सुबह स्कूल, लौटे तो घर में मोबाइल-लैपटॉप में व्यस्त। फल-पौष्टिक भोजन से दूरी और फास्टफूड की लत। ऐसी दिनचर्या से बच्चों की हड्डियां कमजोर हो रही हैं। कैल्शियम-विटामिन की कमी से विकार पनपने से हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी हो रही हैं। इससे बच्चों में ठिगनापन के साथ बार-बार फ्रैक्चर भी हो रहे हैं। माल रोड स्थित होटल में शुक्रवार को यूपीऑर्थोकॉन में डॉक्टरों ने व्याख्यान देते हुए ये चिंता जताई।
नई दिल्ली के डॉ. विकास गुप्ता ने बताया कि बच्चों के खेलकूद सीमित हो गए हैं। फल, हरी सब्जी, दाल, दूध और इससे निर्मित सामग्री का भोजन पसंद नहीं कर रहे हैं। पेट भरने के लिए फास्टफूड, चॉकलेट और शीतलपेय का उपयोग कर रहे हैं। 5 से 12 साल के बच्चों के अध्ययन में कैल्शियम की कमी से हड्डियां कमजोर मिल रही हैं। धूप की कमी से विटामिन-डी की भी कमी मिल रही है। लेटकर मोबाइल-टीवी देखने से गर्दन और रीढ़ की हड्डी में भी विकार हो रहे हैं। 20 फीसदी बच्चों में ये दिक्कत मिल रही है। इनमें से तीन फीसदी की हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी मिल रही हैं। इससे बच्चों की लंबाई भी प्रभावित हो रही है। मेट्रो शहर और फ्लैटों में रहने वाले बच्चों में ये परेशानी अधिक है।
इंडियन आर्थोपेडिक सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष चंडीगढ़ के डॉ. रमेश सेन ने बताया कि पैदल कम चलने, पौष्टिक भोजन और धूप की कमी से 30 फीसदी युवाओं की हड्डियां कमजोर और खोखली मिल रही हैं। इससे गिरने या चोट लगने से फ्रैक्चर हो रहा है। यहां तक कि कूल्हे के फ्रैक्चर भी बढ़ गए हैं। 15 फीसदी में ये दिक्कत मिल रही है, जिसमें 7 फीसदी युवा मरीज हैं। 55 साल से कम उम्र के मरीजों के उपचार से ये परेशानी ठीक हो रही है। 60 की उम्र के बाद कूल्हा प्रत्यारोपण करना पड़ता है।
ये परेशानी भी हो रही
– बच्चों की गर्दन-कमर और रीढ़ की हड्डी में दर्द।
– पैरों की हड्डियों में तिरछेपन से चाल बिगड़ी।
– चोट लगने पर बार-बार फ्रैक्चर होना।
– पैरों-मांसपेशियों में दर्द, सूजन।
– देर तक खड़े न हो पाना।
इन बातों का रखें ध्यान
– बच्चों को दो से तीन घंटे रोज भागदौड़ वाले खेल खिलाएं।
– धूप में खेलते समय बच्चों का अधिकांश शरीर खुला होना चाहिए।
– दूध, लस्सी समेत दूध से निर्मित शुद्ध सामग्री बच्चों को जरूर दें।
– दाल, हरी सब्जी, सलाद, मौसमी फल का भोजन में अधिक उपयोग करें।
– 11 से दोपहर तीन बजे तक बच्चों को जरूर बाहर निकालें।
– लेटकर, पीठ टेककर फोन देखने या पढ़ाई न करने दें।








