एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी जयपुर में अपने डांस के कारण चर्चा में हैं। जयपुर में उनके डांस वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कुछ यूजर्स ने ट्रोल (मजाक उड़ाना) लिया था। इस पर ममता ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट कर कड़ा जवाब दिया है।
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ममता ने अपनी पोस्ट में लिखा- अच्छा है उस वक्त इंस्टाग्राम नहीं था, जब श्रीकृष्ण गोपियों के साथ रास करते थे। ये उनको भी दिखाते और कहते कि ये कैसा भगवान जो नाचता है। उस रास में महादेव भी पहुंचे थे, दाढ़ी और मूंछो के साथ।
यहां देखिए डांस से जुड़े फोटोज

एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी ने महारानी कॉलेज की स्टूडेंट्स के साथ जयपुर में डांस किया था।

राजस्थान फिल्म फेस्टिवल के मंच पर उन्होंने अपने हिट गानों पर डांस किया था।

फेस्टिवल में ममता को लाइफटाइम अचीवमेंट दिया गया था।

ममता के डांस वीडियो पूरे देश में वायरल है।
जयपुर में अपने ही हिट गानों पर थिरकी थीं ममता
राजस्थान फिल्म फेस्टिवल का 14वां संस्करण 26 सितम्बर को जयपुर के दीप स्मृति ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ था। समारोह में ममता कुलकर्णी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसी दौरान जब उनकी फिल्मों के लोकप्रिय गाने बजाए गए तो ममता ने कुछ स्टेप पर डांस भी किया। वहीं एक दिन पहले भी उन्होंन इसी फेस्टिवल में स्टूडेंट्स के साथ डांस परफॉर्म किया था।
उनकी प्रस्तुति में ‘घातक’ के ‘कोई जाए तो ले आए’, ‘करण अर्जुन’ के ‘एक मुंडा मेरी उम्र का’, ‘भंगड़ा पाले’, सबसे बड़ा खिलाड़ी फिल्म का ‘भोली भाली लड़की’ जैसे गीत शामिल रहे। ममता ने विद्यार्थियों के साथ इन गानों पर डांस किया। प्रस्तुति के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और इसके बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।
डांस के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चा
ममता की इस प्रस्तुति की एक वजह यह भी रही कि पिछले कुछ समय से उनकी सार्वजनिक पहचान उनके फिल्मी दौर के बजाय आध्यात्मिक जीवन से जुड़ी रही हैं। ऐसे में जब वह अचानक अपने 90 के दशक के गानों पर उसी अंदाज में डांस करती नजर आईं तो सोशल मीडिया पर उनके पुराने फिल्मी अवतार की चर्चा शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने उनके डांस को उनके मौजूदा आध्यात्मिक जीवन से जोड़कर प्रतिक्रिया दी।
इसी माहौल के बीच ममता की इंस्टाग्राम पोस्ट सामने आई। पोस्ट में उन्होंने सीधे किसी व्यक्ति या टिप्पणी का नाम नहीं लिया, बल्कि श्रीकृष्ण के गोपियों के साथ रास का उदाहरण देते हुए यह सवाल उठाया कि अगर उस समय सोशल मीडिया का दौर होता तो उस प्रसंग को भी लोग अपनी-अपनी नजर से देखते और सवाल उठाते।
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