s jaishankar attacked western countries un over kashmir issue
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s jaishankar attacked western countries un over kashmir issue

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S Jaishankar on Kashmir: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रायसीना डायलॉग 2025 में कश्मीर मुद्दे को लेकर पश्चिमी देशों समेत संयुक्त राष्ट्र संघ पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो आक्रमण था, उसे विवाद में बदल गया। हमलावर और पीड़ित को बराबर रखा गया था। इसके अलावा उन्होंने वैश्विक व्यवस्था और पश्चिम की नीतियों पर भी सवाल उठाए।

एस जयशंकर ने ‘सिंहासन और कांटे: राष्ट्रों की अखंडता की रक्षा’ वाले शीर्षक पर बात करते हुए कहा कि भारत को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे लंबे समय तक चलने वाले अवैध कब्जे का पीड़ित बताया, जिसमें उन्होंने 1947 में जम्मू और कश्मीर पर पाकिस्तान के आक्रमण का जिक्र किया। उन्होंने पाकिस्तान की हरकतों की निंदा करने में संयुक्त राष्ट्र की विफलता की भी आलोचना की है और तर्क दिया कि हमलावर और पीड़ित को अन्यायपूर्ण रूप से समान स्तर पर रखा गया था।

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कश्मीर मुद्दे पर क्या बोले एस जयशंकर?

एस जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कश्मीर मुद्दे के ऐतिहासिक मैनेज करने पर कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, किसी दूसरे देश द्वारा किसी क्षेत्र पर सबसे लंबे समय तक अवैध उपस्थिति और कब्ज़ा भारत से संबंधित है। हम संयुक्त राष्ट्र गए। नतीजा ये हुआ कि जो आक्रमण था, उसे विवाद में बदल दिया गया। हमलावर और पीड़ित को बराबर रखा गया।

जयशंकर ने कहा कि इस विषय पर उनके मन में कुछ प्रश्नचिन्ह है। उन्होंने इस मामले में दोषी पक्षों के नाम गिनाए हैं, उन्होंने अपने संबोधन में ब्रिटेन, कनाडा, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त राज्य अमेरिका का भी उल्लेख किया।

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पश्चिम देश हैं पाखंडी- एस जयशंकर

एस जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप के मामले में पश्चिमी देश पाखंडी हैं। उन्होंने कहा कि आज हम राजनीतिक हस्तक्षेप की बात कर रहे हैं। जब पश्चिम देश, दूसरे देशों का जिक्र करते हैं तो वे लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के लिए ऐसा करता है। जब दूसरे देश पश्चिम में आते हैं, तो ऐसा लगता है कि उनका इरादा बहुत ही दुर्भावनापूर्ण है। उन्होंने क्षेत्र के आधार पर सिद्धांतों के बदलने को लेकर सवाल उठाए।

एस जयशंकर ने कहा कि यदि हमें व्यवस्था की आवश्यकता है, तो उसमें निष्पक्षता होनी चाहिए। हमें एक मजबूत संयुक्त राष्ट्र की आवश्यकता है, लेकिन एक मजबूत संयुक्त राष्ट्र के लिए निष्पक्ष संयुक्त राष्ट्र की आवश्यकता है। एक मजबूत वैश्विक व्यवस्था में मानकों की कुछ बुनियादी स्थिरता होनी चाहिए।





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