![]()
दिल्ली में स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट।
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट पर 2.3 किलोमीटर लंबे एयरोसिटी-टर्मिनल-1 मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। गोल्डन लाइन के इस विस्तार के पूरा होने के बाद टर्मिनल-1 को मैजेंटा लाइन से जोड़ते हुए इंटरचेंज स्टेशन के रूप में विकस
.
डीएमआरसी अधिकारियों के अनुसार, एयरोसिटी स्टेशन को एक प्रमुख मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। नया कॉरिडोर एयरपोर्ट एक्सप्रेस (ऑरेंज लाइन), गोल्डन लाइन और प्रस्तावित दिल्ली-एसएनबी-अलवर आरआरटीएस कॉरिडोर को आपस में जोड़ेगा, जिससे एयरपोर्ट तक पहुंचने और विभिन्न टर्मिनलों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
शटल बस बदलने की आवश्यकता नहीं होगी
वर्तमान में टर्मिनल-1 से अन्य टर्मिनलों तक जाने के लिए यात्रियों को 20 मिनट के अंतराल पर चलने वाली शटल बसों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन नए कॉरिडोर के चालू होने के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टर्मिनलों के बीच शटल बस बदलने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और यात्री सीधे मेट्रो के जरिए सफर कर सकेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट पर बढ़ते यात्री दबाव को देखते हुए एयरोसिटी स्टेशन पर गोल्डन लाइन का प्लेटफॉर्म 290 मीटर लंबा बनाया जाएगा, जो सामान्य इंटरचेंज स्टेशनों की तुलना में लगभग 30 मीटर अधिक होगा। पूरा कॉरिडोर भूमिगत (अंडरग्राउंड) होगा और इसका डिजाइन एयरपोर्ट सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। परियोजना को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना की प्रमुख बातें
2.3 किमी लंबा एयरोसिटी-टर्मिनल-1 मेट्रो कॉरिडोर बनेगा गोल्डन लाइन का विस्तार कर टर्मिनल-1 को इंटरचेंज स्टेशन बनाया जाएगा एयरपोर्ट एक्सप्रेस, गोल्डन लाइन और प्रस्तावित आरआरटीएस को मिलेगा आपसी कनेक्शन टर्मिनलों के बीच चलने वाली शटल बसों की आवश्यकता समाप्त होगी एयरोसिटी स्टेशन पर 290 मीटर लंबा विशेष प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा पूरा कॉरिडोर भूमिगत होगा और एयरपोर्ट सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा दिसंबर 2028 तक परियोजना पूरी होने की संभावना








