राम चरित मानस की पंक्तियां… विनय न मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीत. बोले राम सकोप तब, भय बिनु होय न प्रीत… ‘मतलब ये कि जब विनम्रता से समुद्र नहीं पिघला और तीन दिन बीत गए, तब श्रीराम ने क्रोधित होकर कहा, ‘भय के बिना प्रेम नहीं होता’. यह चौपाई उस समय की है […]





