HCL-फॉक्सकॉन भारत में सेमीकंडक्टर चिप बनाएंगी:  सरकार ने ₹3,700 करोड़ लागत वाले छठे प्लांट को मंजूरी दी; हर महीने 3.6 करोड़ चिप बनेंगी
ऑटो-ट्रांसपोर्ट

HCL-फॉक्सकॉन भारत में सेमीकंडक्टर चिप बनाएंगी: सरकार ने ₹3,700 करोड़ लागत वाले छठे प्लांट को मंजूरी दी; हर महीने 3.6 करोड़ चिप बनेंगी

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नई दिल्ली5 घंटे पहले

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भारत सरकार ने बुधवार को HCL और फॉक्सकॉन को छठा सेमीकंडक्टर प्लांट बनाने की मंजूरी दी है। ये प्लांट 3,700 करोड़ रुपए की लागत से उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल जोन में जेवर एयरपोर्ट के पास बनाया जाएगा। प्लांट 20,000 वेफर्स प्रति माह की क्षमता से चलेगा।

इसमें 36 मिलियन डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का मासिक उत्पादन होगा। इसके अलावा पहले से ही 5 सेमीकंडक्टर यूनिट्स पर काम तेजी से चल रहा है। इस निवेश से मोबाइल, कार, लैपटॉप जैसे उपकरणों के लिए भारत की चीन-ताइवान पर निर्भरता कम होगी।

2027 तक प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद

आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह प्लांट डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स बनाएगा, जिससे भारत में डिस्प्ले पैनल इंडस्ट्री भी विकसित होगी। प्लांट से 2027 तक प्रोडक्शन शुरू होने की उम्मीद है।

फॉक्सकॉन ने उत्तर प्रदेश में 300 एकड़ जमीन खरीदी

पिछले महीने फॉक्सकॉन ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में 300 एकड़ जमीन खरीदी थी। यमुना एक्सप्रेसवे के पास इस जमीन पर कंपनी मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट बनाएगी।

25 साल से एपल-फॉक्सकॉन कर रहे काम

अमेरिकी कंपनी एपल और ताइवान कंपनी फॉक्सकॉन के बीच लंबे समय से पार्टनरशिप है। 2000 के दशक की शुरुआत से, ताइवान की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी फॉक्सकॉन एपल की प्रायमरी सप्लायर रही है, जो आइफोन, आइपैड और मैक बुक जैसे प्रोडक्स्ट्स असेंबल करती है।

दोनों की साझेदारी में एपल सॉफ्टवेयर और डिजाइन पर फोकस कर पाती है। जबकि फॉक्सकॉन हाई वॉल्यूम और प्रिसिजन मैन्यूफैक्चरिंग को संभालती है। आइफोन का बड़ा हिस्सा फॉक्सकॉन के झेंग्झौ प्लांट में बनता है, जिसके चलते इसे आइफोन सिटी कहा जाता है। कंपनी जब मैक्सिमम कैपेसिटी में काम करती है तो रोजाना 500,000 आइफोन असेंबल कर सकता है।

70 स्टार्टअप्स सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे

इस इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए देशभर के 270 संस्थानों के छात्र और 70 स्टार्टअप्स नई चिप डिजाइन टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं। SCL मोहाली ने छात्रों द्वारा बनाए गए 20 प्रोडक्ट्स को मार्केट के लिए तैयार किया है। सरकार का लक्ष्य 2025 तक सेमीकंडक्टर मार्केट में भारत की हिस्सेदारी 10% तक पहुंचाना है।

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