रेत पर चलते कछुओं के झुंड का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रहा है। कई यूजर इस वीडियो को बिहार का बताकर शेयर कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि बिहार में गंगा नदी के किनारे बड़ी संख्या में कछुए निकल रहे हैं।
पीटीआई फैक्ट चेक की जांच में वायरल सोशल मीडिया पोस्ट भ्रामक निकला। जांच में पता चला कि वायरल वीडियो बिहार की गंगा नदी का नहीं, बल्कि ओडिशा के ऋषिकुल्या नदी मुहाने का है। यूजर्स, ओडिशा के वीडियो को बिहार का बताकर इसे गलत दावे के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।
दावा :
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर आदित्य सिंह नाम के एक यूजर ने 23 फरवरी को वायरल वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “गंगा के किनारे बिहार में निकले कछुआ अनगिनत जिसकी कोई तादात नहीं है, मैंने तो यह जिंदगी में पहली बार देखा। नजर आप भी देखिए और दूसरों को भी दिखाइए…।” पोस्ट का लिंक, आर्काइव लिंक और स्क्रीनशॉट यहां देखें।
फेसबुक पर ईशा गुप्ता नाम की यूजर ने लिखा, “बिहार में गंगा नदी किनारे कछुआ निकल रहा है।” पोस्ट का लिंक, आर्काइव लिंक और स्क्रीनशॉट यहां देखें।
पड़ताल :
वायरल दावे की पुष्टि के लिए डेस्क ने सबसे पहले इनविड टूल की मदद से वीडियो के ‘की-फ्रेम्स’ निकाले। इस दौरान हमें एक फ्रेम में ‘Government of odisha…’ और ‘Olive Ridley sea Turtle Protection Camp’ लिखा बैनर दिखा।
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए डेस्क ने इस बैनर को गूगल लेंस की मदद से रिवर्स इमेज सर्च किया। हमें ओडिया मीडिया आउटलेट ‘prameyanews7’ की वेबसाइट पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में ऐसा ही बैनर मिला।
रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, ओडिशा के गंजम जिले में ऋषिकुल्या नदी मुहाने के पास लाखों की संख्या में दुर्लभ ओलिव रिडले समुद्री कछुओं ने अंडे दिए हैं। पूरी रिपोर्ट यहां क्लिक कर पढ़ें।
प्राप्त जानकारी के आधार पर डेस्क ने संबंधित कीवर्ड की मदद से गूगल सर्च किया। इस दौरान हमें इससे जुड़ी कई मीडिया रिपोर्ट मिलीं।
बीबीसी न्यूज के यूट्यूब चैनल पर 24 फरवरी को अपलोड किये गये वीडियो रिपोर्ट में बताया गया कि हर साल सर्दियों में मादा ओलिव रिडले कछुए अंडे देने के लिए ओडिशा के तट पर आती हैं और गर्मियों में लौट जाती हैं। करीब सात हफ्ते बाद इन अंडों से नन्हें कछुए निकलते हैं। वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम 1972 के तहत इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। वीडियो यहां क्लिक कर देखें।
टाइम्स ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर 25 फरवरी, 2025 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा के गंजम जिले के ऋषिकुल्या नदी मुहाने पर बड़ी संख्या में ओलिव रिडले कछुए अपने वार्षिक सामूहिक घोंसले के लिए पहुंचे हैं। इस प्रक्रिया को “अरिबाडा” के रूप में जाना जाता है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि घोंसला बनाने की प्रक्रिया इस साल 16 फरवरी से शुरू हुई और इसके 25 फरवरी तक जारी रहने की उम्मीद है। ओलिव रिडले कछुए उसी तट पर लौटते हैं, जहां उनका जन्म हुआ था। पिछले साल इन कछुओं ने ऋषिकुल्या में सामूहिक घोंसला नहीं बनाया था। इस साल अब तक 6.82 लाख से अधिक कछुए अंडे दे चुके हैं, जो 2023 के 6.37 लाख के रिकॉर्ड से अधिक है। पूरी रिपोर्ट यहां क्लिक कर पढ़ें।
इससे पहले ऐसा ही नजारा 2023 में देखने को मिला था। पड़ताल के दौरान हमें इंडिया टीवी के यूट्यूब चैनल पर 12 मार्च 2023 को अपलोड किया गया वीडियो मिला, जिसमें बड़ी संख्या में कछुए देखे जा सकते हैं। मार्च 2023 में ओडिशा के गंजम जिले में ऋषिकुल्या नदी मुहाने पर आठ दिनों की सामूहिक नेस्टिंग अवधि के दौरान 6.37 लाख से अधिक कछुओं ने अंडे दिए थे। वीडियो रिपोर्ट यहां देखें।
हमारी अब तक की जांच से यह साफ है कि वायरल वीडियो बिहार की गंगा नदी का नहीं, बल्कि ओडिशा के ऋषिकुल्या नदी मुहाने का है। यूजर्स, ओडिशा के वीडियो को बिहार का बताकर इसे गलत दावे के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।
दावा
“बिहार में गंगा नदी किनारे कछुआ निकल रहा है।”
तथ्य
पीटीआई फैक्ट चेक की जांच में वायरल सोशल मीडिया पोस्ट भ्रामक निकला।
निष्कर्ष
वायरल वीडियो बिहार की गंगा नदी का नहीं, बल्कि ओडिशा के ऋषिकुल्या नदी मुहाने का है। यूजर्स, ओडिशा के वीडियो को बिहार का बताकर इसे गलत दावे के साथ सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।
(This story was originally published by PTI as part of the Shakti Collective. Except for the headline and opening introduction para this story has not been edited by Amar Ujala staff)








