उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ ने अवैध कब्जे हटवाए जाने से पहले लिए गए निर्णय को लेकर डीएम मंगला प्रसाद सिंह की खुले मन से तारीफ की है। एक मामले में सुनवाई के दौरान बाकायदा लिखित रूप से उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौरभ लवानिया ने गरीबों की चिंता करने और उन्हें आश्रय देने के लिए डीएम की प्रशंसा की है। साथ ही कहा है कि इस तरह के मामलों में पूरे जनपद के अधिकारियों को डीएम की तरह कार्य करने की जरूरत है।
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मामला शाहाबाद तहसील की ग्राम पंचायत सैदपुर का है। यहां के रहने वाले फकीरे, देवीदीन, आशीष कुमार और हरिशरण ने खेल मैदान के लिए आरक्षित ग्राम पंचायत की भूमि पर मकान और दुकान का निर्माण कर लिया था। जनपद में जब आरक्षित श्रेणी की भूमि को चिह्नित कराए जाने का अभियान चला तो उक्त मामला सामने आया। भूमि पर अवैध कब्जा पाया गया तो राजस्व विभाग के कुछ अधिकारी यहां बुलडोजर चलवाकर भूमि खाली कराना चाहते थे।
इस पर डीएम ने कब्जेदारों को जमीन खाली करने का नोटिस दिया था। साथ ही डीएम ने चारों परिवारों को बसाने के लिए गांव में ही संबंधित श्रेणी की भूमि उपलब्ध करा दी। उक्त मामले की सुनवाई फकीरे की याचिका पर उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ में चल रही थी।
बृहस्पतिवार को डीएम की व्यक्तिगत उपस्थिति न्यायालय में थी। सुनवाई के दौरान न्यायाधीश सौरभ लवानिया ने जब पूरे मामले को सुना तो फकीरे की याचिका खारिज कर दी। डीएम के कार्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि गरीबों की चिंता और आश्रय अधिकारियों को इसी तरह देना चाहिए।
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