सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में पुलिसकर्मी एक व्यक्ति को सड़क पर बहुत बुरी तरह से पीट रहा है। पुलिसकर्मी उस तब तक पीटता है जब तक वह बेहोश नहीं हो जाता है। इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि वीडियो में दिख रहा आरोपी अल्पसंख्यक मुस्लिम लड़का है, जिसे मध्य प्रदेश में वक्फ अधिनियम का विरोध करने पर पीटा गया। अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो 2020 का है, और दो पुलिसकर्मी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में नशे में धुत एक व्यक्ति की पिटाई कर रहे थे, क्योंकि वह हंगामा कर रहा था।
आपको बता दें कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम देश में लागू हो चुका है। इसे लेकर कई जगह विरोध प्रदर्शन हुए हैं। पश्चिम बंगाल में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान 11 अप्रैल को हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें तीन लोग मारे गए और सैकड़ों लोग अपने घरों को छोड़ कर चले गए थे।
क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि मध्य प्रदेश में वक्फ बिल के खिलाफ प्रदर्शन करने पर पुलिस ने एक मुस्लिम लड़के को पकड़ लिया और पीट पीटकर उसकी हत्या कर दी।
इस्माइल मिर्ज़ा नाम के एक फेसबुक यूजर ने लिखा “मध्य प्रदेश में वक्फ बिल के खिलाफ प्रदर्शन करने पर पुलिस ने मुस्लिम लड़के की पीट-पीटकर हत्या कर दी” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट नीचे देखा जा सकता है।

इसी तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें द न्यू इंडियन एक्सप्रेस पर यह खबर देखने को मिली। इस खबर को 2020 में प्रकाशित किया गया था। इस खबर में वायरल हो रहे वीडियो के विजुअल मौजूद थे। खबर में पता चला कि मामला भोपाल का है। जिसमें छिंदवाड़ा में दो पुलिसकर्मी कृष्ण डोंगरे और आशीष ने एक व्यक्ति जो हंगामा कर रहा था उसकी पिटाई की। इस पूरे मामले में जांच के आदेश दिए गए थे। खबर का स्क्रीनशॉट नीचे देखा जा सकता है।

यहां से यह साफ हो गया कि यह वीडियो वक्फ बोर्ड के खिलाफ प्रदर्शन से संबंधित नहीं बल्कि 2020 का है।

आगे पड़ताल करने पर हमें स्वराज इंडिया का एक्स पोस्ट मिला। इस पोस्ट में यह वीडियो मौजूद था। इस पोस्ट को 24 मई 2020 को पोस्ट किया गया था। इस पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा गया था “यह घटना मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के पिपरा गांव की है। यह बहुत ही विचलित करने वाला वीडियो है। हमें नहीं पता कि इस व्यक्ति का अपराध क्या है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पुलिसकर्मियों द्वारा इस तरह का व्यवहार उचित है?” (पोस्ट का आर्काइव लिंक)

पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि घटना 2020 की है जिसे हालिया वक्फ बोर्ड के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन से जोड़कर शेयर किया जा रहा है।