Fact Check: भारत के आयुर्वेदिक डॉक्टरों को मिली नासा के साथ अंतरिक्ष यात्रा करने के मंजूरी, पढ़ें पड़ताल
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Fact Check: भारत के आयुर्वेदिक डॉक्टरों को मिली नासा के साथ अंतरिक्ष यात्रा करने के मंजूरी, पढ़ें पड़ताल

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सोशल मीडिया में एक अखबार में प्रकाशित एक रिपोर्ट की कटिंग वायरल हो रही है। अखबार की इस कथित वायरल कटिंग में लिखा है कि नेशनल एरोनॉटिक्स और स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन  (नासा) और भारतीय आयुर्वेदिक डॉक्टर के बीच समझौता हुआ है। इसी के साथ दावा किया जा रहा है कि नासा ने अंतरिक्ष यात्रा में पारंपरिक चिकित्सा की भूमिका का पता लगाने के लिए भारतीय आयुर्वेदिक डॉक्टर को चुना है।

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को झूठा पाया है। हमें अपनी पड़ताल के दौरान पता चला कि नासा और आयुष मंत्रालय के बीच ऐसा कोई भी समझौता नहीं हुआ है। दोनों के अधिकारिक एक्स हैंडल पर इस से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिली है। 

क्या है दावा?

शेयर की जा रही अखबार की कटिंग से दावा किया जा रहा है कि नासा ने अंतरिक्ष यात्रा के लिए भारतीय आयुर्वेदिक डॉक्टर को चुना है।

 

आयुर्वेदिक पीजी बेसिक नाम के यूट्यूब यूजर ने अपने अकाउंट पर अखबार की कटिंग को शेयर किया। इसके साथ ही कैप्शन में लिखा कि नासा ने आयुर्वेदिक डॉक्टरों का चुनाव किया है। पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

 

 

इससे जुड़ा एक और दावा और उसका आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल 

हमने इस दावे से जुड़े कीवर्ड को सबसे पहले इंटरनेट पर सर्च किया। यहां हमें इस दावे से जुड़ी कोई भी मीडिया रिपोर्ट देखने को नहीं मिली। पड़ताल में आगे बढ़ते हुए हमने आयुष मंत्रालय के सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर इस दावे से जुड़ी कोई जानकारी खोजने की कोशिश की, लेकिन हमें यहां से भी इस तरह की कोई जानकारी नहीं मिली।  

 

इसके बाद से हमने नासा के एक्स अकाउंट और वेबसाइट पर भी इससे जुड़ी कोई जानकारी के लिए सर्च किया। लेकिन यहां भी वायरल हो रही अखबार की कटिंग से जुड़ी कोई जानकारी हमें नहीं मिली।  

इसके बाद सरकार की नोडल एजेंसी प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) पर हमें इसके बारे में जानकारी मिली। पीआईबी फैक्ट चेक ने वायरल हो रही अखबार की कटिंग को अपने पड़ताल में झूठा पाया।  पीआईबी का तरफ से कहा गया कि यह अखबार की क्लिपिंग नकली है। शेयर की जा रही इमेज मार्फ्ड है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने कभी भी ऐसी कोई खबर नहीं छापी है। 

पड़ताल का नतीजा 

 हमारी पड़ताल में यह दावा झूठा साबित हुआ है। वायरल हो रहा कोई भी दावा सच नहीं है। आयूष मंत्रालय ने इस तरह का कोई करार नासा के साथ नहीं किया है। 





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