Lieutenant Governor Manoj Sinha on J&K officials transfer CM Omar Abdullah National Conference meeting
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Lieutenant Governor Manoj Sinha on J&K officials transfer CM Omar Abdullah National Conference meeting

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Jammu and Kashmir Administrative Service (JKAS) के 48 अफसरों के तबादले के तूल पकड़ने के बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का इस मामले में जवाब आया है। शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में सिन्हा ने कहा कि उन्होंने जो किया वह J&K Reorganisation Act, 2019 में निर्धारित संवैधानिक फ्रेमवर्क के भीतर था। बताना होगा कि The Indian Express ने एक्सक्लूसिव खबर दी थी कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अफसरों के ट्रांसफर का विरोध किया है और इसे लेकर मुख्य सचिव अटल डुल्लू, एलजी मनोज सिन्हा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है।

मनोज सिन्हा ने कहा, “मैं अपने अधिकार क्षेत्र में ही रहता हूं और कभी भी इससे बाहर जाकर कुछ नहीं करूंगा। मुझे अपनी सीमाओं का पता है और मैं कभी भी उन सीमाओं का उल्लंघन नहीं करूंगा।”

दो प्रस्तावों में क्या कहा गया?

शुक्रवार को ही श्रीनगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के विधायकों ने उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के आवास पर बैठक की और दो प्रस्ताव पारित किए। पहले प्रस्ताव में संसद के दोनों सदनों में वक्फ (संशोधन) बिल पारित किए जाने की निंदा की गई और दूसरे प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर में शासन से जुड़ी चिंताओं पर बात की गई है। 

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बैठक के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा, “विधानसभा चुनाव में जम्मू-कश्मीर के लोगों ने हमें जो जनादेश दिया है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए।” एलजी मनोज सिन्हा का नाम लिए बिना सादिक ने कहा, ”जो इस जनादेश का सम्मान नहीं करता, वह इसका अपमान कर रहा है और इस प्रस्ताव के जरिये हमने भारत सरकार से इस जनादेश का सम्मान करने का अनुरोध और मांग की है।”

सादिक ने कहा, “हम केंद्र, एलजी और सरकार के बीच समन्वय चाहते हैं और इसे हमारी कमजोरी न समझें।” कांग्रेस नेता निजामुद्दीन भट ने कहा कि सभी विधायक उमर अब्दुल्ला के साथ खड़े हैं।

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श्रीनगर आने वाले हैं अमित शाह

सूत्रों ने The Indian Express को बताया था कि क्योंकि अफसरों के तबादले जम्मू-कश्मीर के राजस्व विभाग के अफसरों के हैं, इसलिए यह J&K Reorganisation Act, 2019 का भी उल्लंघन हैं। यह Act कहता है कि इस तरह के तबादलों को मंत्रिपरिषद के द्वारा भी मंजूरी मिलना जरूरी है। सरकार और एलजी के बीच यह तनातनी ऐसे वक्त में हुई है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 6 और 7 अप्रैल को श्रीनगर आने वाले हैं।

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