दूसरी गाड़ी में रख रहे हैं। वीडियो में  दिखा रहा शख्स अपने रिक्शा को बचाने की नाकाम कोशिश कर रहा है। वीडियो को शेयर कर दावा जा रहा है कि नगर निगम वाले गरीब लोगों का रिक्शा को तोड़ रहे हैं।

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अमर उजाला की पड़ताल में हमने वीडियो को झूठा पाया है। हमने अपनी पड़ताल में पाया कि यह वीडियो बांग्लादेश का है। इस वीडियो का भारत से कोई संबंध नहीं है। भारत के संबंध में इस वीडियो को शेयर करके भ्रामक दावा किया जा रहा है। 

क्या है दावा 

वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि भारत में नगर निगम वाले गरीबों  की कमाई के जरिए को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। नगर निगम गरीबों के रिक्शों को तोड़ रहा है। 

खुर्रम सिद्दीकी नाम के एक फेसबुक यूजर ने वीडियो शेयर कर लिखा है, “नगर निगम पीडब्ल्यूडी वालों ने गरीब का रिक्शा तोड़ा… इस भाई का क्या कसूर था…।” इसके  साथ ही पोस्ट में एमसीडी दिल्ली का हैशटैग का इस्तेमाल किया है। दावे की लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

  

इसी तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसकी आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल 

वीडियो की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें फेसबुक पर ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट मिली,ढाका ट्रिब्यून बांग्लादेश का प्रतिष्ठित अखबार है। वीडियो के साथ कैप्शन लिखा गया था “अवैध ऑटो-रिक्शा हटाने की कार्रवाई के दौरान ड्राइवर ज़मीन पर गिर गया। रिपोर्टर: इमदाद यामिन

   

आगे की पड़ताल में हमें  नओइसेल्सस नाम से एक इंस्टाग्राम अकाउंट मिला। जहां इस वीडियो को शेयर करके कैप्शन में लिखा गया था “ढाका के नगर निगम ने बैटरी से चलने वाले ऑटो-रिक्शा को हटाने के लिए एक अभियान शुरू किया है, जो शहर की सड़कों से उन पर प्रतिबंध लगाने की एक बड़ी पहल का हिस्सा है। इस अभियान का उद्देश्य मौजूदा नियमों को लागू करना और इन वाहनों को सड़कों से हटाना है। आज, मंगलवार, 13 मई को एक वीडियो में धानमंडी 27 क्षेत्र में चल रहे निष्कासन अभियान को दिखाया गया। यह नगर निगम द्वारा प्रतिबंध के सक्रिय प्रवर्तन और ढाका की सड़कों से बैटरी से चलने वाले ऑटो-रिक्शा को हटाने के उनके प्रयासों को दर्शाता है।” 

  

 

इस मामले से जुड़ी एक रिपोर्ट हमें बांग्लादेश के मीडिया चैनल प्रोथोम आलो के यूट्यूब चैनल पर देखने को मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि 13 मई को धानमंडी चौराहा नंबर 27 से असद गेट तक बैटरी चालित ऑटो रिक्शा को हटाने का अभियान चलाया गया। एक घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान ढाका नॉर्थ सिटी कॉर्पोरेशन के प्रशासक मोहम्मद अजाज मौजूद थे। उस समय सौ से अधिक अवैध ऑटो-रिक्शा जब्त कर उन्हें डंपिंग के लिए भेज दिया गया था।” 

इसके बाद से हमने इस्तेमाल कीवर्ड को सर्च किया। इस दौरान हमें डेली स्टार की रिपोर्ट मिली। हमें मीडिया रिपोर्ट में एक फोटो का इस्तेमाल हुआ है, जिसमें वायरल हो रहा शख्स नजर आ रहा है। इस खबर में बताया गया है कि सरकार की तरफ से तीन ऑटो रिक्शा चालक को मुआवजा दिया गया है। यह खबर वायरल वीडियो से जुड़ी हुई थी। 

 

  

पड़ताल के नतीजे 

हमने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल वीडियो भ्रामक है। यह वीडियो भारत का नहीं है बल्कि बांग्लादेश का है। 





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