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IIFA 2028 Hollywood Expansion | Andre Timmins Reveals Salman Shahrukh Secrets

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1 घंटे पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने के मकसद से साल 2000 में लंदन से शुरू हुआ आईफा आज 27 साल का सफर तय कर चुका है। अमिताभ बच्चन से लेकर शाहरुख खान, सलमान खान और ऋतिक रोशन तक, बॉलीवुड के कई बड़े सितारों की मौजूदगी ने इस मंच को खास बनाया है।

अबू धाबी में होने वाले आगामी आईफा में भी कई नई चीजें देखने को मिलेंगी। सलमान खान का मल्टी-स्टारर परफॉर्मेंस, जान्हवी कपूर का मां श्रीदेवी को ट्रिब्यूट, डिजिटल मंच पर मिर्जापुर गैंग की मेजबानी और हिमेश रेशमिया की पहली आईफा परफॉर्मेंस इस बार के खास आकर्षण होंगे।

आईफा के सह-संस्थापक आंद्रे टिमिन्स ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में इसके 27 साल के सफर, शुरुआती चुनौतियों, बड़े सितारों से जुड़े दिलचस्प किस्सों और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने यह भी बताया कि 2028 में लॉस वेगास में आईफा वर्ल्डवाइड लॉन्च करने की योजना है, जहां भारतीय और हॉलीवुड सिनेमा को एक मंच पर सम्मानित किया जाएगा।

सवाल: 2000 में लंदन से शुरू हुआ आईफा आज 27 साल का सफर तय कर चुका है। क्या आपने कभी सोचा था कि यह इतना बड़ा मंच बन जाएगा?

जवाब: सच कहूं तो हमने शुरुआत में इतने बड़े सफर की कल्पना नहीं की थी। हमारा मकसद भारतीय सिनेमा को ग्लोबल मंच पर ले जाना और उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाना था। लंदन में हमारी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमिताभ बच्चन और उस साल मिस वर्ल्ड बनीं युक्ता मुखी मौजूद थीं। इसके बाद मीडिया में आईफा की चर्चा शुरू हो गई।

मिलेनियम डोम में हुए पहले आयोजन में करीब 2,500 खास मेहमान शामिल हुए थे। अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, दिलीप कुमार, सुनील दत्त, लता मंगेशकर, आशा भोसले, शाहरुख खान, यश चोपड़ा, यश जौहर और अनिल कपूर जैसे दिग्गजों ने हमारा साथ दिया। अंतरराष्ट्रीय सितारों में एंजेलिना जोली, जैकी चैन, थोरा बर्च और काइली मिनोग भी पहुंचे।

उस समय करीब 400 लोगों के दल को संभालना, सभी की व्यवस्था करना और शो को तय समय पर शुरू करना बड़ी चुनौती थी। अक्षय कुमार का शाओलिन मॉन्क्स के साथ परफॉर्मेंस यादगार रहा। इसके अंत में जैकी चैन का स्टेज पर आना भी खास था।

आईफा के संस्थापक आंद्रे टिमिन्स बोले- शुरुआत में नहीं सोचा था कि भारतीय सिनेमा का ग्लोबल सफर 27 साल तक चलेगा

आईफा के संस्थापक आंद्रे टिमिन्स बोले- शुरुआत में नहीं सोचा था कि भारतीय सिनेमा का ग्लोबल सफर 27 साल तक चलेगा

सवाल: आईफा का विचार आखिर आया कहां से?

