सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में भारत स्थित अमेरिकी दूतावास दिखाई दे रहा है। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि भारतीय नावों पर हुए हमलों के बाद भारत ने अमेरिकी दूतावास के बाहर सुरक्षा को बैरिकेड हटा दिए हैं।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को 13 साल पुराना पाया है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि भारतीय नावों पर हुए हमलों के बाद भारत ने अमेरिकी दूतावास के बाहर सुरक्षा को बैरिकेड हटा दिए हैं।
मिडिल ईस्ट समाचार अपडेट (@aadil_husssain2) नाम के एक्स यूजर ने लिखा, ’बड़ी खबर। भारत ने USA की कड़ी आलोचना की भारत ने कड़ा संदेश देते हुए भारतीय नागरिकों को ले जा रहे एक जहाज पर अमेरिका की बेलगाम आक्रामकता की निंदा की है। भारत सरकार ने अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा हटा दी है और अमेरिकी राजनयिकों के पहचान पत्र भी वापस ले लिए हैं। पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें एबीपी न्यूज की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 17 दिंसबर 2013 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ने आज अमेरिकी दूतावास के बाहर लगे सुरक्षा बैरिकेड हटा दिए। यह कदम सरकार द्वारा न्यूयॉर्क में भारत की डिप्टी कॉन्सुल जनरल देवयानी खोबरागड़े के साथ अमेरिकी अधिकारियों के बर्ताव के जवाब में कई जवाबी कदम उठाने की घोषणा के तुरंत बाद उठाया गया।
आगे की पड़ताल में हमें रॉयटर्स की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 18 दिसंबर 2013 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मंगलवार को नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के बाहर से कंक्रीट के सुरक्षा बैरियर हटा दिए गए। यह कदम पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में गिरफ्तारी के बाद एक भारतीय राजनयिक की स्ट्रिप-सर्च (कपड़े उतरवाकर तलाशी) किए जाने के जवाब में उठाया गया लगता है। यह राजनयिक विवाद 12 दिसंबर को न्यूयॉर्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास की डिप्टी कॉन्सुल जनरल देवयानी खोबरागड़े की गिरफ़्तारी से शुरू हुआ था। उन पर वीजा धोखाधड़ी और अपनी भारतीय हाउसकीपर को दी जाने वाली सैलरी के बारे में झूठ बोलने और गलत बयान देने के आरोप थे।
पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को 13 साल पुराना पाया है।








