Fact Check: भारत में ट्रेन पटरियों के बीच सोलर पैनल लगाए जाने का दावा गलत, पड़ताल में पढ़ें सच
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Fact Check: भारत में ट्रेन पटरियों के बीच सोलर पैनल लगाए जाने का दावा गलत, पड़ताल में पढ़ें सच

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सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है। इस तस्वीर में एक कर्मचारी रेल की पटरियों पर काम करता हुआ नजर आ रहा है। दावा किया जा रहा है कि  वह ट्रेन की पटरियों पर सोलर पैनल लगा रहा है। इस तस्वीर को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि भारत रेल की पटरियों को बिजली संयंत्रों में बदल रहा है। भारत की स्टार्टअप कंपनी सन-वेज रेलवे पटरियों के बीच सौर पैनल लगाने का काम कर रही है। इससे सालाना 1 टेरावॉट-घंटे से अधिक बिजली का उत्पादन हो सकता है। 

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अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी जांच में यह सामने आया कि रेलवे ट्रैक पर रिमूवेबल सोलर पैनल लगाने का प्रोजेक्ट असल में भारत में नहीं बल्कि स्विट्जरलैंड में चल रहा है। इस सोलर पैनल को लगाने का काम  सन-वेज कंपनी कर रही वो भारत में नहीं बल्कि स्विट्जरलैंड  में है। 

क्या है दावा 

ट्रेन का पटरियों पर काम करते एक व्यक्ति की तस्वीर को शेयर करके दावा किया जा है कि भारत में ट्रेन की पटरियों पर सोलर पैनल लगाने का काम किया जा रहा है। ट्रेन पटरियों से भी बिजली का उत्पादन किया जाएगा। 

 राहुल कुमार दास (@Rahul_Invest) नाम के एक एक्स यूजर ने तस्वीर को शेयर करके लिखा “भारत रेल पटरियों को बिजली संयंत्रों में बदल रहा है। टिकाऊ बुनियादी ढांचे के लिए एक गेम-चेंजिंग कदम में, भारत का स्टार्टअप सन-वेज रेलवे पटरियों के बीच सीधे हटाने योग्य सौर पैनल लगा रहा है। कोई अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं, रेल सेवाओं में कोई व्यवधान नहीं, शून्य दृश्य प्रदूषण। इस दृष्टिकोण से सालाना 1 टेरावॉट-घंटे से अधिक बिजली का उत्पादन हो सकता है, जो संभावित रूप से 200,000 से अधिक घरों को बिजली प्रदान कर सकता है – यह सब हमारे पास पहले से मौजूद जगह को फिर से कल्पना करके किया जा सकता है।” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

 

  इस तरह के कई और दावों का लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

पड़ताल  

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें सूर्या एनर्जी इंडोटामा नाम की एक वेबसाइट मिली। यहां इस तस्वीर को 19 मई 2025 को पोस्ट किया गया था। इसके साथ एक रिपोर्ट भी छपी थी जिसमें लिखा गया था “स्वच्छ ऊर्जा नवाचार अब स्विट्जरलैंड से आ रहा है। अपनी सटीक परिवहन प्रणाली के लिए मशहूर देश ने एक बार फिर सक्रिय रेलवे ट्रैक पर सौर पैनल लगाने की पायलट परियोजना के माध्यम से सफलता हासिल की है। इस परियोजना की शुरुआत सन-वेज नामक स्विस स्टार्टअप ने की थी, जो अक्षय ऊर्जा प्रौद्योगिकी के विकास पर ध्यान केंद्रित करता है।” 

  

 

  आगे हमें कीवर्ड से सर्च करने पर SWI swissinfo.ch पर 29 अप्रैल 2025 को वायरल तस्वीर के साथ एक रिपोर्ट देखने को मिली।  SWI बर्न में स्थित एक स्विस बहुभाषी अंतर्राष्ट्रीय समाचार और सूचना कंपनी है। यह स्विस ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन का एक हिस्सा है। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि “स्विटजरलैंड ने रेल पटरियों को सौर ऊर्जा संयंत्रों में बदला” स्कुडेरी और उनके स्टार्टअप सन-वेज़ पश्चिमी स्विट्जरलैंड के कैंटन न्यूचैटेल के एक छोटे से गांव बैट्स में 100 मीटर लंबे सौर पैनल लगाए गए हैं।

 

पड़ताल का नतीजा 

  हमारी पड़ताल से यह साफ है कि स्विट्जरलैंड की ट्रेन का पटरियों पर लग रहे सोलर पैनल की तस्वीर को भारत का बताकर भ्रामक दावा किया जा रहा है। 

 



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