जवाब : इससे पहले हम आठ-नौ साल तक घरेलू स्तर पर अवॉर्ड शो कर रहे थे। साल 2000 में हमने सोचा कि भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाना चाहिए। हमारे सामने क्रिकेट और सिनेमा जैसे विकल्प थे, लेकिन हमने सिनेमा चुना।

हिंदी फिल्मों में संगीत, भावनाएं और ड्रामा लोगों को जोड़ते हैं। विदेशों में रहने वाली भारतीय मूल की दूसरी और तीसरी पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ना भी हमारा उद्देश्य था। हम भारतीय सिनेमा को एक ग्लोबल ब्रांड बनाना चाहते थे। शुरुआत में नहीं सोचा था कि यह 27 साल तक चलेगा।

सवाल: पहले आयोजन के बाद आईफा को आगे बढ़ाना कितना मुश्किल था?

जवाब: लंदन के बाद सबसे बड़ा सवाल था कि इसे आगे कैसे चलाया जाए। किसी बड़े आयोजन के लिए केवल जुनून काफी नहीं होता, उसका कमर्शियल मॉडल भी जरूरी होता है। हमने सन सिटी, साउथ अफ्रीका में आयोजन किया। वहां सोनी चैनल ने आमिर खान की फिल्म ‘लगान’ खरीदी थी।

हमने फिल्म का प्रीमियर आईफा के साथ करने का फैसला किया। इससे आयोजन दो दिन का हो गया। आमिर खान, जो आमतौर पर अवॉर्ड शो से दूरी रखते हैं, ‘लगान’ के प्रीमियर के लिए वहां आए। इसके बाद साउथ अफ्रीका में हिंदी सिनेमा को लेकर उत्साह बढ़ा।

धीरे-धीरे हमने फिल्म प्रीमियर, वर्कशॉप, फिल्म फेस्टिवल और बिजनेस फोरम को भी जोड़ा। स्पॉन्सरशिप, टिकट बिक्री और विदेशी सरकारों के सहयोग से आईफा का एक टिकाऊ मॉडल तैयार हुआ।

आईफा में पंकज त्रिपाठी, अली फजल और अभिषेक बनर्जी संभालेंगे डिजिटल मंच की कमान

आईफा में पंकज त्रिपाठी, अली फजल और अभिषेक बनर्जी संभालेंगे डिजिटल मंच की कमान

सवाल: इतने सालों में आईफा की पहचान बनी रही। किन चीजों से आप कभी समझौता नहीं करते?

जवाब: सबसे जरूरी है सम्मान और भरोसा। इंडस्ट्री को पता है कि हमारी नीयत साफ है और हम भारतीय सिनेमा को दुनिया में सम्मान दिलाना चाहते हैं। दूसरी चीज क्वालिटी है। कलाकारों को भुगतान करने के साथ हम स्टेज, प्रोडक्शन और तकनीकी व्यवस्थाओं पर भी बड़ा निवेश करते हैं।

तीसरी बात है नए प्रयोग। हमने साउथ इंडियन सिनेमा के लिए आईफा उत्सवम, डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए डिजिटल अवॉर्ड्स और क्रिएटर्स के लिए आईफा इनसाइडर जैसे कॉन्सेप्ट शुरू किए हैं। अब गुजराती सिनेमा के लिए आईफा रंगीलो और मराठी सिनेमा से जुड़े आयोजनों की भी योजना है।

सवाल: इस बार अबू धाबी में आईफा की सबसे बड़ी खासियत क्या होगी?

जवाब: इस बार हम पारंपरिक अवॉर्ड शो के साथ डिजिटल दर्शकों को भी जोड़ रहे हैं। मेन स्टेज पर वरुण धवन होस्ट करेंगे। डिजिटल मंच पर पंकज त्रिपाठी, अली फजल और अभिषेक बनर्जी होस्टिंग करेंगे। ‘मिर्जापुर’ से जुड़े इन कलाकारों को एक अलग अंदाज में देखना दिलचस्प होगा।

परफॉर्मेंस में सलमान खान, करीना कपूर, शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना जैसे सितारे शामिल होंगे। जान्हवी कपूर अपनी मां श्रीदेवी को खास ट्रिब्यूट देंगी। वरुण धवन के साथ करण जौहर, मनीष पॉल और पहली बार अनन्या पांडे भी को-होस्टिंग करेंगी। इसके अलावा डिजिटल अवॉर्ड्स में हिमेश रेशमिया पहली बार आईफा में परफॉर्म करेंगे। उनके एक्ट को लेकर हमारी बड़ी योजनाएं हैं।

सवाल: पिछले साल ओटीटी और इस बार यूट्यूब लाइव के जरिए डिजिटल दर्शकों को जोड़ने की क्या रणनीति है?

