FD vs पोस्ट ऑफिस नेशनल टाइम डिपॉजिट अकाउंट:  HDFC और यस बैंक ने फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट में बदलाव किया, देखें अब कहां कितना ब्याज
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FD vs पोस्ट ऑफिस नेशनल टाइम डिपॉजिट अकाउंट: HDFC और यस बैंक ने फिक्स्ड डिपॉजिट इंटरेस्ट रेट में बदलाव किया, देखें अब कहां कितना ब्याज

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नई दिल्ली13 घंटे पहले

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HDFC और यस बैंक ने हाल ही में फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में बदलाव किया है। ऐसे में अगर इन बैंकों या किसी अन्य बैंक में FD कराने का प्लान बना रहे हैं तो इससे पहले पोस्ट ऑफिस की नेशनल टाइम डिपॉजिट अकाउंट के बारे में भी जान लेना चाहिए।

यहां हम आपको पोस्ट ऑफिस की नेशनल टाइम डिपॉजिट अकाउंट के अलावा ये भी बता रहे हैं कि देश के प्रमुख बैंक FD पर कितना ब्याज ऑफर कर रहे हैं।

नेशनल सेविंग्स टाइम डिपॉजिट अकाउंट में मिल रहा 7.5% तक का ब्याज

  • यह एक तरह की FD ही है। इसमें एक तय अवधि के लिए निवेश करके आप निश्चित रिटर्न पा सकते हैं।
  • टाइम डिपॉजिट अकाउंट 1 से 5 साल तक की अवधि के लिए 6.9% से 7.5% तक ब्याज दर की पेशकश करता।
  • इसमें 1000 रुपए का मिनिमम निवेश करना होता है। वहीं अधिकतम निवेश की कोई सीमा नहीं है। इस स्कीम से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

FD कराते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान

1. सही टेन्योर चुनना जरूरी FD में निवेश करने से पहले उसके टेन्योर (अवधि) को लेकर सोच-विचार करना जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर निवेशक मेच्योरिटी से पहले विड्रॉल करते हैं, तो उन्हें जुर्माने का भुगतान करना होगा। FD मेच्योर होने से पहले उसे ब्रेक करने पर 1% तक की पेनल्टी देनी पड़ेगी। इससे डिपॉजिट पर कमाए जाने वाला कुल ब्याज कम हो सकता है।

2. एक ही FD में न लगाएं पूरा पैसा यदि आप किसी एक बैंक में FD में 10 लाख रुपए का निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो इसकी जगह एक से ज्यादा बैंकों में 1 लाख रुपए की 8 FD और 50 हजार रुपए की 4 FD में निवेश करें। इससे बीच में पैसों की जरूरत पड़ने पर आप अपनी जरूरत के हिसाब से FD को बीच में ही तुड़वाकर पैसों की व्यवस्था कर सकते हैं। आपकी बाकी FD सेफ रहेंगी।

3. 5 साल की FD पर मिलती है टैक्स छूट 5 साल की FD को टैक्स सेविंग्स FD कहा जाता है। इसमें निवेश करने पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत आप अपनी कुल आय से 1.5 लाख रुपए की कटौती का दावा कर सकते हैं। आसान भाषा में इसे ऐसे समझें, आप सेक्शन 80C के माध्यम से अपनी कुल कर योग्य आय से 1.5 लाख तक कम कर सकते हैं।

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