Sholay’s jailer Asrani passes away at 84 after wishing everyone happy diwali | शोले के जेलर असरानी का निधन: 84 साल की उम्र में लीं आखिरी सांसें, 4 दिन पहले अस्पताल में भर्ती करवाया गया था; अंतिम संस्कार भी हुआ
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Sholay’s jailer Asrani passes away at 84 after wishing everyone happy diwali | शोले के जेलर असरानी का निधन: 84 साल की उम्र में लीं आखिरी सांसें, 4 दिन पहले अस्पताल में भर्ती करवाया गया था; अंतिम संस्कार भी हुआ

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आशीष तिवारी/उमेश कुमार उपाध्याय5 मिनट पहले

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फिल्म शोले में जेलर का किरदार निभाने वाले पॉपुलर एक्टर गोवर्धन असरानी का आज निधन हो गया है। वह 84 साल के थे। उनका निधन दोपहर 1 बजे हुआ है।

गोवर्धन असरानी के मैनेजर बाबू भाई थिबा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में उनके निधन की खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया है कि असरानी को 4 दिन पहले अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। उनकी छाती में पानी भर गया था। 4 दिनों के इलाज के बाद उन्होंने अस्पताल में ही दम तोड़ दिया।

परिवार ने एक्टर का अंतिम संस्कार सांताक्रूज के शांतिनगर स्थित श्मशान भूमि में आज शाम किया है।

निधन की खबर सामने आने से कुछ समय पहले ही गोवर्धन असरानी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट के जरिए दिवाली की शुभकामनाएं दी गई थीं।

असरानी के सोशल मीडिया अकाउंट से की गई आखिरी पोस्ट।

असरानी के सोशल मीडिया अकाउंट से की गई आखिरी पोस्ट।

असरानी ने अपने एक्टिंग करियर में कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में अभिनय किया है। इनमें शोले, अभिमान, चुपके-चुपके, छोटी सी बात, भूल भुलैया शामिल हैं। फिल्म शोले में असरानी का बोला गया डायलॉग ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’ काफी हिट रहा।

दैनिक भास्कर को दिया था आखिरी इंटरव्यू

निधन से ठीक पहले असरानी ने दैनिक भास्कर को आखिरी इंटरव्यू दिया था। उन्होंने अगस्त में शोले के 50 साल पूरे होने के खास मौके पर हमसे बात की थी। उन्होंने फिल्म शोले में जेलर का किरदार निभाने पर कहा था- ‘मुझे फिल्म के बारे में कुछ भी पता नहीं था। मुझे लगा कि प्रोड्यूसर-डायरेक्टर एक रोल के लिए बुला रहा है। मैं मिलने गया तो रमेश सिप्पी के साथ सलीम-जावेद भी मिले। जावेद साहब ने स्क्रिप्ट सुनाई कि अटेंशन हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं। यह किरदार बेवकूफ है, लेकिन ऐसा लगता है कि दुनिया का सबसे समझदार आदमी यही है। मैंने सोचा कि ऐसा किरदार तो कभी नहीं निभाया। उन्होंने मुझे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान की एक किताब पढ़ने के लिए दी। उसमें हिटलर के 10-12 पोज थे।’

‘उन्होंने बताया कि हिटलर पब्लिक के बीच आने से पहले अपने कमरे में फोटोग्राफर के साथ आर्मी की ड्रेस पहनकर रिहर्सल करता था। उसमें से 3-4 पोज मैंने पकड़े और किरदार में वैसा ही एटीट्यूड लाया। फिल्म लंबी हो गई थी तो मेरा सीन काट दिया गया था। नागपुर में एक जर्नलिस्ट ने वह सीन देखा और कहा कि वह सीन तो फिल्म की जान है। फिर बाद में मेरे सीन को जोड़ा गया। आज भी लोग मुझे इस किरदार की वजह से पहचानते हैं।’

‘मुझे लग गया था कि जावेद साहब ने जो पढ़कर सुनाया था अगर उसमें गलती की तो डायरेक्टर तो मारेंगे ही, राइटर भी मारेंगे। शूटिंग शुरू होने से 10 दिन पहले तक मैंने डायलॉग की प्रैक्टिस की। मुझे अशोक कुमार की एक बात याद थी कि डायलॉग याद कर लेना, बाकी डायरेक्टर पर छोड़ देना। वो अपने हिसाब से काम निकलवा लेंगे। उसी हिसाब से मैंने शूटिंग पर जाने से पहले पूरी तैयारी कर ली थी। मुझे नहीं लगता कि जेलर के अलावा कोई और किरदार निभा सकता था।’

असरानी ने कहा था- मुझे आज भी लोग जेलर के नाम से पहचानते हैं

आखिरी इंटरव्यू में उन्होंने कहा था- ‘मैं अभी जनवरी में कोटा के पास एक गांव में शूटिंग कर रहा था। सभी गांव वाले इकट्ठा हो गए। उसमें एक चार साल की छोटी सी बच्ची थी। प्रोड्यूसर ने बताया कि बच्ची और उसकी मां मिलना चाहती है। मुझे लगा कि चार साल की छोटी सी बच्ची क्या किसी एक्टर को पहचानेगी, लेकिन वह बच्ची मुझे देखती ही बोली वो असरानी जेलर। मुझे लगता है कि यह एक किरदार की जीत है।’



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