IT-कंपनियों को अमेरिका से काम मिलना बंद हो सकता है:  अमेरिकी एक्टिविस्ट का दावा-ट्रम्प भारतीय कंपनियों से काम आउटसोर्स रोकने का सोच रहे
ऑटो-ट्रांसपोर्ट

IT-कंपनियों को अमेरिका से काम मिलना बंद हो सकता है: अमेरिकी एक्टिविस्ट का दावा-ट्रम्प भारतीय कंपनियों से काम आउटसोर्स रोकने का सोच रहे

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46 मिनट पहले

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50% टैरिफ के बाद अब डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिकी आईटी कंपनियों को भारत जैसे देशों में काम आउटसोर्स करने से रोकने पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी एक्टिविस्ट और ट्रंप की करीबी समर्थक लॉरा लूमर ने यह दावा किया है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में लूमर ने लिखा कि ‘इसका मतलब है कि अब आपको अंग्रेजी के लिए 2 दबाने की जरूरत नहीं है। कॉल सेंटरों को फिर से अमेरिकी बनाएं।’

लूमर का इशारा भारत के कॉल सेंटर्स की ओर था, जहां से अमेरिकी कंपनियों के लिए सस्ते में कस्टमर सपोर्ट दिया जाता है। उन्होंने इसे “मेक कॉल सेंटर्स अमेरिकन अगेन” का नारा दिया, यानी कॉल सेंटर्स को फिर से अमेरिका में लाने की बात कही।

गूगल और अमेजन सहित कई अमेरिकी कंपनियां भारत से आउटसोर्सिंग करती हैं कई बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियां, जैसे माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजन, IBM, सिस्को, और ओरेकल, भारत में अपनी उपस्थिति रखती हैं और आउटसोर्सिंग करती हैं। ये कंपनियां भारत में अपने डेवलपमेंट सेंटर, रिसर्च सेंटर और कॉल सेंटर चलाती हैं।

भारत से आउटसोर्सिंग के 3 प्रमुख कारण

  1. कम लागत: भारत में लेबर कॉस्ट अमेरिका की तुलना में काफी कम है, जो अमेरिकी कंपनियों के लिए फायदेमंद है।
  2. स्किल्ड वर्कफोर्स : भारत में लाखों इंजीनियर और तकनीकी पेशेवर हर साल ग्रेजुएट होते हैं, जो स्किल्ड है और अच्छी सर्विस देते हैं।
  3. अच्छी IT इंडस्ट्री : भारत में TCS, इंफोसिस, और विप्रो जैसी कंपनियां वैश्विक स्तर पर स्थापित हैं और विश्वसनीय सेवाएं देती हैं।

भारत IT इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है ट्रंप प्रशासन और टैरिफ का डर: हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकारों ने विदेशी आउटसोर्सिंग और रिमोट वर्कर्स पर टैरिफ लगाने की बात कही है। इससे भारत के 283 बिलियन डॉलर के आईटी इंडस्ट्री पर असर पड़ सकता है, क्योंकि यह उद्योग अमेरिका पर बहुत अधिक निर्भर है। इससे भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए नौकरियां कम हो सकती हैं।

ट्रम्प ने हाल ही में कहा था भारत के साथ संबंधों को रीसेट करने के लिए तैयार इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शुक्रवार को भारत के खिलाफ दिए गए अपने बयान पर करीब 12 घंटों के अंदर ही बैकफुट पर चले गए। उन्होंने शाम 6-7 बजे के बीच व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक सवाल पर कहा- ‘मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा। भारत के साथ संबंधों को रीसेट करने के लिए हमेशा तैयार हूं।’

इससे पहले शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे उन्होंने सोशल मीडिया ट्रुथ पर लिखा था, ‘ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। उम्मीद है उनका भविष्य अच्छा होगा।’

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