जवाब: पारंपरिक टीवी और डिजिटल, दोनों की अपनी अहमियत है। टीवी का दर्शक वर्ग व्यापक है, जबकि यूट्यूब पर युवा पीढ़ी ज्यादा सक्रिय है। हम दोनों को साथ लेकर चलना चाहते हैं। हमारा उद्देश्य आईफा की मूल पहचान को बरकरार रखना है- संगीत, डांस, मस्ती और सिनेमा का उत्सव। डिजिटल मंच के जरिए उन दर्शकों तक भी पहुंचना चाहते हैं जो पारंपरिक टीवी से अलग तरीके से मनोरंजन देखते हैं।

सवाल: सलमान खान के परफॉर्मेंस को लेकर हर बार उत्सुकता रहती है। इस बार क्या नया होगा?

जवाब: हम सलमान से मिलने वाले हैं। वे भी अपने एक्ट में कुछ नया और अलग करना चाहते हैं। इस बार उनके परफॉर्मेंस में कई दूसरे सितारे भी शामिल होंगे। यानी दर्शकों को मल्टी-स्टारर परफॉर्मेंस देखने को मिलेगी। मीटिंग के बाद इसकी बाकी डिटेल्स फाइनल होंगी।

सवाल: दोबारा अबू धाबी जाने की क्या वजह रही?

जवाब: हम ग्रीस, मलेशिया और सिंगापुर जैसे विकल्पों पर विचार कर रहे थे, लेकिन अबू धाबी सबसे मुफीद लगा। भारत से इसकी दूरी भी कम है। यास एरिना और वहां का प्रशासन हमारे साथ बहुत सहजता से काम करता है। सलमान से बात हुई तो उन्होंने मजाक में कहा कि अबू धाबी पास है, इसलिए उन्हें ज्यादा दूर न ले जाया जाए। यह सहजता और आपसी समझ हमारे लिए मायने रखती है।

आईफा में जान्हवी कपूर देंगी श्रीदेवी को ट्रिब्यूट।

आईफा में जान्हवी कपूर देंगी श्रीदेवी को ट्रिब्यूट।

सवाल: अबू धाबी में मनोरंजन के अलावा और क्या खास होगा?

जवाब: हम छात्रों के लिए मास्टरक्लास आयोजित कर रहे हैं। ‘फ्रेंड्स ऑफ आईफा’ के तहत करीब 150 स्थानीय छात्रों को जोड़ने की योजना है। मीडिया और एंटरटेनमेंट पर बिजनेस फोरम भी होगा। तेलंगाना हमारा स्टेट पार्टनर बना है। वह अपनी फिल्म सिटी और फिल्म इंस्टीट्यूट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करेगा। हमारा मकसद आईफा को सिर्फ एक अवॉर्ड शो नहीं, बल्कि सिनेमा, कारोबार, शिक्षा और संस्कृति से जुड़ा बड़ा मंच बनाना है।

सवाल: क्या इस बार किसी इंटरनेशनल स्टार के आने की भी संभावना है?

जवाब: हम कुछ अंतरराष्ट्रीय सितारों से संपर्क में हैं। यह देख रहे हैं कि आयोजन के समय कौन इस क्षेत्र में मौजूद हो सकता है। इस बारे में अंतिम तस्वीर बाद में साफ होगी। हम स्थानीय सितारों को भी मंच पर शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

सवाल: 2014 में टाम्पा आईफा में जॉन ट्रैवोल्टा आए थे। क्या भविष्य में ऐसे और अंतरराष्ट्रीय सहयोग देखने को मिलेंगे?

