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देश में 2011 से 2024 के बीच खाने की आदतें तेजी से बदली हैं। लोग अब भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। गरीबों में भी दूध-डेयरी, फल व अंडा-मछली-मांस जैसे पोषक खाद्य पदार्थों की खपत बढ़ी है। ग्रामीणों का खाने का खर्च पहले से बढ़ा औसत घरेलू खर्च – ग्रामीण, शहरी 2011-2012 में 7,531(ग्रामीण), 11,950(शहरी)
2023-2024 में 20,689(ग्रामीण), 29,510(शहरी)
खाने पर खर्च (2011-12) 53.4%, 43.9%
खाने पर खर्च (2023-24) 47.8%, 40.8%
कारण: NFSA और PMGKAY जैसी योजनाओं से गरीबों को मुफ्त अनाज मिला। अनाज का बजट लोग दूसरे खाद्य पदार्थों पर खर्च बढ़ा पाए। पोषण खपत में भी बदलाव
(ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में असमानता घटी) – फल का सेवन बढ़ा- गांव में फल खाने वालों का हिस्सा 68% से बढ़कर 93% हुआ। -औसत मासिक खपत 1.69 से बढ़कर 2.35 किलो। अंडा-मछली-मांस – ग्रामीण गरीब घरों में 45% से बढ़कर 72%। – शहरी गरीब घरों में 57% से बढ़कर 76%। -असमानता 3.0 से घटकर 1.8। दालें – सभी वर्गों में खपत स्थिर रही। सब्जियां – खपत में हल्का सुधार दिखा। डेयरी प्रोडक्ट – ग्रामीण इलाकों में 95% तक पहुंची। माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी, लेकिन राजस्थान में 80% आयरन अनाज से – आयरन, जिंक, कैल्शियम व विटामिन B की खपत औसत से नीचे है। औसत आयरन खपत 11.11 mg/दिन है। महिलाओं के लिए 15 mg/प्रतिदिन जरूरी। – आयरन की कमी का जोखिम 69.2% आंका गया यानी 10 में से लगभग 7 लोगों में कमी की आशंका। – आयरन, फोलेट, जिंक और B-विटामिन का 40–60% हिस्सा अब भी अनाज से मिल रहा है। – राजस्थान में 80% आयरन अनाज लिया जाता है। (यूरोपियन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन- 2026 के घरेलू उपभोग व्यय सर्वे की रिपोर्ट)
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