हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें एक व्यक्ति को बेरहमी से पीटा जा रहा था। इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि यह कश्मीरी ज़िप लाइन ऑपरेटर है जिसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी पहलगाम आतंकी हमले के सिलसिले पकड़ा है।
यह दावा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि एक वीडियो सामने आया है जिसमें एक व्यक्ति जिपलाइन कर रहा है और अपनी वीडियो रिकॉर्ड करता है। उसी समय वीडियो में गोली चलने की भी आवाज आती है और दिखाता है कि जिपलाइन ऑपरेटर द्वारा कथित तौर पर तीन बार “अल्लाहु अकबर” का नारा लगाता है। पोस्ट में आगे आरोप लगाया गया कि अरशद नदीम नाम के ऑपरेटर को एनआईए ने हिरासत में ले लिया है और वायरल वीडियो में उसे पीटता हुआ दिखाई दे रहा है।
अमर उजाला ने अपने फैक्ट चेक में पाया कि वायरल वीडियो में कश्मीरी ज़िप लाइन ऑपरेटर का नहीं है। यह फुटेज 2018 से इंटरनेट पर दिख रहा है। इसका 22 अप्रैल, 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले से कोई संबंध होने का दावा भ्रामक है।
क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि एनआईए ने जिपलाइन ऑपरेटर को पकड़ा है। साथ ही उसे कोड़े मारकर उससे सच पता लगाने की कोशिश कर रही है।
दीपक शर्मा (@SonOfBharat7) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “हिन्दू पर्यटक को मौत के मुँह में धक्का देने वाले अरशद नदीम ज़िप लाइन ऑपरेटर का NIA ऑफिस में स्वागत है वीडियो वायरल होने के बाद आज शाम ही इस आतंकवादी को गिरफ्तार कर NIA को सौंपा गया है… आपकी क्या राय.. मार दिया जाये या छोड दिया जाये?”
पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
इसी तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें शेर मोहम्मद बुगती जो बलूच रिपब्लिकन पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता है के एक्स अकाउंट पर यह वीडियो देखने को मिला। यहां यह वीडियो 2018 में पोस्ट किया गया था जिसके साथ कैप्शन लिखा गया था “”कृपया एक नज़र डालें: निर्दोष बलूच छात्र के साथ क्रूर #PakArmy द्वारा शारीरिक यातना का अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार। कृपया, अनुच्छेद 27 (1) के तहत 10 दिसंबर 1984 के जनरल असेंबली के प्रस्ताव 39/46 के अनुसार कार्य करें।”
आगे हमें ऑल्ट न्यूज पर इस वीडियो से जुड़ा एक फैक्ट चेक 2018 में देखने को भी मिला। उस समय ये वीडियो कश्मीर में अत्याचार का बताकर शेयर किया जा रहा था। फैक्ट चेक में इस वीडियो को पाकिस्तान का बताया गया था।
यहां से यह पता चल गया कि वीडियो 2018 से इंटरनेट पर शेयर किया जा रहा है। इसे पहलगाम हमले से जोड़कर गलत जानकारी शेयर की जा रही है।
आगे सर्च करने पर हमें यूट्यूब पर यह वीडियो मिला इसे 2019 में शेयर किया गया था। इसके साथ कैप्शन लिखा गया था “आतंकवादी की पिटाई पुलवामा अटैक”
नीचे दोनों तस्वीरों की तुलना की गई है। एर तरफ वायरल हो रही तस्वीर है तो दूसरी तरफ 2018 की तस्वीर है। दोनों ही तस्वीर एक जैसी नजर आ रही है।
हमारी पड़ताल में यह पता चला कि पुराने वीडियो को हाल ही की घटना से जोड़कर शेयर किया जा रहा है, लेकिन इस वीडियो कहां शूट किया गया था इसकी स्पष्ट जानकारी के लिए कोई भी विश्वसनीय सोर्स नहीं मिली पया।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि वीडियो 2018 से इंटरनेट पर मौजूद है और इसका हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले से कोई संबंध नहीं है।








