: मुंबई के एक युवक ने फास्टैग सिस्टम में बड़ी सुरक्षा खामी का दावा किया है। रुशिल ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया और उसमें आरोप लगाया कि किसी दूसरे व्यक्ति ने उसकी गाड़ी की जानकारी से नया फास्टैग एक्टिव कर लिया, जिससे उसका असली फास्टैग बंद हो गया है।
पूरा मामला क्या है?
मुंबई के रुशिल ने एक्स पर पूरी घटना साझा की है। उन्होंने बताया कि हाईवे पर टोल पेमेंट करने के दौरान अचानक उनका फास्टैग काम करना बंद कर दिया, जबकि उसमें पर्याप्त बैलेंस था। जिसके बाद युवक ने कस्टमर केयर से संपर्क करने की कोशिश की। जिसके बाद उन्हें जानकारी मिली की उनकी गाड़ी के नंबर को इस्तेमाल करके किसी अन्य व्यक्ति ने नया फास्टैग एक्टिव कर लिया है। इसलिए सिस्टम में दूसरा फास्टैग एक्टिव होते ही पुराना इनएक्टिव हो गया।
🚨 FASTag has a MASSIVE security loophole & nobody is talking about it.
Today, literally anyone with access to your car & RC can get a NEW FASTag issued on your vehicle in THEIR name & mobile number.
No OTP.
No owner authorization.
No consent from the actual vehicle owner.
The… pic.twitter.com/6XzPmBqLy8
— Rushil (@RushilM_) May 18, 2026
बिना OTP, बिना मालिक की इजाजत के कैसे बना नया फास्टैग?
रुशिल ने सोशल मीडिया पर इस सुरक्षा खामी को उजागर करते हुए लिखा कि FASTag में एक बहुत बड़ा सुरक्षा लूपहोल है और इस बारे में कोई बात नहीं कर रहा है। ना ही करना चाहता है। आज की तारीख में, आपकी कार और आरसी तक पहुंच रखने वाला कोई भी व्यक्ति अपने नाम और मोबाइल नंबर पर आपकी गाड़ी के लिए एक नया फास्टैग जारी करवा सकता है। कोई ओटीपी नहीं, कोई ओनर ऑथराइजेशन नहीं और असली वाहन मालिक की कोई सहमति नहीं ली जाती।

रुशिल के इस पोस्ट के बाद से बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि आखिर केंद्रीय डेटाबेस में एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर दो अलग-अलग लोगों के नाम पर FASTag कैसे मंजूर हो सकते हैं? अगर यह इतना आसान है, तो इसका इस्तेमाल टैक्स चोरी, गलत टोल कटने या किसी बड़ी धोखाधड़ी के लिए भी किया जा सकता है।
कैसे काम करता है फास्टैग और क्यों बढ़ा खतरा?
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) यानी की नेशनल हाईवे एथॉरिटी ऑफ इंडिया ने फ्यूल और समय बचाने के लिए पूरे देश भर में फास्टैग को अनिवार्य कर दिया है। आपको बता दें कि फास्टैग टोल प्लाजा पर इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक पर काम करती है, जिससे वाहन को बिना रुके टोल पार करने की सुविधा मिलती है।
ICICI और Airtel Payments Bank ने जताई चिंता, जांच शुरू
रुशिल की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिसके बाद से बैंकिग सेक्टर्स में भी खलबली मच गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए आईसीआईसीआई बैंक और एयरटेल पेमेंट बैंक दोनों ने प्रतिक्रिया दी। ICICI Bank का कहना है कि हमें इस मामले की जानकारी मिलने पर गहरी चिंता हुई है। हमारी टीम जल्द ही आपसे संपर्क करेगी और इस समस्या के समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी। जबकि Airtel Payments Bank ने कहा कि इस शिकायत को प्राथमिकता (Priority) के आधार पर लिया गया है और इसकी बारीकी से जांच की जा रही है।
अब वेरिफिकेशन नियम हुए सख्त
हाल के दिनों में फास्टैग के गलत इस्तेमाल और शिकायतों को देखते हुए इसकी वेरिफिकेशन प्रक्रिया को और सख्त किया गया है। अब फास्टैग जारी करने से पहले वाहन की जानकारी और दस्तावेजों की ज्यादा सावधानी से जांच की जा रही है।एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिजिटल टोल सिस्टम को सुरक्षित बनाए रखने के लिए मजबूत ऑथेंटिकेशन और वाहन मालिक की अनिवार्य मंजूरी जैसी अतिरिक्त सुरक्षा पर काम करने की जरूरत है।
वाहन मालिक क्या सावधानी रखें?
अगर आप भी ऐसी किसी परेशानी का सामना नहीं करना चाहते, तो इन आसान तरीके को फॉलो करके अपना बचाव कर सकते हैं…
- समय-समय पर अपना FASTag स्टेटस चेक करें।
- अनजान लिंक या फर्जी कॉल से बचें।
- रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) और वाहन जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
- फास्टैग अकाउंट में संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत बैंक और NHAI से संपर्क करें।
- एसएमएस और टोल ट्रांजैक्शन अलर्ट हमेशा ऑन रखें।








