Shivraj Singh Chauhan was surprised to see water flowing in opposite direction in Ambikapur Chhattisgarh and started sailing paper boat
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Shivraj Singh Chauhan was surprised to see water flowing in opposite direction in Ambikapur Chhattisgarh and started sailing paper boat

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पानी की अपनी चाल और दिशा होती है। जो किसी के रोके भी नहीं रुकती। ऐसा माना जाता है कि पानी हमेशा ऊपर से नीचे या ऊंचाई से ढलान की ओर बहता है। हालांकि छत्तीसगढ़ में एक ऐसी जगह है जहां पानी नीचे से ऊपर की ओर बहता है। जिसको जानने के बाद हर कोई हैरान होता है। इसी तरह का वाकया केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ हुआ, जब शिवराज ने पानी को नीचे से ऊपर की दिशा में बहते हुए देखा। पानी की इस स्थिति को देखकर वो पूरी तरह से हैरान रह गए।

दरअसल शिवराज चौहान छत्तीसगढ़ के दौरे पर थे। जहां वो छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, बिहार बीजेपी प्रभारी विनोद तावड़े के साथ सरगुजा के लिए क्षेत्र में निकले। उनकी गाड़ी जैसे ही मैनपाट ब्लॉक के पास पहुंची तभी गाड़ी के ड्राइवर ने ढलान में न्यूट्रल करके जैसे ही ब्रेक छोड़ा, गाड़ी ऊंचाई की ओर चलने लगी। इसको देखकर केंद्रीय मंत्री बहुत खुश हुए।

शिवराज सिंह चौहान ने गाया गाना

इसी दौरान वो सरगुजा के उस स्थान पर पहुंचे जहां पानी नीचे से ऊपर उल्टा बहता है। इस स्थान को उल्टा पानी भी कहा जाता है। वहां पहुंचने के बाद शिवराज पूरी तरह से हैरान रह गए। उन्होंने कहा, ‘मैंने आजतक ऐसा नहीं देखा कि पानी नीचे से ऊपर की दिशा में बह रहा हो। इसके वैज्ञानिक कारण क्या हैं, ये देखने और जानने पड़ेंगे। ये चमत्कार है पूरा अद्भुत है। इस जगह को और विकसित एवं प्रचारित करना चाहिए ताकि प्रकृति के इस चमत्कार को लोग अपनी आंखों से देखें। देखिए किस तरह से पानी नीचे से ऊपर बह रहा है।’ इसके साथ ही शिवराज ने कागज की नाव भी बहते पानी में छोड़ा जो तेजी से आगे बढ़ने लगी। शिवराज ने इस दौरान मशहूर गजल गायक रहे जगजीत सिंह के चार लाइनें भी गुनगुनाई। ‘वो कागज की कस्ती वो बारिश का पानी…।’

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यह जगह छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां अंबिकापुर से दरिमा होते हुए मैनपाट जाने वाले रास्ते से जाया जा सकता है। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि यहां पहुंचने वाला हर शख्स आश्चर्यचकित हो जाता है। हालांकि इसके बाद भी यहां अभी तक शोध की कोई टीम नहीं आई है। वहीं भूगोलविदों की मानें तो गुरुत्वाकर्षण व चुंबकीय कारण मानते हैं।





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