जवाब: बिल्कुल, भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाना हमेशा से हमारा उद्देश्य रहा है। इसी दिशा में हम 2028 में लॉस वेगास में अंग्रेजी भाषा में आईफा वर्ल्डवाइड लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं। इसमें भारतीय सिनेमा और हॉलीवुड को एक मंच पर सम्मानित करने का विचार है।

कल्पना कीजिए कि शाहरुख खान और केविन हार्ट साथ में होस्टिंग करें, बिली आइलिश और ए.आर. रहमान परफॉर्म करें या ऋतिक रोशन और जेनिफर लोपेज साथ नजर आएं। हम इसी तरह के बड़े अंतरराष्ट्रीय सहयोग की कल्पना कर रहे हैं।

सवाल: 27 साल के सफर में सबसे चुनौतीपूर्ण आयोजन कौन-से रहे?

जवाब: श्रीलंका और टोरंटो के आयोजन बहुत चुनौतीपूर्ण रहे। श्रीलंका में आंतरिक परिस्थितियों के तुरंत बाद आयोजन करना आसान नहीं था। टोरंटो में शाहरुख खान और प्रियंका चोपड़ा जैसे सितारे मौजूद थे, लेकिन कई दूसरे कलाकारों की फ्लाइट कैंसिल होने और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं ने आखिरी समय में काफी तनाव पैदा कर दिया था। बड़े आयोजनों में सब कुछ योजना के मुताबिक नहीं चलता। ऐसे समय में टीम का साथ और समय पर फैसले लेना सबसे जरूरी होता है।

अबू धाबी में होगा सलमान खान का धमाकेदार परफॉर्मेंस।

अबू धाबी में होगा सलमान खान का धमाकेदार परफॉर्मेंस।

सवाल: आईफा के दौरान सलमान खान से जुड़ा कोई ऐसा किस्सा जो आज भी याद हो?

जवाब: सलमान को दुबई आना था। सुबह चार बजे की फ्लाइट में वे बैठ चुके थे, तभी उन्होंने फोन करके कहा कि उनकी तबीयत ठीक नहीं लग रही और वे सुबह नौ बजे की फ्लाइट से आएंगे। मैंने पूछा कि अब उनका सामान कैसे उतरेगा? उन्होंने कहा कि सामान वहीं रहने दो, वे घर जाकर सुबह नौ बजे आ जाएंगे। मुझे लगा कि शायद वे नहीं आ पाएंगे, लेकिन वे घर गए, सोए भी नहीं और नौ बजे की फ्लाइट पकड़कर पहुंच गए। वे तीन-चार घंटे मेरे लिए बहुत तनावपूर्ण थे, लेकिन उनका कमिटमेंट शानदार था।

सवाल: इतने बड़े सितारों के साथ काम करते हुए किससे सबसे ज्यादा सीखने को मिला?

जवाब: अमिताभ बच्चन जी के साथ काम करना हमेशा खास रहा है। मैंने आईफा में उनके साथ दस साल बिताए। भारतीय सिनेमा को दुनिया भर में सम्मान दिलाने का उनका विजन बहुत बड़ा था। उनके मार्गदर्शन और आशीर्वाद का आईफा के सफर में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

सवाल: आईफा को लेकर आपकी सबसे बड़ी इच्छा क्या है?

जवाब: हम चाहते हैं कि लोग आईफा को अपना समझें। जब किसी से पूछा जाता है कि आईफा किसका है, तो वह किसी आयोजक का नाम लेने के बजाय अमिताभ बच्चन, सलमान खान या शाहरुख खान का नाम ले। यही हमारी सफलता है। हम सब एक परिवार की तरह हैं और चाहते हैं कि यह परिवार दुनिया भर में और बड़ा हो।



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