NCERT 8वीं सोशल साइंस की नई किताब जारी:  न्यायपालिका का पूरा चैप्टर बदला, जनहित याचिका पर जोर, 3 एक्सपर्ट के नाम हटाए
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NCERT 8वीं सोशल साइंस की नई किताब जारी: न्यायपालिका का पूरा चैप्टर बदला, जनहित याचिका पर जोर, 3 एक्सपर्ट के नाम हटाए

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12 मिनट पहले

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नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने कक्षा 8वीं की सोशल साइंस (भाग-2) की संशोधित किताब जारी कर दी है। इस किताब का नाम Exploring Society: India and Beyond है। यह इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थव्यवस्था जैसे सब्जेक्ट को इंटीग्रेटेड रूप में प्रस्तुत करती है।

यह वही किताब है जिसे 23 फरवरी 2026 को जारी किया गया था। इसे न्यायपालिका से जुड़े विवादित कंटेंट के कारण वापस लिया गया था। अब नए एडिशन में न्यायपालिका पर लिखे गए पूरे चैप्टर को दोबारा लिखा गया है। इस किताब की ऑफलाइन बिक्री 24 फरवरी से बंद कर दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दोबारा लिखी गई किताब

इस किताब से संबंधित सुनवाई के दौरान NCERT ने अदालत से माफी मांगी और स्वीकार किया कि किताब में कुछ गलत कंटेंट शामिल हो गए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने किताब के प्रिंट और डिजिटल दोनों एडिशन के डिस्ट्रीब्यूशन पर रोक लगा दी थी। साथ ही संबंधित चैप्टर को दोबारा लिखने का निर्देश दिया था। अब उसी आदेश के बाद संशोधित किताब पब्लिश की गई है।

किताब से इन हिस्सों को हटाया

नई किताब में “समाज में न्यायपालिका की भूमिका” शीर्षक वाले चैप्टर को पूरी तरह से नया रूप दिया गया है। पहले जहां न्यायपालिका की चुनौतियों, मामलों के लंबित रहने और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों का जिक्र था, वहीं अब इन सभी हिस्सों को हटा दिया गया है।

इसके स्थान पर अब संविधान की रक्षा में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका, न्याय तक आम लोगों की पहुंच, जनहित याचिका (PIL), ट्रिब्यूनल और वैकल्पिक विवाद समाधान (Alternative Dispute Resolution) जैसी व्यवस्थाओं को विस्तार से समझाया गया है।

उदाहरण से समझाई जनहित याचिका

नई किताब में पहली बार जनहित याचिका (Public Interest Litigation) को विस्तार से समझाया गया है। इसमें बताया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत आम जनता के हित में अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है।

छात्रों को उदाहरण के तौर पर हुसैनारा खातून केस, जिसमें विचाराधीन कैदियों की रिहाई का रास्ता खुला। एम.सी. मेहता के पर्यावरण से जुड़े मामले और विशाखा निर्णय के बारे में भी जानकारी दी गई है। ये वही विशाखा निर्णय है जिन्होंने वर्कप्लेस पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ दिशा-निर्देश तय किए।

3 एक्सपर्ट्स के नाम हटाए गए

पुरानी किताब तैयार करने वाली टीम में 51 एक्सपर्ट्स के नाम शामिल थे, लेकिन संशोधित एडिशन में केवल 48 नाम हैं। इसमें मिशेल डेनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्न कुमार के नाम हटा दिए गए हैं। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने यह माना कि पाठ्यपुस्तक तैयार करना सामूहिक प्रक्रिया होती है और किसी एक व्यक्ति को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने पहले दिए गए अपने आदेश में भी संशोधन किया था।

विवाद के बाद सरकार ने किए कई बड़े बदलाव

इस पूरे विवाद के बाद शिक्षा मंत्रालय ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाई। इसमें पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रकाश सिंह को भी शामिल किया गया।

साथ ही नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी के प्रमुख को भी न्यायपालिका से जुड़े स्कूली पाठ्यक्रम की समीक्षा प्रक्रिया में जोड़ा गया। दूसरी ओर NCERT ने भी अपने कोर्स तैयार करने वाली कमेटी का पुनर्गठन किया। साथ ही किताबों के अप्रूवल, पब्लिकेशन और डिस्ट्रीब्यूशन की प्रक्रिया में भी बदलाव किए।

NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी NCF और NEP-2020 के तहत सभी क्‍लासेज की नई किताबें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुरानी किताबों के टॉपिक्‍स को बदलकर नए टॉपिक्‍स किताबों में जोड़े जा रहे हैं। पहली से 8वीं क्लास तक की नई किताबें 2025 में ही पब्लिश की जा चुकी हैं।

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